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पराली जलाई गई तो दंडित होंगे अधिकारी

Thu, 04 Nov 2021 12:09 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 04 Nov 2021 12:09 AM IST
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Officers will be punished if stubble is burnt
गौरीगंज (अमेठी)। तमाम जागरूकता अभियान के बावजूद पराली जलाए जाने की घटनाओं को डीएम ने गंभीरता से लिया है। बुधवार को इसे रोकने के लिए बुलाई गई अफसरों की बैठक में डीएम ने कहा कि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ऐसा नहीं किया गया तो संबंधित अफसर को दोषी मानते हुए उसके खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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खरीफ मौसम की फसलों के अवशेषों को जलाए जाने से उत्पन्न होने वालेे प्रदूषण की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रवैया अख्तियार किया है। इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को आयोजित बैठक में डीएम अरुण कुमार ने कृषि विभाग, राजस्व विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि किसी भी दशा में पराली/फसलों के अवशेष न जलाए जाएं।
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उन्होंने कृषकों को फसल अवशेष जलाने से मिट्टी, जलवायु एवं मानव स्वास्थ्य को होने वाली हानि के विषय में व्यापक रूप से जागरूक करने को कहा। यह भी कहा कि किसानों के मध्य इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्हें बताया जाए कि फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध है। कहा कि पराली न जलाने के संबंध में किसानों को समझाएं। उन्हें जागरूक करें। यदि समझाने के बाद भी कोई किसान न माने तो उसके विरुद्ध कार्रवाई करें। बिना वजह किसी भी किसान को परेशान ना किया जाए।
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उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी/कर्मचारी अपने मूल तैनाती स्थल पर रात्रि निवास करें तथा बिना अनुमति कोई भी अधिकारी/कर्मचारी मुख्यालय ना छोड़े। कहा कि संबंधित ग्राम के प्रधान एवं लेखपाल तथा पंचायत सचिव व कृषि विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों का यह दायित्व होगा कि फसल अवशेष न जलने पाए।
इसके लिए जो भी आवश्यक कदम उठाने हों, उठाया जाए। फसल अवशेष जलाने की घटनाएं सामने आने पर संबंधित ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव व लेखपाल इसके लिए जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डीएम ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि इच्छुक किसानों के खेत से पराली संग्रह कर निराश्रित गोशालाओं में रखवाई जाए। पराली को गोशाला स्थल पर पशुओं के बिछावन, चारे या अन्य उपयोग में लाया जाए।
डीएम ने सभी एसडीएम से कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों में फसल अवशेष जलाए जाने की घटनाएं रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई करना सुनिश्चित करें। किसी भी दशा में अपने क्षेत्र में फसल अवशेष जलाये जाने की घटनाएं न होने दें। यदि कोई किसान पराली जलाए उसके खिलाफ आईपीसी तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण के प्रावधानों के तहत जुर्माना लगाया जाए।
डीएम ने सभी बीडीओ से कहा कि ब्लॉक स्तर पर संबंधित कर्मचारियों के साथ बैठक करें। क्षेत्र में ‘पराली दो, खाद लो’ कार्यक्रम गो-आश्रय स्थलों के माध्यम से संचालित करें। यदि कहीं पर भी पराली जलने की घटना सामने आए तो उसकी सूचना तत्काल कंट्रोल रूम को दें।
डीएम ने अफसरों से कहा कि पराली जलाने पर कृषि भूमि का क्षेत्रफल दो एकड़ से कम होने की दशा में अर्थदंड 2500 रुपये, दो एकड़ से अधिक व पांच एकड़ से कम होने की दशा में अर्थदंड पांच हजार रुपये तथा पांच एकड़ से अधिक होने की दशा में अर्थदंड 15 हजार रुपये प्रति घटना लगाया जाए।

जिले में चलने वाली प्रत्येक कंबाइन हार्वेस्टर के साथ एक कृषि विभाग का कर्मचारी मौजूद रहे जो अपनी देखरेख में कटाई कराए। कोई भी कम्बाइन हार्वेस्टर, सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम अथवा स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा रेक एवं बेलर के बिना चलती मिले तो उसे सीज कर दिया जाए।
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