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Amethi News: डॉ. अंशुमान के लिए चिकित्सा सिर्फ पेशा नहीं, संकल्प है
Tue, 01 Jul 2025 12:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 01 Jul 2025 12:05 AM IST
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अमेठी। मरीज का उपचार करना हर चिकित्सक की प्राथमिकता होती है। कई चिकित्सक प्रशासनिक पद पर आने के बाद खुद को डॉक्टरी से अलग कर लेते हैं। इसके उलट कई चिकित्सक ऐसे हैं, जो प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने के साथ ही मरीजों के इलाज के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। ऐसे ही हैं मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह।
जिला अस्पताल और सीएचसी, पीएचसी छोड़िए, ये मेडिकल कॉलेज तिलोई में जाकर ओपीडी करने में भी पीछे नहीं रहते हैं। इनके लिए चिकित्सा महज पेशा नहीं, बल्कि एक संकल्प है। डॉ. अंशुमान सिंह ने एक मई 1998 को चिकित्सा सेवा की शुरुआत की और 30 जून 2023 को अमेठी में सीएमओ के रूप में कार्यभार संभाला। बीते दो वर्षों में उन्होंने न केवल जिला स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुदृढ़ कीं, बल्कि खुद सड़कों और गांवों में पहुंचकर लोगों का उपचार किया।
31 मई को गौरीगंज में सड़क हादसे में घायल रामकरन और सुनील को उन्होंने मौके पर ही प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाया और उनकी जान बचाई। ये तो एक उदाहरण मात्र हैं। प्रशासनिक कार्याें के बाद जब भी उन्हें समय मिलता है, वे ओपीडी करने पहुंच जाते हैं। उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि लोग गांवों से सीधे उनके कार्यालय पहुंचते हैं और सीएमओ उन्हें समय देकर निशुल्क उपचार भी करते हैं। उनके लिए पद से ज्यादा मरीज की सेवा महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण के दौरान वे न केवल बीमार लोगों की जांच करते हैं, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ी बातें भी साझा करते हैं।
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जिला अस्पताल और सीएचसी, पीएचसी छोड़िए, ये मेडिकल कॉलेज तिलोई में जाकर ओपीडी करने में भी पीछे नहीं रहते हैं। इनके लिए चिकित्सा महज पेशा नहीं, बल्कि एक संकल्प है। डॉ. अंशुमान सिंह ने एक मई 1998 को चिकित्सा सेवा की शुरुआत की और 30 जून 2023 को अमेठी में सीएमओ के रूप में कार्यभार संभाला। बीते दो वर्षों में उन्होंने न केवल जिला स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुदृढ़ कीं, बल्कि खुद सड़कों और गांवों में पहुंचकर लोगों का उपचार किया।
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31 मई को गौरीगंज में सड़क हादसे में घायल रामकरन और सुनील को उन्होंने मौके पर ही प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाया और उनकी जान बचाई। ये तो एक उदाहरण मात्र हैं। प्रशासनिक कार्याें के बाद जब भी उन्हें समय मिलता है, वे ओपीडी करने पहुंच जाते हैं। उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि लोग गांवों से सीधे उनके कार्यालय पहुंचते हैं और सीएमओ उन्हें समय देकर निशुल्क उपचार भी करते हैं। उनके लिए पद से ज्यादा मरीज की सेवा महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण के दौरान वे न केवल बीमार लोगों की जांच करते हैं, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ी बातें भी साझा करते हैं।
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