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बिटिया के आने की राह निहार रहा परिवार

Fri, 04 Mar 2022 11:29 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Mar 2022 11:29 PM IST
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The family is waiting for the arrival of the daughter
अमेठी : ऋतिका सिंह। -संवाद - फोटो : AMETHI
अमेठी। मुंशीगंज बाजार निवासी शिक्षक दंपती व अन्य परिवारीजनों को यूक्रेन के कीव में मेडिकल की पढ़ाई करने गई बिटियों के सकुशल वापसी की कोई राह नहीं नजर आ रही है। ऋतिका के परिवारीजनों ने बताया कि उनकी बेटी कड़ी मशक्कत और जद्दोजहद के बाद यूक्रेन से हंगरी स्थित दूतावास तक पहुंच गई है।
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तहसील क्षेत्र के मुंशीगंज स्थित एचएएल गेट नंबर-2 भुसियावां रोड निवासी भीमसेन इंटर कॉलेज की प्रधानाध्यापक डॉ. सरिता सिंह और गाजनपुर दुवरिया स्थित इंटर कॉलेज के शिक्षक भूपेंद्र नाथ सिंह की छोटी बेटी ऋतिका सिंह यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित यूनिवर्सिटी की एमबीबीएस की तृतीय वर्ष की छात्रा है। ऋतिका के बाबा वंशराज सिंह रिटायर्ड शिक्षक हैं। शिक्षक भूपेंद्र नाथ सिंह ने बताया कि रेड अलर्ट घोषित होने के बाद बिटिया ने बताया कि यहां स्थिति गंभीर होती जा रही है। इसके बाद कई गुना दाम देकर कई बार फ्लाइट का टिकट कराया गया लेकिन लगातार फ्लाइट रद्द होती रहीं। जब वहां की स्थिति बहुत गंभीर हुई तो लगातार बच्चे एंबेसी से संपर्क करते रहे लेकिन मदद नहीं मिल पा रही थी। 24 फरवरी को ऋतिका अपने साथियों के साथ कैब बुक करके बस स्टैंड के लिए निकली।
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वह सीधे रेलवे स्टेशन पहुंची। यहां भगदड़ मची हुई थी। किसी तरह ट्रेन में बैठ कर ऋतिका अपने साथियों के साथ नीव रेलवे स्टेशन पहुंची। यहां से वह किसी तरह बस के माध्यम से बॉर्डर पर पहुंची। बस चालक इंडियन था। उसने किसी तरह बॉर्डर के समीप स्थित रेलवे स्टेशन पहुंचाया। वहां 12 घंटे के बाद किसी तरह वह ट्रेन में बैठकर हंगरी पहुंची। उन्होंने बताया कि कीव में पांच दिनों तक बेटी व उसके साथी वहां बने बंकर में रहे। बंकर से निकलने के बाद ऋतिका व उसके अन्य साथी किसी तरह ट्रेन से वहां से 1300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हंगरी बॉर्डर के लिए निकले। किसी तरह जब वह बॉर्डर पर पहुंचे तो तीन दिन तक वहां परेशान रहे। बताया कि ऋतिका चार दिन तक भूखी प्यासी रही।
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किसी तरह बड़े कष्टों के बाद बिटिया व उसके साथी हंगरी स्थित दूतावास पहुंचे। शुरुआती दौर में बच्चों को किसी तरह की मदद नहीं मिल पा रही थी। दो मार्च को रितिका हंगरी पहुंच गई। अब वह पूरी तरह सुरक्षित है। हंगरी पहुंचने के बाद एंबेसी द्वारा रहने खाने की व्यवस्था कराई गई है। शुक्रवार को ऋतिका व उसके साथी हंगरी एयरपोर्ट पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि पूरा परिवार बिटिया की वापसी के लिए परेशान है। ईश्वर से सिर्फ प्रार्थना की जा रही थी कि किसी तरह बिटिया सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाए। पूरा परिवार और अन्य स्वजन बिटिया के स्वदेश आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
यूक्रेन से सकुशल लौटे देवीदयाल और जुनैद
अमेठी। शहर के गंगागंज निवासी मोटर मैकेनिक मो. रईस और का पुत्र जुनेद यूक्रेन स्थित लिविव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस का द्वितीय वर्ष का छात्र है। बृहस्पतिवार रात करीब 10:30 बजे इकलौता पुत्र जुनेद फोर व्हीलर से घर पहुंचा तो घर में खुशियां छा गई। जुनैद ने बताया कि 24 फरवरी को वह कैब से निकला और बस के माध्यम से वह पोलैंड बॉर्डर से करीब 50 से 55 किलोमीटर पहले पहुंचा। वहां से पैदल पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचा। जहां करीब नौ किलोमीटर लंबी कतार के बाद एंट्री पॉइंट पर पहुंचा तो वहां अन्य देशों के लोगों ने भी विवाद करना शुरू कर दिया। बॉर्डर पर लगी फोर्स ने लाठीचार्ज कर दिया।
फिर उसके बाद नौ किलोमीटर की लंबी कतार में लगकर वह एंट्री गेट तक पहुंचा। जुनैद ने बताया कि एंबेसी के मिथुन सर हम लोगों को शेल्टर होम ले गए जहां से सारी व्यवस्थाएं मिलीं। जुनैद ने बताया कि करीब सात दिन बिना खाए पिए और सोए वह पोलैंड पहुंचा था। जुनेद व अन्य छात्र पोलैंड से एयरपोर्ट के विमान से गाजियाबाद पहुंचे और जहां से उन्हें यूपी भवन ले जाया गया और सभी औपचारिकता पूरी करने के बाद जुनैद कार से निशुल्क घर पहुंचा। जुनैद एवं उसके माता पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार जताया।

शहर के ही लोटन शाह की तकिया रायपुर फुलवारी निवासी श्यामलाल चौरसिया का पुत्र देवीदयाल चौरसिया यूक्रेन के ओडेसा गवर्नमेंट मेडिकल यूनिवर्सिटी मैं एमबीबीएस मे पांचवें वर्ष का छात्र है। बृहस्पतिवार देर शाम देवी दयाल घर पहुंचा तो घर में खुशी का माहौल छा गया। देवी दयाल ने बताया कि हम लोग और हमारे साथी नजदीक से ड्रोन हमले का भयावह दृश्य देख चुके हैं। बस के माध्यम से 12 हजार रुपये किराया खर्च कर हम लोग रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। जहां एंबेसी के लोग हम लोगों को बॉर्डर से रिसीव कर शेल्टर होम ले गए। एक मार्च तक हम लोग वहां रहे। सभी व्यवस्थाएं भारत सरकार की तरफ से सुनिश्चित कराई गई थीं। उसके बाद हम लोग एयरफोर्स के विमान से करीब 7:30 घंटे का सफर कर गाजियाबाद पहुंचे। जहां हम लोगों को यूपी भवन ले जाया गया। वहां से कार से घर भेजा गया। स्वामी दयाल चौरसिया और उनके पिता श्यामलाल चौरसिया सहित अन्य परिजन व रिश्तेदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भारत सरकार का आभार जता रहे हैं।
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