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गोमती नदी ने बदली अपनी मुख्यधारा
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मुसाफिरखाना (अमेठी)। अयोध्या-रायबरेली राष्ट्रीय राज मार्ग पर पडने वाली गोमती नदी पर बने आमघाट पुल के पश्चिमी छोर से गोमती नदी ने अपनी धारा बदल दी है। गोमती की मुख्य धारा बदलने से बड़ी संख्या मेें किसानों की भूमि उसमें समा रही है। ऐसे में किसानों की समस्या बढ़ गई है। किसानों ने जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र से होकर गुजरने वाली गोमती नदी का बहाव पिछले कुछ दिनों से मुख्य धारा से अलग हो रहा है। स्थिति यह है कि नदी आमघाट पुल से करीब 50 मीटर तक अपना मार्ग पूरी तरह छोड़ चुकी है। पुल के पास बना बांध ही सहायक साबित हो रहा है।
साथ ही पिछले कई वर्षों से बाढ़ की स्थिति नहीं बनना भी किसानों के निए किसी वरदान से कम नहीं है। बावजूद इसके नदी की धारा बदलने से बड़ी संख्या में किसानों की खेती योग्य भूमि धीरे-धीरे हो रहे कटान में समाहित होती जा रही है। ऐसे में बरसात आने पर किसानों को होन वाले बड़े नुकसान का अंदेशा सताने लगा है।
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थौरी गांव के श्याम सुंदर सिंह के अनुसार उनके गांव के जय प्रकाश, अशोक कुमार, सुंदरलाल, राज कुमार, बैजनाथ, नन्हेलाल, शिव पूजन, राजू, जगन्नाथ, रामअधार, मुरली व जग प्रसाद समेत बड़ी संख्या में किसानों की भूमि नदी में समा गई है। बरसात से इतना पहले नदी के कटान को लेकर किनारे बसे गांव के किसानों की नींद उड़ गई है।
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मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र से होकर गुजरने वाली गोमती नदी का बहाव पिछले कुछ दिनों से मुख्य धारा से अलग हो रहा है। स्थिति यह है कि नदी आमघाट पुल से करीब 50 मीटर तक अपना मार्ग पूरी तरह छोड़ चुकी है। पुल के पास बना बांध ही सहायक साबित हो रहा है।
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साथ ही पिछले कई वर्षों से बाढ़ की स्थिति नहीं बनना भी किसानों के निए किसी वरदान से कम नहीं है। बावजूद इसके नदी की धारा बदलने से बड़ी संख्या में किसानों की खेती योग्य भूमि धीरे-धीरे हो रहे कटान में समाहित होती जा रही है। ऐसे में बरसात आने पर किसानों को होन वाले बड़े नुकसान का अंदेशा सताने लगा है।
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थौरी गांव के श्याम सुंदर सिंह के अनुसार उनके गांव के जय प्रकाश, अशोक कुमार, सुंदरलाल, राज कुमार, बैजनाथ, नन्हेलाल, शिव पूजन, राजू, जगन्नाथ, रामअधार, मुरली व जग प्रसाद समेत बड़ी संख्या में किसानों की भूमि नदी में समा गई है। बरसात से इतना पहले नदी के कटान को लेकर किनारे बसे गांव के किसानों की नींद उड़ गई है।