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आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे जिले के समूह
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गौरीगंज (अमेठी)। अफसरों की नियमित मॉनीटरिंग के चलते जिले में बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूह आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। सामुदायिक निवेश प्राप्त करने वाले समूह सदस्य दोना पत्तल, जूता चप्पल, इंटर लॉकिंग ईंट उघोग, टॉयलेट क्लीनर व हैंडवॉश तैयार करने के साथ मशरूम आदि की खेती कर स्वयं के साथ कई बेरोजगारों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं।
जिले में एनआरएलएम की ओर से गांवों में गठित स्वयं सहायता समूह स्वयं आत्मनिर्भर होते हुए दूसरे बेरोजगारों को रोजगार मुहैया करा रहे हैं। सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर जिले में गठित समूहों को सक्रिय करने के लिए स्वयं मॉनीटरिंग कर रही हैं। समूह में जुड़े ऐसे सदस्य जो शिक्षित हैं उन्हें उनकी रुचि के अनुसार रोजगार मुहैया कराने की कवायद नियमित रूप से की जा रही है।
जिले में कुल 4,980 समूह गठित हैं। इन समूहों में कुल 53,286 महिलाएं जुड़ी हैं। इनमें से 3,551 समूहों को रिवॉल्विंग फंड तो 1,971 समूहों को सामुदायिक निवेश प्राप्त हो गया है। कई समूह सदस्यों द्वारा सक्रिय रूप से उद्योग संचालित करने पर संबंधित बैंक की ओर से सीसीएल प्राप्त हो चुका है। वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले समूह वर्तमान में कोई न कोई रोजगार कर स्वयं के साथ ही अन्य बेरोजगारों को रोजगार मुहैया करा रहे हैं।
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रिवॉल्विंग फंड पाने वाले समूह मोमबत्ती, अगरबत्ती, अचार, मुरब्बा समेत छोटे-छोटे उद्योग चला रहे हैं। सामुदायिक निवेश प्राप्त करने वाले अधिकतर समूह बड़े स्तर पर उद्योग स्थापित कर जूता चप्पल, इंटरलॉकिंग, मूंज क्राफ्ट, मुर्गी फार्म, पान, केला, गुलाब व मशरूम की खेती कर घर बैठे बड़ी कमाई कर रहे हैं।
दोना पत्तल बना रहीं महिलाएं
सिंहपुर ब्लॉक के गांव सिंहपुर में भोले बाबा महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा अपने घर पर दोना पत्तल का उद्योग चलाया जा रहा है। इन्हें रिवॉल्विंग फंड तथा सामुदायिक निवेश निधि प्राप्त हो चुकी है। दोना पत्तल तैयार कराकर यह समूह स्थानीय बाजार में बिक्री कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है। सदस्य रामावती कहती हैं कि 54 हजार रुपये में मशीन में तो दोना छह हजार रुपये दोना पत्तल बनाने का कागज लेकर प्रतिमाह 15,000 रुपये की आमदनी हो रही है।
कर रहीं मशरूम की खेती
जगदीशपुर ब्लॉक के सिंदुरवा में मुस्कान स्वयं सहायता समूह की अनीसा बानो 0.2 हेक्टेयर, उतेलवा गांव में जय श्रीकृष्ण स्वयं सहायता समूह की कविता पाल 0.5 हेक्टेयर तो पलिया पश्चिम गांव में बालाजी स्वयं सहायता समूह की मंगला देवी 0.1 हेक्टेयर में मशरूम की खेती कर रही हैं। अनीसा अब तक 55 हजार, कविता 80 हजार तो मंगला अब तक 60 हजार रुपये के मशरूम बेच चुकी हैं।
टॉयलेट क्लीनर व हैंडवॉश भी
सिहंपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत जैतपुर में संचालित गोवर्धन स्वयं सहायता समूह द्वारा 40 हजार रुपये की लागत से टॉयलेट क्लीनर व हैंडवॉश का उद्योग स्थापित किया गया है। समूह की महिलाएं बड़े स्तर पर पैकिंग कर बाजार में बिक्री कर रही हैं। समूह की आरती, रामकला व संध्या कहती हैं महिलाएं घर पर रहकर जीवन में बदलाव ला रही हैं।
जूता चप्पल की लगाई फैक्टरी
गौरीगंज ब्लॉक के मेदन मवई गांव में संचालित ज्योति स्वयं सहायता समूह की कुसुम अपने घर पर जूता चप्पल की फैक्टरी लगाकर आत्मनिर्भर हुई हैं। कुसुम बताती हैं कि 60 रुपये की लागत से तैयार एक जोड़ी चप्पल की बिक्री वह बाजर में 75 रुपये में कर रही है। इसकी बाजार में कीमत 120 रुपये है। बताया कि वह जितना प्रोडक्शन कर रही हैं उसकी बिक्री तत्काल हो जा रही है। महीने में वह 15 से 20 हजार रुपये की कमाई कर रही हैं।
आत्मनिर्भर हो रहीं महिलाएं
सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर के अनुसार जिले के प्रत्येक गांवों में स्वयं सहायता समूहों को गठित कर उन्हें रोजगार मुहैया कराया जा रहा है। काम करने वालों को वित्तीय सहायता देकर उनके उद्योग को और बड़ा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आज महिलाएं विभिन्न उद्योग के जरिए घर में रहकर अच्छी कमाई कर रही हैं। बीसी सखी के तहत 344 महिलाएं गांवों में बैंकिंग कार्य, पुष्टाहार वितरण, विद्युत बिल कलेक्शन का काम कर रही हैं।
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जिले में एनआरएलएम की ओर से गांवों में गठित स्वयं सहायता समूह स्वयं आत्मनिर्भर होते हुए दूसरे बेरोजगारों को रोजगार मुहैया करा रहे हैं। सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर जिले में गठित समूहों को सक्रिय करने के लिए स्वयं मॉनीटरिंग कर रही हैं। समूह में जुड़े ऐसे सदस्य जो शिक्षित हैं उन्हें उनकी रुचि के अनुसार रोजगार मुहैया कराने की कवायद नियमित रूप से की जा रही है।
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जिले में कुल 4,980 समूह गठित हैं। इन समूहों में कुल 53,286 महिलाएं जुड़ी हैं। इनमें से 3,551 समूहों को रिवॉल्विंग फंड तो 1,971 समूहों को सामुदायिक निवेश प्राप्त हो गया है। कई समूह सदस्यों द्वारा सक्रिय रूप से उद्योग संचालित करने पर संबंधित बैंक की ओर से सीसीएल प्राप्त हो चुका है। वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले समूह वर्तमान में कोई न कोई रोजगार कर स्वयं के साथ ही अन्य बेरोजगारों को रोजगार मुहैया करा रहे हैं।
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रिवॉल्विंग फंड पाने वाले समूह मोमबत्ती, अगरबत्ती, अचार, मुरब्बा समेत छोटे-छोटे उद्योग चला रहे हैं। सामुदायिक निवेश प्राप्त करने वाले अधिकतर समूह बड़े स्तर पर उद्योग स्थापित कर जूता चप्पल, इंटरलॉकिंग, मूंज क्राफ्ट, मुर्गी फार्म, पान, केला, गुलाब व मशरूम की खेती कर घर बैठे बड़ी कमाई कर रहे हैं।
दोना पत्तल बना रहीं महिलाएं
सिंहपुर ब्लॉक के गांव सिंहपुर में भोले बाबा महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा अपने घर पर दोना पत्तल का उद्योग चलाया जा रहा है। इन्हें रिवॉल्विंग फंड तथा सामुदायिक निवेश निधि प्राप्त हो चुकी है। दोना पत्तल तैयार कराकर यह समूह स्थानीय बाजार में बिक्री कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है। सदस्य रामावती कहती हैं कि 54 हजार रुपये में मशीन में तो दोना छह हजार रुपये दोना पत्तल बनाने का कागज लेकर प्रतिमाह 15,000 रुपये की आमदनी हो रही है।
कर रहीं मशरूम की खेती
जगदीशपुर ब्लॉक के सिंदुरवा में मुस्कान स्वयं सहायता समूह की अनीसा बानो 0.2 हेक्टेयर, उतेलवा गांव में जय श्रीकृष्ण स्वयं सहायता समूह की कविता पाल 0.5 हेक्टेयर तो पलिया पश्चिम गांव में बालाजी स्वयं सहायता समूह की मंगला देवी 0.1 हेक्टेयर में मशरूम की खेती कर रही हैं। अनीसा अब तक 55 हजार, कविता 80 हजार तो मंगला अब तक 60 हजार रुपये के मशरूम बेच चुकी हैं।
टॉयलेट क्लीनर व हैंडवॉश भी
सिहंपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत जैतपुर में संचालित गोवर्धन स्वयं सहायता समूह द्वारा 40 हजार रुपये की लागत से टॉयलेट क्लीनर व हैंडवॉश का उद्योग स्थापित किया गया है। समूह की महिलाएं बड़े स्तर पर पैकिंग कर बाजार में बिक्री कर रही हैं। समूह की आरती, रामकला व संध्या कहती हैं महिलाएं घर पर रहकर जीवन में बदलाव ला रही हैं।
जूता चप्पल की लगाई फैक्टरी
गौरीगंज ब्लॉक के मेदन मवई गांव में संचालित ज्योति स्वयं सहायता समूह की कुसुम अपने घर पर जूता चप्पल की फैक्टरी लगाकर आत्मनिर्भर हुई हैं। कुसुम बताती हैं कि 60 रुपये की लागत से तैयार एक जोड़ी चप्पल की बिक्री वह बाजर में 75 रुपये में कर रही है। इसकी बाजार में कीमत 120 रुपये है। बताया कि वह जितना प्रोडक्शन कर रही हैं उसकी बिक्री तत्काल हो जा रही है। महीने में वह 15 से 20 हजार रुपये की कमाई कर रही हैं।
आत्मनिर्भर हो रहीं महिलाएं
सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर के अनुसार जिले के प्रत्येक गांवों में स्वयं सहायता समूहों को गठित कर उन्हें रोजगार मुहैया कराया जा रहा है। काम करने वालों को वित्तीय सहायता देकर उनके उद्योग को और बड़ा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आज महिलाएं विभिन्न उद्योग के जरिए घर में रहकर अच्छी कमाई कर रही हैं। बीसी सखी के तहत 344 महिलाएं गांवों में बैंकिंग कार्य, पुष्टाहार वितरण, विद्युत बिल कलेक्शन का काम कर रही हैं।