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चार ग्राम पंचायतों में स्थापित होगा फार्म मशीनरी बैंक
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गौरीगंज (अमेठी)। पर्यावरण संरक्षण के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देश पर कृषि विभाग पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने में जुटा है। पहले चरण में पराली जलाने की अधिक घटनाओं वाले चार गांवों का चयन कर समितियों के माध्यम से फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने की कवायद चल रही है। चयनित ग्राम पंचायत के खाते में अनुदान राशि अंतरित करते हुए फसल अवशेष प्रबंध यंत्र की खरीद करने पर 80 प्रतिशत अनुदान देने को कहा गया है।
खरीफ सीजन में कंबाइन मशीन से धान की कटाई करने के बाद अधिकांश किसान बचे अवशेष को खेतों में जला देते हैं। फसल अवशेष जलाने से जहां पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है वहीं मृदा की उपजाऊ क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में हानि को रोकने के लिए उच्च न्यायालय व राष्ट्रीय हरित अभिकरण के निर्देश पर जिला प्रशासन व कृषि विभाग पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने में जुटा है।
लोगों को जागरूक कर पराली नहीं जलाने तथा पराली को गो-आश्रय केंद्र में दान करने के साथ मनरेगा से एकत्र करने की व्यवस्था बनाई गई है। इसके अतिरिक्त फसल अवशेष प्रबंध यंत्र नहीं होने से प्रशासन की कोशिश विफल होती है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में शासन ने सर्वाधिक पराली जलाने वाले चार गांवों को चिह्नित करते हुए फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने का निर्णय लिया है।
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चयनित ग्राम पंचायत में सक्रिय कृषक सहकारी समिति, गन्ना समितियां, औद्यानिक समिति व पंचायतों में एक-एक फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किया जाएगा। कृषि विभाग ने गांवों का चयन करने के बाद पंचायत राज विभाग को पत्र जारी कर 20 प्रतिशत अंशदान जमा करने की इच्छुक सक्रिय समिति का प्रस्ताव तैयार कर गांव में फसल अवशेष प्रबंध यंत्र क्रय कराते हुए किसानों के फसल अपशिष्ट का निस्तारण कराने को कहा है।
समिति यंत्र क्रय करने के बाद यंत्र रख-रखाव व बिल वाउचर पंचायत को देगी। पंचायत ग्राम निधि के खाते में अनुदान राशि भेजने के बाद कृषि विभाग ने इच्छुक किसानों को किराए पर देते हुए समिति की आय बढ़ाने तथा फसल अपशिष्ट प्रबंध को सफल बनाते हुए गांव में पराली जलाने की घटनाओं को रोकना होगा।
यह ग्राम पंचायतें हुईं चिह्नित
फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने के लिए शाहगढ़ ब्लॉक की उलरा व चंदौकी, सिंहपुर ब्लॉक की सरायमाधौ तथा तिलोई ब्लॉक के कूरा ग्राम पंचायत का चयन हुआ है। चारों ग्राम पंचायतों में विगत वित्तीय वर्ष में पराली जलाने की सर्वाधिक घटनाएं घटित हुई थीं। वरीयता क्रय के अनुसार शासन के निर्देशानुसार कृषि विभाग ने चारों ग्राम पंचायतों को चिह्नित कर फसल अवशेष प्रबंध यंत्र स्थापित करने को कहा है।
इन यंत्रों की करनी होगी खरीद
भारत सरकार की ओर फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पैडी स्ट्रॉचॉपर, श्रेडर, मल्चर, श्रब मास्टर, रोटरी स्लेशर, हाइड्रोलिग रिवर्सिबल एबी प्लाऊ, सुपर सीडर, बेलर, सुपरा स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (सुपर एसएसएम), जीरो टिल सीड कम फर्टरीड्रिल, हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ रेक, क्रॉप रीपर व रीपर कंबाइंडर शामिल हैं।
पांच लाख तक है परियोजना
फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र की अधिकतम पांच लाख रुपये की परियोजना में शामिल किया है। यंत्र सूची में शामिल कम से कम दो यंत्र की खरीद करना अनिवार्य है। यंत्र की खरीद करने व बिल तथा फोटोग्राफ्स वेबसाइट पर अपलोड करने तथा भौतिक सत्यापन के बाद समिति के खाते में 80 प्रतिशत अनुदान राशि अंतरित की जाएगी। 20 प्रतिशत धनराशि समिति का स्वयं वहन करना होगा। इतना ही नहीं समिति चाहे तो 15 लाख रुपये तक के कृषि यंत्र क्रय कर सकती है। क्रय करने के पहले समिति को सब मिशन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन योजना पंजीयन कराने के साथ टोकन जनरेट करना होगा।
पंचायतों को भेजा गया पत्र
डीपीआरओ श्रीकांत यादव ने बताया कि कृषि विभाग की ओर चिह्नित चारों ग्राम पंचायत के प्रधान व सचिव को एडीओ पंचायत के माध्यम से पत्र भेजा गया है। पत्र में सक्रिय समिति का चयन कर नियमानुसार प्रस्ताव तैयार कराते हुए उपनिदेशक कृषि कार्यालय में जमा कराने को कहा गया है। चयनित समिति के नियमानुसार उपकरण क्रय करने व सत्यापन होने के बाद ग्राम निधि के खाते में अंतरित अनुदान समिति के खाते में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया है। फार्म मशीनरी बैंक स्थापना में लापरवाही या नियम विरुद्ध कार्य करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
पराली जलाने पर होगा नियंत्रण
जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने बताया कि चार ग्राम पंचायतों में फसल अवशेष प्रबंधन यत्र समिति के पास मौजूद होने से गांव के साथ आसपास की ग्राम पंचायतों में पराली जलाने की घटना पर अंकुश लगेगा। समिति किसानों को न्यूनतम किराये पर यंत्र मुहैया कराते हुए उनका सहयोग करेंगे। यंत्र क्रय करने के बाद नियमानुसार रख-रखाव नहीं करने, किसानों को किराये पर नहीं देने तथा यंत्र की बिक्री करने की दशा में रिकवरी के साथ केस दर्ज कराया जाएगा।
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खरीफ सीजन में कंबाइन मशीन से धान की कटाई करने के बाद अधिकांश किसान बचे अवशेष को खेतों में जला देते हैं। फसल अवशेष जलाने से जहां पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है वहीं मृदा की उपजाऊ क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में हानि को रोकने के लिए उच्च न्यायालय व राष्ट्रीय हरित अभिकरण के निर्देश पर जिला प्रशासन व कृषि विभाग पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने में जुटा है।
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लोगों को जागरूक कर पराली नहीं जलाने तथा पराली को गो-आश्रय केंद्र में दान करने के साथ मनरेगा से एकत्र करने की व्यवस्था बनाई गई है। इसके अतिरिक्त फसल अवशेष प्रबंध यंत्र नहीं होने से प्रशासन की कोशिश विफल होती है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में शासन ने सर्वाधिक पराली जलाने वाले चार गांवों को चिह्नित करते हुए फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने का निर्णय लिया है।
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चयनित ग्राम पंचायत में सक्रिय कृषक सहकारी समिति, गन्ना समितियां, औद्यानिक समिति व पंचायतों में एक-एक फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किया जाएगा। कृषि विभाग ने गांवों का चयन करने के बाद पंचायत राज विभाग को पत्र जारी कर 20 प्रतिशत अंशदान जमा करने की इच्छुक सक्रिय समिति का प्रस्ताव तैयार कर गांव में फसल अवशेष प्रबंध यंत्र क्रय कराते हुए किसानों के फसल अपशिष्ट का निस्तारण कराने को कहा है।
समिति यंत्र क्रय करने के बाद यंत्र रख-रखाव व बिल वाउचर पंचायत को देगी। पंचायत ग्राम निधि के खाते में अनुदान राशि भेजने के बाद कृषि विभाग ने इच्छुक किसानों को किराए पर देते हुए समिति की आय बढ़ाने तथा फसल अपशिष्ट प्रबंध को सफल बनाते हुए गांव में पराली जलाने की घटनाओं को रोकना होगा।
यह ग्राम पंचायतें हुईं चिह्नित
फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने के लिए शाहगढ़ ब्लॉक की उलरा व चंदौकी, सिंहपुर ब्लॉक की सरायमाधौ तथा तिलोई ब्लॉक के कूरा ग्राम पंचायत का चयन हुआ है। चारों ग्राम पंचायतों में विगत वित्तीय वर्ष में पराली जलाने की सर्वाधिक घटनाएं घटित हुई थीं। वरीयता क्रय के अनुसार शासन के निर्देशानुसार कृषि विभाग ने चारों ग्राम पंचायतों को चिह्नित कर फसल अवशेष प्रबंध यंत्र स्थापित करने को कहा है।
इन यंत्रों की करनी होगी खरीद
भारत सरकार की ओर फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पैडी स्ट्रॉचॉपर, श्रेडर, मल्चर, श्रब मास्टर, रोटरी स्लेशर, हाइड्रोलिग रिवर्सिबल एबी प्लाऊ, सुपर सीडर, बेलर, सुपरा स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (सुपर एसएसएम), जीरो टिल सीड कम फर्टरीड्रिल, हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ रेक, क्रॉप रीपर व रीपर कंबाइंडर शामिल हैं।
पांच लाख तक है परियोजना
फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र की अधिकतम पांच लाख रुपये की परियोजना में शामिल किया है। यंत्र सूची में शामिल कम से कम दो यंत्र की खरीद करना अनिवार्य है। यंत्र की खरीद करने व बिल तथा फोटोग्राफ्स वेबसाइट पर अपलोड करने तथा भौतिक सत्यापन के बाद समिति के खाते में 80 प्रतिशत अनुदान राशि अंतरित की जाएगी। 20 प्रतिशत धनराशि समिति का स्वयं वहन करना होगा। इतना ही नहीं समिति चाहे तो 15 लाख रुपये तक के कृषि यंत्र क्रय कर सकती है। क्रय करने के पहले समिति को सब मिशन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन योजना पंजीयन कराने के साथ टोकन जनरेट करना होगा।
पंचायतों को भेजा गया पत्र
डीपीआरओ श्रीकांत यादव ने बताया कि कृषि विभाग की ओर चिह्नित चारों ग्राम पंचायत के प्रधान व सचिव को एडीओ पंचायत के माध्यम से पत्र भेजा गया है। पत्र में सक्रिय समिति का चयन कर नियमानुसार प्रस्ताव तैयार कराते हुए उपनिदेशक कृषि कार्यालय में जमा कराने को कहा गया है। चयनित समिति के नियमानुसार उपकरण क्रय करने व सत्यापन होने के बाद ग्राम निधि के खाते में अंतरित अनुदान समिति के खाते में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया है। फार्म मशीनरी बैंक स्थापना में लापरवाही या नियम विरुद्ध कार्य करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
पराली जलाने पर होगा नियंत्रण
जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने बताया कि चार ग्राम पंचायतों में फसल अवशेष प्रबंधन यत्र समिति के पास मौजूद होने से गांव के साथ आसपास की ग्राम पंचायतों में पराली जलाने की घटना पर अंकुश लगेगा। समिति किसानों को न्यूनतम किराये पर यंत्र मुहैया कराते हुए उनका सहयोग करेंगे। यंत्र क्रय करने के बाद नियमानुसार रख-रखाव नहीं करने, किसानों को किराये पर नहीं देने तथा यंत्र की बिक्री करने की दशा में रिकवरी के साथ केस दर्ज कराया जाएगा।