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Amethi News: कारगिल शहीद रामनिहोर का स्मारक अधूरा
Sat, 26 Jul 2025 01:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 26 Jul 2025 01:10 AM IST
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भादर (अमेठी)। शहादत पर गांव में संवेदना जताने वालों का तांता लगा। प्रशासनिक अमले के साथ ही जनप्रतिनिधियों ने शहीद की शहादत को अमर पहचान देने का वादा किया। स्मारक बनाने के साथ ही गांव को पक्की सड़क से जोड़ने का वादा किया गया। 26 बरस बाद भी न तो शहीद का स्मारक बना और न ही सड़क बन सकी। शहीद के परिजन और ग्रामीण आज भी पगडंडी के सहारे आते-जाते हैं।
सोनारी गांव के वीर सपूत राम निहोर यादव ने 12 जून 1999 को कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान दिया। शहीद का शव 17 जून 1999 को उनके पैतृक गांव पहुंचा तो संवेदना जताने वालों का तांता लगा। जनप्रतिनिधियों के साथ ही अधिकारियों की फौज परिजनों के साथ खड़ी दिखी। शहीद का स्मारक बनाने के साथ ही गांव में पक्की सड़क बनाने का वादा आज भी आूरा है।
शहीद के भाई राम अचल यादव कहते हैं कि वादे करने वालों ने शहीद परिवार की आज तक सुध नहीं लिए। कहा कि उनके शहीद भाई के नाम पर आधा अधूरा तोरणद्वार बना है। जिसकी रंगाई पोताई स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस के अवसर पर वे खुद के खर्च से करवाते हैं। शहादत को 25 वर्ष बीत गए लेकिन जमीन के अभाव में स्मारक तक नहीं बनाया गया। जमीन मिलती तो वे अपने खर्च से स्मारक बनवा देते। उनके घर आने जाने के लिए एक अदद मार्ग तक नहीं है। पगडंडियों के सहारे आना जाना पड़ता है।
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पत्नी की हो चुकी है मौत, भाइयों के साथ रहती हैं बुजुर्ग मां
शहीद राम निहोर को कोई संतान नहीं थी। उनकी पत्नी शिवकुमारी को सरकार से 20 लाख रुपये मिलने के बाद मायके चली गई। इसी बीच शहीद की पत्नी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। शहीद राम निहोर के पिता राम आधार यादव सेना में थे। चार भाइयों में राम निहोर दूसरे नंबर पर थे। बड़े भाई राम सेवक व तीसरे नंबर के भाई राम अचल भी सेना में थे। दोनों भाई सेवानिवृत हो चुके हैं। चौथे नंबर के भाई राम सूरत घर पर ही रहते हैं। माता मूरता देवी अपने बड़े बेटे रामसेवक के साथ उनकी ससुराल में रहती हैं। पिता राम अधार की मृत्यु 2008 में हो गई थी। मूरता देवी को पति की पेंशन मिलती है।
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सोनारी गांव के वीर सपूत राम निहोर यादव ने 12 जून 1999 को कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान दिया। शहीद का शव 17 जून 1999 को उनके पैतृक गांव पहुंचा तो संवेदना जताने वालों का तांता लगा। जनप्रतिनिधियों के साथ ही अधिकारियों की फौज परिजनों के साथ खड़ी दिखी। शहीद का स्मारक बनाने के साथ ही गांव में पक्की सड़क बनाने का वादा आज भी आूरा है।
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शहीद के भाई राम अचल यादव कहते हैं कि वादे करने वालों ने शहीद परिवार की आज तक सुध नहीं लिए। कहा कि उनके शहीद भाई के नाम पर आधा अधूरा तोरणद्वार बना है। जिसकी रंगाई पोताई स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस के अवसर पर वे खुद के खर्च से करवाते हैं। शहादत को 25 वर्ष बीत गए लेकिन जमीन के अभाव में स्मारक तक नहीं बनाया गया। जमीन मिलती तो वे अपने खर्च से स्मारक बनवा देते। उनके घर आने जाने के लिए एक अदद मार्ग तक नहीं है। पगडंडियों के सहारे आना जाना पड़ता है।
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शहीद राम निहोर को कोई संतान नहीं थी। उनकी पत्नी शिवकुमारी को सरकार से 20 लाख रुपये मिलने के बाद मायके चली गई। इसी बीच शहीद की पत्नी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। शहीद राम निहोर के पिता राम आधार यादव सेना में थे। चार भाइयों में राम निहोर दूसरे नंबर पर थे। बड़े भाई राम सेवक व तीसरे नंबर के भाई राम अचल भी सेना में थे। दोनों भाई सेवानिवृत हो चुके हैं। चौथे नंबर के भाई राम सूरत घर पर ही रहते हैं। माता मूरता देवी अपने बड़े बेटे रामसेवक के साथ उनकी ससुराल में रहती हैं। पिता राम अधार की मृत्यु 2008 में हो गई थी। मूरता देवी को पति की पेंशन मिलती है।