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कोतवाल, दरोगा व एक सिपाही निलंबित
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अमेठी। गुगवाछ गांव में एक साथ हुई चार हत्या के मामले में एसपी ने अमेठी कोतवाल के साथ हलका दरोगा व सिपाही को निलंबित कर दिया है। निलंबन की यह कार्रवाई आईजी के निर्देश पर हुई। गुगवाछ के राजापुर गांव में मंगलवार रात हुई घटना के बाद मौके पर पहुंचे आईजी कवींद्र प्रताप सिंह को पीड़ित परिवार व ग्रामीणों ने पूरी कहानी सुनाई। परिवार ने कहा कि अमेठी कोतवाली पुलिस ग्राम प्रधान आशा तिवारी के इशारे पर काम कर रही थी।
गांव से कोई भी शिकायती पत्र थाने पहुंचता तो उसकी जानकारी तत्काल आशा को हो जाती। जानकारी होते ही ग्राम प्रधान या तो पुलिस को मैनेज कर लेती थी या फिर शिकायत करने वाले पक्ष को धमकाती थी। पुलिस के ग्राम प्रधान के इशारे पर काम करने की जानकारी मिलने के बाद नाराज आईजी ने एसपी को कोतवाल विनोद कुमार सिंह, दरोगा संजय सिंह व हलका सिपाही स्वतंत्र उपाध्याय को निलंबित करने का निर्देश दिया।
आईजी का निर्देश मिलने के बाद सभी को निलंबित कर दिया गया। एसपी दिनेश सिंह ने बताया कि डीसीआरबी प्रभारी उमाकांत को अमेठी का नया कोतवाल बनाते हुए सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी दी गई है। एसपी दिनेश सिंह ने बताया कि परिवार को प्रशासन की ओर से मदद की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने जिले में तैनात सभी पुलिस कर्मियों से अपना एक दिन का वेतन पीड़ित परिवार को देने की अपील की। एसपी ने कहा कि घटना में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
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पीड़ित परिवार की ओर सेे मुख्यमंत्री को संबोधित जो मांगपत्र प्रशासन को दिया गया उसमें नामजद सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, ग्राम प्रधान को पद से बर्खास्त करने, चारों मृतकों के एक-एक आश्रित को नौकरी, सभी को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार के सभी पुरुष सदस्यों का शस्त्र लाइसेंस, घटना की मजिस्ट्रियल जांच, आरोपियों का अवैध निर्माण ढहाने तथा राजस्व लेखपाल व कानून-गो के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
इन सबके बीच भारी सुरक्षा तामझाम के साथ चारों शव गांव पहुंचे तो एक बार फिर लोगों का धैर्य जवाब दे गया। लोगों ने शव वाहन के पहुंचते ही पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों के समझाने का भी लोगों पर कोई असर नहीं हो रहा था। आक्रोशित ग्रामीण दोबारा डीएम को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे।
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गांव से कोई भी शिकायती पत्र थाने पहुंचता तो उसकी जानकारी तत्काल आशा को हो जाती। जानकारी होते ही ग्राम प्रधान या तो पुलिस को मैनेज कर लेती थी या फिर शिकायत करने वाले पक्ष को धमकाती थी। पुलिस के ग्राम प्रधान के इशारे पर काम करने की जानकारी मिलने के बाद नाराज आईजी ने एसपी को कोतवाल विनोद कुमार सिंह, दरोगा संजय सिंह व हलका सिपाही स्वतंत्र उपाध्याय को निलंबित करने का निर्देश दिया।
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आईजी का निर्देश मिलने के बाद सभी को निलंबित कर दिया गया। एसपी दिनेश सिंह ने बताया कि डीसीआरबी प्रभारी उमाकांत को अमेठी का नया कोतवाल बनाते हुए सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी दी गई है। एसपी दिनेश सिंह ने बताया कि परिवार को प्रशासन की ओर से मदद की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने जिले में तैनात सभी पुलिस कर्मियों से अपना एक दिन का वेतन पीड़ित परिवार को देने की अपील की। एसपी ने कहा कि घटना में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
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पीड़ित परिवार की ओर सेे मुख्यमंत्री को संबोधित जो मांगपत्र प्रशासन को दिया गया उसमें नामजद सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, ग्राम प्रधान को पद से बर्खास्त करने, चारों मृतकों के एक-एक आश्रित को नौकरी, सभी को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार के सभी पुरुष सदस्यों का शस्त्र लाइसेंस, घटना की मजिस्ट्रियल जांच, आरोपियों का अवैध निर्माण ढहाने तथा राजस्व लेखपाल व कानून-गो के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
इन सबके बीच भारी सुरक्षा तामझाम के साथ चारों शव गांव पहुंचे तो एक बार फिर लोगों का धैर्य जवाब दे गया। लोगों ने शव वाहन के पहुंचते ही पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों के समझाने का भी लोगों पर कोई असर नहीं हो रहा था। आक्रोशित ग्रामीण दोबारा डीएम को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे।