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Amethi News: पितृदोष दूर करता है पीपल पूजन व तर्पण
Fri, 12 Sep 2025 01:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 12 Sep 2025 01:09 AM IST
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अमेठी में पितृदोष निवारण को पीपल के पेड़ के नीचे तर्पण व पिंडदान करते श्रद्धालु।-संवाद
अमेठी। पितृ पक्ष पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। पितर अक्सर पशु-पक्षियों के रूप में धरती पर आते हैं, इसलिए इस दौरान गाय, कौवे और चींटियों को भोजन कराना भी शुभ माना गया है।
आचार्य डॉ. अनिल पांडेय व्यास ने बताया कि कई बार अनजाने में पूर्वजों का अपमान हो जाता है, जिससे परिवार पर पितृदोष का प्रभाव पड़ता है। इसे दूर करने के लिए पितृ पक्ष में तर्पण और विशेष उपाय करने की परंपरा है।
आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृ पक्ष के दौरान किसी तालाब या नदी में तांबे के लोटे में काले तिल डालकर तर्पण करने से पितृ दोष में कमी आती है। इसके साथ ही श्राद्ध पक्ष में प्रतिदिन पीपल के वृक्ष पर दूध, जल और पुष्प अर्पित करने से भी पितृदोष समाप्त होता है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना पितृ दोष निवारण का उत्तम उपाय है। आचार्य ने बताया कि वैसे तो दान-पुण्य हर समय फलदायी होता है, लेकिन पितृ पक्ष में इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
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इन उपायों से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर सुख-समृद्धि की कृपा बनाए रखते हैं। तर्पण कर रहे श्रद्धालुओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। अमित त्रिपाठी ने कहा कि पूर्वजों के आशीर्वाद से ही घर में सुख-शांति रहती है। तर्पण करके आत्मा को शांति और संतोष मिलता है। लालता प्रसाद मिश्र ने बताया कि श्राद्ध से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार में खुशहाली आती है। यह परंपरा हमारी संस्कृति की धरोहर है। रामप्रसाद ने कहा कि पूर्वजों के स्मरण से हमें जीवन के संस्कार और दिशा मिलती है। तर्पण करना हमारा कर्तव्य है।
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आचार्य डॉ. अनिल पांडेय व्यास ने बताया कि कई बार अनजाने में पूर्वजों का अपमान हो जाता है, जिससे परिवार पर पितृदोष का प्रभाव पड़ता है। इसे दूर करने के लिए पितृ पक्ष में तर्पण और विशेष उपाय करने की परंपरा है।
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आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृ पक्ष के दौरान किसी तालाब या नदी में तांबे के लोटे में काले तिल डालकर तर्पण करने से पितृ दोष में कमी आती है। इसके साथ ही श्राद्ध पक्ष में प्रतिदिन पीपल के वृक्ष पर दूध, जल और पुष्प अर्पित करने से भी पितृदोष समाप्त होता है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना पितृ दोष निवारण का उत्तम उपाय है। आचार्य ने बताया कि वैसे तो दान-पुण्य हर समय फलदायी होता है, लेकिन पितृ पक्ष में इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
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इन उपायों से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर सुख-समृद्धि की कृपा बनाए रखते हैं। तर्पण कर रहे श्रद्धालुओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। अमित त्रिपाठी ने कहा कि पूर्वजों के आशीर्वाद से ही घर में सुख-शांति रहती है। तर्पण करके आत्मा को शांति और संतोष मिलता है। लालता प्रसाद मिश्र ने बताया कि श्राद्ध से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार में खुशहाली आती है। यह परंपरा हमारी संस्कृति की धरोहर है। रामप्रसाद ने कहा कि पूर्वजों के स्मरण से हमें जीवन के संस्कार और दिशा मिलती है। तर्पण करना हमारा कर्तव्य है।