फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amethi News ›   Forest area increased on paper, greenery not visible on ground

Amethi News: कागजों में बढ़ा वन क्षेत्र, धरातल पर नहीं दिख रही हरियाली

Sun, 21 Jul 2024 02:17 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Sun, 21 Jul 2024 02:17 AM IST
विज्ञापन
Forest area increased on paper, greenery not visible on ground
अमेठी सिटी। प्रत्येक वर्ष रिकॉर्ड पौधरोपण के बाद भी जिले की हरियाली में इजाफा नहीं हो रहा है। वन विभाग के आंकड़े वन क्षेत्रफल बढ़ने का दावा कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर कहीं वन नहीं दिख रहा है। यह हाल तब है जब पौधरोपण पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। इस कार्य में 26 सरकारी विभाग वन विभाग का सहयोग कर रहे हैं।
विज्ञापन



धरती को हरा-भरा बनाने के लिए वन विभाग प्रति वर्ष पौधरोपण अभियान संचालित करता है। पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड की व्यवस्था की जाती है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्षाकाल 2023 में वन विभाग ने 21 लाख 44 हजार 200 व अन्य विभागों ने 24 लाख नौ हजार 870 पौध रोपित किए थे।
विज्ञापन

जबकि वन विभाग के 4.5 प्रतिशत व अन्य विभागों के दस प्रतिशत पौधे नष्ट होने की बात कही गई है। विभाग का दावा है कि पौधों के सूखने के बाद उनके स्थान पर दोबारा पौध रोपित कर दिए गए हैं। फिलहाल वन विभाग का यह दावा भौतिक धरातल पर कहीं नहीं टिकता।
विज्ञापन
विज्ञापन

कादूनाला परिक्षेत्र को छोड़ दें तो जिले की एक भी ग्राम पंचायत या किसी भी सार्वजनिक स्थल पर वन क्षेत्र तैयार नहीं दिख रहा है। अधिकतर मामलों में उन्हीं स्थानों पर हर साल पौधरोपण होता है, जहां पूर्व में होता रहा है।



नहीं तैयार हो पाया नंदन वन
गौरीगंज स्थित विकास भवन के पास पिछले वर्ष खाली पड़ी भूमि पर पौधरोपण कर नंदन वन तैयार करना था। नगर पालिका परिषद की ओर से तारों की बैरिकेडिंग कर पौध रोपण किया गया था। देख-रेख के अभाव में यहां एक भी पौधा तैयार नहीं हुआ। पूरी जमीन खाली पड़ी थी। शनिवार को एक बार फिर चिह्नित भूमि पर पौधरोपण कर नंदन वन तैयार करने की कोशिश शुरू की गई है। शक्ति वन, खाद्य सहित बाल उपवन व युवा वन की योजना भी धरातल पर कहीं नहीं दिखाई पड़ रही है।



नियमित होती है निगरानी
प्रति वर्ष पौधरोपण के साथ ही लगातार तीन वर्ष तक पौधों की निगरानी की जाती है। तीन वर्ष में रोपित पौधों के सूख जाने की दशा में उसके स्थान पर दूसरे पौधे लगा दिए जाते हैं। फाॅरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में जिले में वन क्षेत्र बढ़ने की पुष्टि हुई है। यह रिपोर्ट सेटेलाइट से तैयार की गई है। जिले के अधिक से अधिक भू-भाग को हरा-भरा करना विभाग की प्राथमिकता में शामिल है।

रणवीर मिश्र, प्रभागीय वनाधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed