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Amethi News: पिंडदान कर पितरों को किया नमन
Wed, 10 Sep 2025 01:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 10 Sep 2025 01:18 AM IST
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अमेठी में मंगलवार को पितरों का तर्पण करते श्रद्धालु।-संवाद
अमेठी। पितृ पक्ष के दूसरे दिन मंगलवार को लोगों ने पितरों को याद कर श्रद्धा और आस्था के साथ नमन किया। सुबह से ही श्रद्धालु पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान में जुटे रहे।
गांवों से लेकर धार्मिक स्थलों तक लोगों ने सूरज को साक्षी मानकर तिल और जल अर्पित कर विधिपूर्वक श्राद्ध किया। इसके बाद ब्राह्मणों को भोज कराया। आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृ पक्ष में प्रत्येक परिवार अपने पितरों की पुण्यतिथि के अनुसार पिंडदान करता है। मान्यता है कि इस दिन विधिविधान से किया गया तर्पण और पिंडदान पितरों को तृप्त करता है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति आभार प्रकट करने और संस्कारों को संजोकर रखने का माध्यम भी है। मंगलवार को पिंडदान करने वाले श्रद्धालु बड़ेलाल मिश्र ने कहा कि यह परंपरा हमें हमारे पितरों से जोड़ती है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त होता है।
जगदीश मिश्र ने बताया कि पितरों की तृप्ति से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। संजय सिंह ने कहा कि तर्पण और पिंडदान करना हमारे जीवन का धर्म है, जिसे निभाना जरूरी है। रामअंजोर ने कहा कि पितृ पक्ष हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञ होने का अवसर देता है और यही कारण है कि पूरा परिवार इस अनुष्ठान में शामिल होता है।
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ऐसे करें तीसरे दिन का तर्पण
आचार्य सुनील शास्त्री ने बताया कि तीसरे दिन का तर्पण करने के लिए पितरों को शहद, तुलसी, कच्चा दूध, जौ और गंगाजल का मिश्रण अर्पित करें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं और धूप-बत्ती करें। मंत्रोच्चार के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और पितृ पक्ष के दौरान घर में शांति का माहौल बनाए रखें।
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गांवों से लेकर धार्मिक स्थलों तक लोगों ने सूरज को साक्षी मानकर तिल और जल अर्पित कर विधिपूर्वक श्राद्ध किया। इसके बाद ब्राह्मणों को भोज कराया। आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृ पक्ष में प्रत्येक परिवार अपने पितरों की पुण्यतिथि के अनुसार पिंडदान करता है। मान्यता है कि इस दिन विधिविधान से किया गया तर्पण और पिंडदान पितरों को तृप्त करता है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति आभार प्रकट करने और संस्कारों को संजोकर रखने का माध्यम भी है। मंगलवार को पिंडदान करने वाले श्रद्धालु बड़ेलाल मिश्र ने कहा कि यह परंपरा हमें हमारे पितरों से जोड़ती है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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जगदीश मिश्र ने बताया कि पितरों की तृप्ति से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। संजय सिंह ने कहा कि तर्पण और पिंडदान करना हमारे जीवन का धर्म है, जिसे निभाना जरूरी है। रामअंजोर ने कहा कि पितृ पक्ष हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञ होने का अवसर देता है और यही कारण है कि पूरा परिवार इस अनुष्ठान में शामिल होता है।
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ऐसे करें तीसरे दिन का तर्पण
आचार्य सुनील शास्त्री ने बताया कि तीसरे दिन का तर्पण करने के लिए पितरों को शहद, तुलसी, कच्चा दूध, जौ और गंगाजल का मिश्रण अर्पित करें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं और धूप-बत्ती करें। मंत्रोच्चार के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और पितृ पक्ष के दौरान घर में शांति का माहौल बनाए रखें।