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Amethi News: कुलसुम निशा को मिला हक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बहाल होगा कोटा
Thu, 04 Jun 2026 12:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Thu, 04 Jun 2026 12:18 AM IST
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कुलसुम निशा। -स्रोत - स्वयं
राजफत्तेपुर। तिलोई के अरियावां गांव निवासी कुलसुम निशा की कानूनी लड़ाई आखिरकार सफल रही। उचित दर दुकान के उत्तराधिकार के मामले में उच्चतम न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रशासन को दुकान आवंटित करने का आदेश दिया है।
कुलसुम के पिता मंजूर अहमद करीब 35 वर्षों तक ग्राम पंचायत की उचित दर दुकान संचालित करते रहे। 24 अप्रैल 2017 को उनके निधन के बाद दुकान उनकी पत्नी बदरुन्निसा के नाम आवंटित हुई। 4 मार्च 2024 को बदरुन्निसा की भी मृत्यु हो गई। इसके बाद दुकान को पड़ोसी ग्राम पंचायत छतहुआं के शंकरगंज स्थित उचित दर दुकान से संबद्ध कर दिया गया।
मां के निधन के बाद कुलसुम ने दुकान के उत्तराधिकार का दावा किया, लेकिन विवाहित होने के आधार पर उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया। परिवार में पांच बहनें हैं। इनमें राशिदा बेगम दिव्यांग और अल्प दृष्टिहीन हैं। उनकी देखभाल की जिम्मेदारी कुलसुम निभाती हैं।
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विभागीय स्तर पर राहत न मिलने पर उन्होंने मंडलायुक्त अयोध्या के समक्ष गुहार लगाई, मगर वहां भी दुकान निरस्त करने का आदेश जारी हो गया। इसके बाद कुलसुम ने दिसंबर 2024 में उच्चतम न्यायालय में अपील दाखिल की। करीब 18 महीने चली सुनवाई के बाद सोमवार को आए निर्णय में न्यायालय ने राशिदा बेगम की दिव्यांगता और उनकी देखभाल में कुलसुम की भूमिका को महत्वपूर्ण माना।
न्यायालय ने कहा कि राशिदा की संरक्षक कुलसुम निशा हैं, इसलिए उचित दर दुकान उनके नाम आवंटित की जाए। ग्रामीण कफील अहमद, मोहम्मद आलम, राम जियावन, तौसीफ अहमद और खान मोहम्मद सहित अन्य लोगों ने इसे न्याय व्यवस्था में विश्वास की जीत बताया।
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कुलसुम के पिता मंजूर अहमद करीब 35 वर्षों तक ग्राम पंचायत की उचित दर दुकान संचालित करते रहे। 24 अप्रैल 2017 को उनके निधन के बाद दुकान उनकी पत्नी बदरुन्निसा के नाम आवंटित हुई। 4 मार्च 2024 को बदरुन्निसा की भी मृत्यु हो गई। इसके बाद दुकान को पड़ोसी ग्राम पंचायत छतहुआं के शंकरगंज स्थित उचित दर दुकान से संबद्ध कर दिया गया।
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मां के निधन के बाद कुलसुम ने दुकान के उत्तराधिकार का दावा किया, लेकिन विवाहित होने के आधार पर उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया। परिवार में पांच बहनें हैं। इनमें राशिदा बेगम दिव्यांग और अल्प दृष्टिहीन हैं। उनकी देखभाल की जिम्मेदारी कुलसुम निभाती हैं।
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विभागीय स्तर पर राहत न मिलने पर उन्होंने मंडलायुक्त अयोध्या के समक्ष गुहार लगाई, मगर वहां भी दुकान निरस्त करने का आदेश जारी हो गया। इसके बाद कुलसुम ने दिसंबर 2024 में उच्चतम न्यायालय में अपील दाखिल की। करीब 18 महीने चली सुनवाई के बाद सोमवार को आए निर्णय में न्यायालय ने राशिदा बेगम की दिव्यांगता और उनकी देखभाल में कुलसुम की भूमिका को महत्वपूर्ण माना।
न्यायालय ने कहा कि राशिदा की संरक्षक कुलसुम निशा हैं, इसलिए उचित दर दुकान उनके नाम आवंटित की जाए। ग्रामीण कफील अहमद, मोहम्मद आलम, राम जियावन, तौसीफ अहमद और खान मोहम्मद सहित अन्य लोगों ने इसे न्याय व्यवस्था में विश्वास की जीत बताया।