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Amethi News: रोजा के साथ नौकरी व घर-परिवार की संभाल रहे जिम्मेदारी
Wed, 12 Mar 2025 12:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 12 Mar 2025 12:07 AM IST
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कमरौली (अमेठी)। रमजान माह में रोजा रखने वालों में नौकरी-पेशे से जुड़े लोग भी आगे हैं। अल्लाह की इबादत के लिए वह रोजा रखे हैं तो नौकरी का फर्ज निभाकर घर की जिम्मेदारियों को पूरा कर रहे हैं। भूख-प्यास को हंसी-खुशी बर्दाश्त कर दिनभर की भागदौड़ में भी उन्हें सुकून है। रोजेदार पूरी शिद्दत के साथ रमजान माह के दूसरे अशरे का रोजा रख रहे हैं।
मंगलवार को रमजान माह का दूसरा अशरा शुरू हो गया है। दौड़भाग के बाद एक भी रोजा न छोड़ने वाले पेशे से मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव कठौरा निवासी मोहम्मद शमीम का कहना है कि मेहनत के साथ रोजा रखना अल्लाह को बेहद पसंद है। इसलिए वह काम के दौरान भी हमेशा रोजा रखते हैं। बाजारशुक्ल के सत्थिन गांव निवासी पेशे से वकील शाहिद अदनानी रोजाना बाइक से तहसील मुसाफिरखाना आते-जाते हैं। पेशे से जुड़ी तमाम दिक्कतों के बावजूद नेक नीयती से वह रोजा रखते हैं।
इंडोरामा फैक्टरी में काम करवाने वाले कमरौली के पूरे बुद्धूदुलारी नगर निवासी मोहम्मद मासूम का कहना है कि रोजे के जरिये हमें लोगों की भूख और प्यास का अहसास होता है। इसलिए हमें गरीबों पर रहम दिखाना चाहिए। वह काम के दौरान भी हमेशा रोजा रखते हैं। रोजाना ट्रेन से लखनऊ का सफर करने वाले साॅफ्टवेयर इंजीनियर जलालपुर तिवारी निवासी अकील अहमद का कहना है कि रोजा वह अल्लाह को राजी रखने के लिए रखते हैं और नौकरी से वह अपनी घर जिम्मेदारियों को अंजाम देते हैं। रोजा रखने से उनको मानसिक रूप से मजबूत रहने की प्रेरणा मिलती है।
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मंगलवार को रमजान माह का दूसरा अशरा शुरू हो गया है। दौड़भाग के बाद एक भी रोजा न छोड़ने वाले पेशे से मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव कठौरा निवासी मोहम्मद शमीम का कहना है कि मेहनत के साथ रोजा रखना अल्लाह को बेहद पसंद है। इसलिए वह काम के दौरान भी हमेशा रोजा रखते हैं। बाजारशुक्ल के सत्थिन गांव निवासी पेशे से वकील शाहिद अदनानी रोजाना बाइक से तहसील मुसाफिरखाना आते-जाते हैं। पेशे से जुड़ी तमाम दिक्कतों के बावजूद नेक नीयती से वह रोजा रखते हैं।
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इंडोरामा फैक्टरी में काम करवाने वाले कमरौली के पूरे बुद्धूदुलारी नगर निवासी मोहम्मद मासूम का कहना है कि रोजे के जरिये हमें लोगों की भूख और प्यास का अहसास होता है। इसलिए हमें गरीबों पर रहम दिखाना चाहिए। वह काम के दौरान भी हमेशा रोजा रखते हैं। रोजाना ट्रेन से लखनऊ का सफर करने वाले साॅफ्टवेयर इंजीनियर जलालपुर तिवारी निवासी अकील अहमद का कहना है कि रोजा वह अल्लाह को राजी रखने के लिए रखते हैं और नौकरी से वह अपनी घर जिम्मेदारियों को अंजाम देते हैं। रोजा रखने से उनको मानसिक रूप से मजबूत रहने की प्रेरणा मिलती है।
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