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कई बार सैंबसी आए थे पद्म विभूषण बिरजू महराज
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15 : फुरसतगंज : सैंबसी गांव में बिरजू महाराज को श्रद्धांजलि देते लोग। -संवाद
- फोटो : AMETHI
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फुरसतगंज (अमेठी)। देश-विदेश में अपने नृत्य का लोहा मनवाने वाले बिरजू महाराज की यादें क्षेत्र के सैंबसी गांव से भी जुड़ी हैं। इस गांव में प्रख्यात कथक नर्तक की ममेरी बहन का घर था। ममेरी बहन व अपने भांजों से भी बिरजू महाराज का गहरा लगाव था।
प्रख्यात कथक नृत्य के बूते देश-विदेश में अपना व क्षेत्र का नाम रोशन करने वाले बृजमोहन मिश्र उर्फ बिरजू महाराज की अमेठी से जुड़ी कई यादें उनके दिवंगत होने के बाद लोगों की जबान पर हैं। बिरजू महाराज का ननिहाल जामो के पूरे राघव पंडित गांव में था तो उनकी ममेरी बहन का घर बहादुरपुर ब्लॉक क्षेत्र के सैंबसी में था।
बिरजू महाराज के निधन की खबर गांव पहुंची तो यहां भी मातम पसर गया। बिरजू महाराज के भांजे और शिष्य सतीश्वर प्रसाद मिश्र व राम कृष्ण मिश्र के परिवारों में सन्नाटा पसर गया। सतीश्वर प्रसाद ने बताया कि उनका बचपन बिरजू महाराज के साथ उनके लखनऊ स्थित आवास पर बीता। सतीश्वर ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें बिरजू महाराज की सुपुर्दगी में दिया था।
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मिश्र ने दिल्ली स्थित कथक केंद्र पर कथक नृत्य की शिक्षा ग्रहण की। सतीश्वर उनके अचानक चले जाने से अपने को अनाथ महसूस कर रहे। सूचना मिलने के बाद परिवार के सभी सदस्यों ने अपने आवास पर बिरजू महाराज को श्रद्धांजलि दी।
अपने गुरु व मामा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस मौके पर अत्रि मिश्र, राजा मिश्र, मुनि मिश्र, कामना व शांती समेत कई लोग मौजूद रहे। सतीश्वर ने बताया कि महाराज हमारे गुरु के साथ संरक्षक भी थे।
ऑल इंडिया संगीत नाटक अकादमी से कंपटीशन में पहला स्थान पाने के बाद हमारे पिता ने हमें गुरू जी को सौंप दिया। संसार में उनके जैसा शायद कोई नहीं था। उनके आखिरी दर्शन न कर पाने का दुख है। आज जो भी हूं उनकी देन है।
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प्रख्यात कथक नृत्य के बूते देश-विदेश में अपना व क्षेत्र का नाम रोशन करने वाले बृजमोहन मिश्र उर्फ बिरजू महाराज की अमेठी से जुड़ी कई यादें उनके दिवंगत होने के बाद लोगों की जबान पर हैं। बिरजू महाराज का ननिहाल जामो के पूरे राघव पंडित गांव में था तो उनकी ममेरी बहन का घर बहादुरपुर ब्लॉक क्षेत्र के सैंबसी में था।
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बिरजू महाराज के निधन की खबर गांव पहुंची तो यहां भी मातम पसर गया। बिरजू महाराज के भांजे और शिष्य सतीश्वर प्रसाद मिश्र व राम कृष्ण मिश्र के परिवारों में सन्नाटा पसर गया। सतीश्वर प्रसाद ने बताया कि उनका बचपन बिरजू महाराज के साथ उनके लखनऊ स्थित आवास पर बीता। सतीश्वर ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें बिरजू महाराज की सुपुर्दगी में दिया था।
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मिश्र ने दिल्ली स्थित कथक केंद्र पर कथक नृत्य की शिक्षा ग्रहण की। सतीश्वर उनके अचानक चले जाने से अपने को अनाथ महसूस कर रहे। सूचना मिलने के बाद परिवार के सभी सदस्यों ने अपने आवास पर बिरजू महाराज को श्रद्धांजलि दी।
अपने गुरु व मामा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस मौके पर अत्रि मिश्र, राजा मिश्र, मुनि मिश्र, कामना व शांती समेत कई लोग मौजूद रहे। सतीश्वर ने बताया कि महाराज हमारे गुरु के साथ संरक्षक भी थे।
ऑल इंडिया संगीत नाटक अकादमी से कंपटीशन में पहला स्थान पाने के बाद हमारे पिता ने हमें गुरू जी को सौंप दिया। संसार में उनके जैसा शायद कोई नहीं था। उनके आखिरी दर्शन न कर पाने का दुख है। आज जो भी हूं उनकी देन है।