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Amethi News: जिला अस्पताल में ठिठुर रहे मरीज-तीमारदार
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गौरीगंज (अमेठी)। जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज ठंड से ठिठुर रहे हैं। अस्पताल में ठंड से बचाव के इंतजाम हवा-हवाई हैं। आपातकाल में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के साथ वार्ड में भर्ती मरीजों को महज एक चादर देकर जिम्मेदारी पूरी की जा रही है। भीषण ठंड में मरीज व तीमारदार घर से कंबल व रजाई लाने को मजबूर हैं। दूर-दराज से इलाज कराने आए मरीजों के लिए अस्पताल में रात गुजारना मुश्किल है। मरीजों की पीड़ा सुनकर डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी व्यवस्था करने के बजाय मौन साध लेते हैं।
दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह से शुरू ठंड को देखते हुए शासन व जिला प्रशासन की ओर से बचाव व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। रैन बेसरा व अलाव का प्रबंध करने के साथ किसी भी दशा में बाहर किसी को नहीं रहने को कहा गया है। बावजूद इसके लिए जिला अस्पताल में मरीजों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। भीषण ठंड में मरीजों को भर्ती करने के बाद सिर्फ एक पतली सफेद चादर दी जा रही है। ऐसे में मरीजों व तीमारदारों को घर से रजाई-कंबल लाना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या दूरदराज से आने वाले मरीजों को हो रही है। रजाई-कंबल की व्यवस्था न होने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
छलका मरीजों का दर्द
अमेठी के मोचवा सुंदरपुर गांव निवासी लालता ने कहा कि चार दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल की ओर से कंबल नहीं मिलने पर घर से लाना पड़ा। कनकपुर गांव निवासी मासूम भी गत बृहस्पतिवार से भर्ती हैं। उन्होंने कहा जो चादर अस्पताल से मिली है उससे ठंड दूर नहीं हो रही। पूरे पराग तिवारी निवसी जमुना देवी ने कहा कि ठंड बहुत है। अस्पताल से सिर्फ चादर मिली तो ठंड से बचने के लिए घर से रजाई लानी पड़ी।
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भरेथा निवासी सुरेश चंद्र ने बताया कि ठंड से बचाव के लिए मांग पर अस्पताल की ओर से कंबल नहीं मिला तो अपने घर से रजाई मंगवाई। चंदौकी निवासी जानकारी तीन दिन से भर्ती हैं। कहा कि रात में सर्द हवाओं से काफी दिक्कत हो रही है। घर से कंबल मंगवाने के बाद भी ठंड पूरी रात बनी रहती है।
बंद पड़ा रैन बसेरा
अस्पताल परिसर में रैन बसेरा का निर्माण तो हुआ लेकिन ताला बंद होने से मरीजों के तीमारदारों को परेशानी हो रही है। सीएचसी परिसर में निर्मित रैन बसेरा में एंबुलेंस कर्मियों को कब्जा है। इससे ठंड में रैन बसेरा का लाभ तीमारदारों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उन्हें ठंड में रात बाहर गुजारनी पड़ रही है।
कंबल की कमी नहीं
जिला अस्पताल के पास पर्याप्त कंबल हैं। भर्ती होने वाले सभी मरीजों को कंबल दिए भी जा रहे हैं। हो सकता है कुछ लोगों को कंबल देने में चूक की गई हो। जांच कराई जाएगी। जो दोषी मिलेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. बीपी अग्रवाल, सीएमएस
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दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह से शुरू ठंड को देखते हुए शासन व जिला प्रशासन की ओर से बचाव व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। रैन बेसरा व अलाव का प्रबंध करने के साथ किसी भी दशा में बाहर किसी को नहीं रहने को कहा गया है। बावजूद इसके लिए जिला अस्पताल में मरीजों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। भीषण ठंड में मरीजों को भर्ती करने के बाद सिर्फ एक पतली सफेद चादर दी जा रही है। ऐसे में मरीजों व तीमारदारों को घर से रजाई-कंबल लाना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या दूरदराज से आने वाले मरीजों को हो रही है। रजाई-कंबल की व्यवस्था न होने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
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छलका मरीजों का दर्द
अमेठी के मोचवा सुंदरपुर गांव निवासी लालता ने कहा कि चार दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल की ओर से कंबल नहीं मिलने पर घर से लाना पड़ा। कनकपुर गांव निवासी मासूम भी गत बृहस्पतिवार से भर्ती हैं। उन्होंने कहा जो चादर अस्पताल से मिली है उससे ठंड दूर नहीं हो रही। पूरे पराग तिवारी निवसी जमुना देवी ने कहा कि ठंड बहुत है। अस्पताल से सिर्फ चादर मिली तो ठंड से बचने के लिए घर से रजाई लानी पड़ी।
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भरेथा निवासी सुरेश चंद्र ने बताया कि ठंड से बचाव के लिए मांग पर अस्पताल की ओर से कंबल नहीं मिला तो अपने घर से रजाई मंगवाई। चंदौकी निवासी जानकारी तीन दिन से भर्ती हैं। कहा कि रात में सर्द हवाओं से काफी दिक्कत हो रही है। घर से कंबल मंगवाने के बाद भी ठंड पूरी रात बनी रहती है।
बंद पड़ा रैन बसेरा
अस्पताल परिसर में रैन बसेरा का निर्माण तो हुआ लेकिन ताला बंद होने से मरीजों के तीमारदारों को परेशानी हो रही है। सीएचसी परिसर में निर्मित रैन बसेरा में एंबुलेंस कर्मियों को कब्जा है। इससे ठंड में रैन बसेरा का लाभ तीमारदारों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उन्हें ठंड में रात बाहर गुजारनी पड़ रही है।
कंबल की कमी नहीं
जिला अस्पताल के पास पर्याप्त कंबल हैं। भर्ती होने वाले सभी मरीजों को कंबल दिए भी जा रहे हैं। हो सकता है कुछ लोगों को कंबल देने में चूक की गई हो। जांच कराई जाएगी। जो दोषी मिलेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. बीपी अग्रवाल, सीएमएस