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Amethi News: किसानों ने जलाईं बजट की प्रतियां
Mon, 09 Feb 2026 12:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 09 Feb 2026 12:24 AM IST
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जामों के राजामऊ में बजट की प्रतियां जलाते अखिल भारतीय किसान सभा के पदाधिकारी व ग्रामीण। स्रोत
जामों। अखिल भारतीय किसान सभा के प्रांतीय आह्वान पर रविवार को ब्लॉक क्षेत्र के राजामऊ गांव में किसानों और ग्रामीणों ने केंद्रीय बजट 2026-27 के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने बजट की प्रतियां जलाकर आक्रोश जताया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल किसानों ने बजट को किसान, श्रमिक और ग्रामीण समाज के हितों के विपरीत बताया।
कार्यक्रम की अगुवाई करते हुए संगठन के ग्रामसभा अध्यक्ष प्रेम अचल ने कहा कि केंद्रीय बजट में खेती, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों की अनदेखी की गई है। उनका कहना था कि बजट में न तो किसानों की आय बढ़ाने के ठोस प्रावधान किए गए हैं और न ही ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने की दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई देती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में कृषि क्षेत्र से जुड़े बुनियादी मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया गया। किसानों ने उर्वरक सब्सिडी में कटौती पर नाराजगी जताई और कहा कि इससे खेती की लागत और बढ़ेगी, जिसका सीधा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ेगा। कर्जमाफी का कोई प्रावधान न होने को भी किसानों ने निराशाजनक बताया।
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प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बढ़ते कर्ज के बोझ से किसान पहले ही दबाव में हैं, ऐसे में राहत के उपायों का न होना चिंता का विषय है। कृषि अनुसंधान से जुड़े बजट में कमी और ग्रामीण रोजगार योजनाओं की उपेक्षा को लेकर भी किसानों ने सवाल उठाए। उनका कहना था कि मनरेगा जैसी योजनाओं से ग्रामीण मजदूरों को सहारा मिलता है, लेकिन बजट में इस दिशा में अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने किसान-हितैषी बजट, खेती की लागत घटाने, ग्रामीण रोजगार बढ़ाने और ठोस राहत उपाय लागू करने की मांग की। इस मौके पर मीना कुमारी, मंजू, सोनू सिद्दीकी, हरीराम, राम प्रवेश, दीपक गुप्ता सहित कई किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।
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कार्यक्रम की अगुवाई करते हुए संगठन के ग्रामसभा अध्यक्ष प्रेम अचल ने कहा कि केंद्रीय बजट में खेती, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों की अनदेखी की गई है। उनका कहना था कि बजट में न तो किसानों की आय बढ़ाने के ठोस प्रावधान किए गए हैं और न ही ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने की दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई देती है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में कृषि क्षेत्र से जुड़े बुनियादी मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया गया। किसानों ने उर्वरक सब्सिडी में कटौती पर नाराजगी जताई और कहा कि इससे खेती की लागत और बढ़ेगी, जिसका सीधा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ेगा। कर्जमाफी का कोई प्रावधान न होने को भी किसानों ने निराशाजनक बताया।
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प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बढ़ते कर्ज के बोझ से किसान पहले ही दबाव में हैं, ऐसे में राहत के उपायों का न होना चिंता का विषय है। कृषि अनुसंधान से जुड़े बजट में कमी और ग्रामीण रोजगार योजनाओं की उपेक्षा को लेकर भी किसानों ने सवाल उठाए। उनका कहना था कि मनरेगा जैसी योजनाओं से ग्रामीण मजदूरों को सहारा मिलता है, लेकिन बजट में इस दिशा में अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने किसान-हितैषी बजट, खेती की लागत घटाने, ग्रामीण रोजगार बढ़ाने और ठोस राहत उपाय लागू करने की मांग की। इस मौके पर मीना कुमारी, मंजू, सोनू सिद्दीकी, हरीराम, राम प्रवेश, दीपक गुप्ता सहित कई किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।