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निष्प्रयोज्य साबित हो रहे रोगी आश्रय केंद्र

Fri, 17 Dec 2021 11:36 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 11:36 PM IST
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Patient shelter centers proving to be unusable
गौरीगंज (अमेठी)। मरीजों के तीमारदारों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तीन सीएचसी में 31.26 लाख रुपये की लागत से बनाए गए रोगी आश्रय केंद्र निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं। देखरेख व मरम्मत होने के अभाव में रोगी आश्रय केंद्र बदहाल हो गए हैं। इन केंद्रों के भवन का प्रयोग तीमारदारों के रुकने के लिए नहीं किए जाने से उन्हें खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ती है।
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अस्पताल में भर्ती मरीजों को रात्रि विश्राम में परेशानी न हो, इसके लिए 2015 में असैदापुर स्थित सीएचसी के साथ ही मुसाफिरखाना व फुरसतगंज में रोगी आश्रय केंद्र निर्माण को मंजूरी मिली थी। मंजूरी के बाद प्रति केंद्र 31.26 लाख रुपये के आगणन को शासन से वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृत मिली थी। स्वीकृति के बाद मुसाफिरखाना व असैदापुर में रोगी आश्रय केंद्र बनाने के लिए प्रति केंद्र 11.14 लाख रुपये तथा फुरसतगंज के लिए 23.54 लाख रुपये की पहली किस्त निर्गत की गईथी। कार्यदायी संस्था की मांग पर शासन ने पुनरीक्षण मूल्यांकन को स्वीकृति देते हुए अवशेष दूसरी किस्त गौरीगंज व मुसाफिरखाना के लिए 20.2 लाख तथा फुरसतगंज को 8.1 लाख रुपये आवंटित किए थे।
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आवंटित राशि से नामित कार्यदायी संस्था ने वर्ष 2018 में निर्माण कार्य पूरा कर भवन स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर किया था। भवन हैंडओवर होने के बाद गौरीगंज अस्पताल परिसर में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इसका लोकार्पण किया था। लोकार्पण के बाद भवन का प्रयोग तीमारदारों के लिए कराने के बजाय जिम्मेदार भवन संचालित करना भूल गए। देखरेख व संचालन नहीं होने से भवन तीन वर्ष में ही जर्जर हो गए हैं।
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आलम यह है कि गौरीगंज स्थित आश्रय केंद्र में जहां ताला बंद रहता है, वहीं मुसाफिरखाना सीएचसी में भवन को कोविड जांच व बैठक करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। फुरसतगंज में भी तीमारदार को विश्राम के बजाय रोगी आश्रय केंद्र का प्रयोग विभागीय कार्यों में किया जा रहा है। अस्पताल में रोगी आश्रय केंद्र होने के बावजूद मरीजों के तीमारदारों को रात्रि विश्राम खुले आसमान के नीचे करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने सभी रोगी आश्रय केंद्रों को संचालित कर तीमारदारों को सहूलियत देने की मांग की है।
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