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Amethi News: भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय है आपातकाल
Sun, 25 Jun 2023 11:29 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 25 Jun 2023 11:29 PM IST
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कार्यक्रम में मौजूद भाजपा पदाधिकारी
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गौरीगंज (अमेठी)। भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय में रविवार आयोजित कार्यक्रम में आपातकाल की बरसी को काला दिवस के रूप में मनाया गया। इसमें जिला संघ चालक रणजीत सिंह व पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा उमा शंकर पांडेय को सम्मानित किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश मीडिया संपर्क विभाग के प्रदेश संयोजक डॉ. तरुण कांत त्रिपाठी ने कहा कि आजादी के बाद सबसे बड़ा काला दिवस इमरजेंसी लागू करने वाला दिन था। लोकतंत्र सेनानियों का जिस प्रकार की यातनाएं दी गई, जेल में भरने का कृत्य किया गया, उसको देश कभी माफ नहीं करेगा।
कहा कि उस कालखंड में भारत माता के लिए कार्य में लगे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल सहित अन्य सामाजिक संगठन, भारतीय जनसंघ सहित अनेकों ऐसे दल जो राष्ट्र सेवा में कार्य कर रहे थे, उन पर जुल्म किया गया। उन्हें यातनाएं दी गई, लेकिन उस कालखंड के जितने भी लोकतंत्र सेनानी थे, उन्होंने हार नहीं मानी।
जिलाध्यक्ष दुर्गेश त्रिपाठी ने कहा कि इमरजेंसी का दिन काला दिन था। पार्टी उसे काला दिवस के रूप में ही मना रही है। प्रवक्ता चन्द्रमौलि सिंह ने भी काला दिवस के बारे में विचार व्यक्त किया।
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बदलना पड़ा था भेष
अचलपुर के रहने वाले पूर्व विधायक व लोकतंत्र सेनानी तेजभान सिंह का कहना है कि जब देश में आपातकाल लागू हुआ तो वह आरएसएस से जुड़े थे। 26 जून 1975 की सुबह संघ की शाखा से वापस आ रहे थे, तभी एक व्यापारी के यहां चाय पीने के लिए रुके तो समाचार पढ़ा था। उस दिन एक अलग ही माहौल था। सड़कों पर पुलिस का पहरा था। इसके कारण भेष बदलना पड़ा। कई जगह भेष बदलकर घूमे। बाद में 14 नवंबर को गिरफ्तारी दी। एक साल जेल में रहे।
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कहा कि उस कालखंड में भारत माता के लिए कार्य में लगे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल सहित अन्य सामाजिक संगठन, भारतीय जनसंघ सहित अनेकों ऐसे दल जो राष्ट्र सेवा में कार्य कर रहे थे, उन पर जुल्म किया गया। उन्हें यातनाएं दी गई, लेकिन उस कालखंड के जितने भी लोकतंत्र सेनानी थे, उन्होंने हार नहीं मानी।
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जिलाध्यक्ष दुर्गेश त्रिपाठी ने कहा कि इमरजेंसी का दिन काला दिन था। पार्टी उसे काला दिवस के रूप में ही मना रही है। प्रवक्ता चन्द्रमौलि सिंह ने भी काला दिवस के बारे में विचार व्यक्त किया।
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बदलना पड़ा था भेष
अचलपुर के रहने वाले पूर्व विधायक व लोकतंत्र सेनानी तेजभान सिंह का कहना है कि जब देश में आपातकाल लागू हुआ तो वह आरएसएस से जुड़े थे। 26 जून 1975 की सुबह संघ की शाखा से वापस आ रहे थे, तभी एक व्यापारी के यहां चाय पीने के लिए रुके तो समाचार पढ़ा था। उस दिन एक अलग ही माहौल था। सड़कों पर पुलिस का पहरा था। इसके कारण भेष बदलना पड़ा। कई जगह भेष बदलकर घूमे। बाद में 14 नवंबर को गिरफ्तारी दी। एक साल जेल में रहे।