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Amethi News: लोगों को जीवन जीना सिखाती है रामायण
Sat, 01 Mar 2025 12:44 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 01 Mar 2025 12:44 AM IST
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अमेठी सिटी। सांसारिक यात्रा के दौरान हम सभी को किस प्रकार से परमात्मा की भक्ति करनी है। जीवन जीने का आधार क्या है। यह सब धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है। ये बातें गौरीगंज के मधवापुर पहाड़गंज में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को प्रवाचक उमेश त्रिपाठी महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि श्रीमद्भगवत गीता हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ माना गया है। वैसे तो हिंदू धर्म में चार प्रमुख ग्रंथ हैं, महाभारत, रामायण, गीता और श्रीमद्भागवत महापुराण, इन सभी चारों ग्रंथों से हमें कई प्रकार से शिक्षा प्राप्त होती है। जीवन का मुख्य आधार ही यह चारों ग्रंथ माने गए हैं। महाभारत ग्रंथ हमें घर-परिवार व सामाजिक तौर पर कैसे रहना है, इसकी शिक्षा प्रदान करता है।
इसी प्रकार रामायण लोगों को जीवन जीना सिखाती है। गीता से हमें शिक्षा मिलती है कि अंत में संसार से हमें कैसे जाना है। इसी प्रकार श्रीमद्भागवत महापुराण से हमें यह शिक्षा मिलती है कि शिष्य जब तक गुरु के प्रति समर्पित नहीं हो जाता, गुरु वचनों पर श्रद्धा-विश्वास न हो, तब तक गुरु का ज्ञान हमारे हृदय में नहीं उतर सकता।
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प्रवाचक ने कहा कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे हैं, वहां आपका, अपने ईष्ट या अपने गुरु का अपमान न हो, यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। इस मौके पर रामखेलावन पाल, जीवनलाल शुक्ल, द्वारिका प्रसाद पांडेय, ग्राम प्रधान यदुनाथ मौर्य व शिवपूजन मिश्र आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने कहा कि श्रीमद्भगवत गीता हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ माना गया है। वैसे तो हिंदू धर्म में चार प्रमुख ग्रंथ हैं, महाभारत, रामायण, गीता और श्रीमद्भागवत महापुराण, इन सभी चारों ग्रंथों से हमें कई प्रकार से शिक्षा प्राप्त होती है। जीवन का मुख्य आधार ही यह चारों ग्रंथ माने गए हैं। महाभारत ग्रंथ हमें घर-परिवार व सामाजिक तौर पर कैसे रहना है, इसकी शिक्षा प्रदान करता है।
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इसी प्रकार रामायण लोगों को जीवन जीना सिखाती है। गीता से हमें शिक्षा मिलती है कि अंत में संसार से हमें कैसे जाना है। इसी प्रकार श्रीमद्भागवत महापुराण से हमें यह शिक्षा मिलती है कि शिष्य जब तक गुरु के प्रति समर्पित नहीं हो जाता, गुरु वचनों पर श्रद्धा-विश्वास न हो, तब तक गुरु का ज्ञान हमारे हृदय में नहीं उतर सकता।
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प्रवाचक ने कहा कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे हैं, वहां आपका, अपने ईष्ट या अपने गुरु का अपमान न हो, यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। इस मौके पर रामखेलावन पाल, जीवनलाल शुक्ल, द्वारिका प्रसाद पांडेय, ग्राम प्रधान यदुनाथ मौर्य व शिवपूजन मिश्र आदि मौजूद रहे।