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Amethi News: स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बनीं मीना देवी
Wed, 29 Oct 2025 12:59 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 29 Oct 2025 12:59 AM IST
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हथकिला गांव में फिनायल की पैकिंग करती समूह की महिलाएं। स्रोत: स्वयं
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अमेठी सिटी। हथकिला गांव के रोशनी स्वयं सहायता समूह की मीना देवी आत्मनिर्भर बनकर दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं। उन्होंने हार्पिक व फिनायल बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति सशक्त की है।
मीना देवी ने बताया कि उनका परिवार पहले केवल खेती पर निर्भर था। उनका सारा समय घर में कामकाज में निकल जाता था। आय सीमित होने से परिवार को आर्थिक कठिनाइयों से जूझना पड़ रहा था। इसका असर बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ रहा था। बताया कि एनआरएलएम से जुड़ने के बाद उन्होंने गांव की 10 महिलाओं को जोड़कर समूह बनाया। वह समूह की कोषाध्यक्ष बनीं। कहा कि 2024 में हार्पिक और फिनायल बनाना शुरू किया। तैयार उत्पाद की स्थानीय बाजार संग प्रदर्शनी व अन्य जिलों में बिक्री शुरू की।
उन्होंने बताया कि समूह सदस्य संग गांव की अन्य महिलाओं को काम मिला। आमदनी होने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। एनआरएलएम उपायुक्त प्रवीणा शुक्ला ने बताया कि रोशनी स्वयं सहायता समूह ने न केवल आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, बल्कि गांव में अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा दी है। समूह स्थानीय स्तर पर उत्पादों के निर्माण और विपणन के माध्यम से नारी शक्ति को स्वावलंबी बना रहा है। इससे महिलाएं अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर रही हैं और बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य व पोषण पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं।
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मीना देवी ने बताया कि उनका परिवार पहले केवल खेती पर निर्भर था। उनका सारा समय घर में कामकाज में निकल जाता था। आय सीमित होने से परिवार को आर्थिक कठिनाइयों से जूझना पड़ रहा था। इसका असर बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ रहा था। बताया कि एनआरएलएम से जुड़ने के बाद उन्होंने गांव की 10 महिलाओं को जोड़कर समूह बनाया। वह समूह की कोषाध्यक्ष बनीं। कहा कि 2024 में हार्पिक और फिनायल बनाना शुरू किया। तैयार उत्पाद की स्थानीय बाजार संग प्रदर्शनी व अन्य जिलों में बिक्री शुरू की।
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उन्होंने बताया कि समूह सदस्य संग गांव की अन्य महिलाओं को काम मिला। आमदनी होने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। एनआरएलएम उपायुक्त प्रवीणा शुक्ला ने बताया कि रोशनी स्वयं सहायता समूह ने न केवल आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, बल्कि गांव में अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा दी है। समूह स्थानीय स्तर पर उत्पादों के निर्माण और विपणन के माध्यम से नारी शक्ति को स्वावलंबी बना रहा है। इससे महिलाएं अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर रही हैं और बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य व पोषण पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं।
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