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Amethi News: डायलिसिस मशीन खराब, मरीजों को भेजा उन्नाव
Sun, 05 May 2024 01:08 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 05 May 2024 01:08 AM IST
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जिला अस्पताल के डायलिसिस वार्ड में सन्नाटा
अमेठी सिटी। किडनी मरीजों के लिए परेशानी भरी खबर है। असैदापुर स्थित जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट की मशीन में अचानक खराबी आ गई। जिससे डायलिसिस बंद हो गई है। बीते दो दिनों में करीब 30 मरीजों की डायलिसिस नहीं हो सकी। अति आवश्यकता वाले पांच डायलिसिस के मरीजों को उन्नाव भेजा गया है। कंपनी के इंजीनियरों की टीम मशीन में आई दिक्कत को सही करने में लगी हुई है। हालांकि, अभी तक मशीन ठीक नहीं हो सकी थी।
जिला अस्पताल में स्थापित डायलिसिस यूनिट में छह बेड पर हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। यूनिट का संचालन सुबह 5.30 बजे से रात्रि 11.30 तक चार शिफ्टों में होता है। एक मरीज के रक्त शोधन प्रक्रिया में चार घंटे का समय लगता है।
डायलिसिस यूनिट में बृहस्पतिवार की शाम एकाएक खराबी आ गई। जिससे मशीन चलते-चलते बंद हो गई। ऑन करने पर वह नहीं चल रही है। इस पर कर्मियों ने तत्काल कंपनी को सूचना दी। इसके बाद पहुंचे इंजीनियर ने मशीन में आई खराबी को खोजने में लगे हुए हैं। मशीन के कनेक्शन के साथ ही पानी की टेस्टिंग व अन्य प्रक्रिया की जा रही है लेकिन, अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। शुक्रवार और शनिवार को 30 मरीजों की डायलिसिस नहीं हो सकी।
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उन्नाव भेजे गए गंभीर मरीज
- डायलिसिस यूनिट से हर दिन करीब 15 से बीस मरीजों की डायलिसिस की जाती है। दो दिनों से डायलिसिस ठप है। शनिवार को अति आवश्यकता वाले पांच डायलिसिस मरीजों को उन्नाव भेजा गया।
कंपनी इन मरीजों को अपने खर्चे पर ले जाने की बात कह रही है। लेकिन, इसमें भी दिक्कत आ रही है। तीमारदारों का कहना है कि अगर रात को 11 बजे उन्नाव से मरीज वापस जिला अस्पताल पहुंचता है, और उसे 30 किलोमीटर दूर घर जाना पड़ेगा तो वह कैसे जाएगा।
मरीजों ने कहा, सुबह से कर रहे इंतजार
- अमेठी के अगहर निवासी रवींद्र पांडेय का कहना है कि सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस होती है। शनिवार को बुलाया गया था, सुबह से इंतजार कर रहे हैं। अमेठी के बड़गांव निवासी रविंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि सुबह से बैठा हूं। उन्नाव ले जाएंगे लेकिन, अभी तक कुछ पता नहीं है। संजय वर्मा का कहना है कि कम से कम वैकल्पिक प्रबंध करना चाहिए।
किन मरीजों की होती है डायलिसिस
डायलिसिस के दौरान मरीज के ब्लड को साफ करने की कोशिश की जाती है। किडनी खराब होने के बाद इंसान का ब्लड साफ नहीं हो पाता तो ऐसे में डायलिसिस के जरिए उसे साफ करने की कोशिश की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान खून में जमी गंदगी को बाहर निकाला जाता है।
किसी व्यक्ति को डायलिसिस की जरूरत तब पड़ती है जब उसकी दोनों किडनी सही से काम नहीं करती है। किडनी फेल होने का जोखिम खासकर उन लोगों पर ज्यादा बढ़ जाता है जो डायबिटीज के मरीज या बीपी के मरीज है। उन्हें किडनी फेल होने की समस्या हो सकती है।
जल्द ही मशीन ठीक करा दी जाएगी
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीपी अग्रवाल का कहना है कि डायलिसिस मशीन में खराबी आई है। इंजीनियरों की टीम उसे सही कर रही है। जल्द ही मशीन सही करा दी जाएगी। वहीं, अति गंभीर मरीजों को उन्नाव भेजने को कहा गया है।
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जिला अस्पताल में स्थापित डायलिसिस यूनिट में छह बेड पर हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। यूनिट का संचालन सुबह 5.30 बजे से रात्रि 11.30 तक चार शिफ्टों में होता है। एक मरीज के रक्त शोधन प्रक्रिया में चार घंटे का समय लगता है।
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डायलिसिस यूनिट में बृहस्पतिवार की शाम एकाएक खराबी आ गई। जिससे मशीन चलते-चलते बंद हो गई। ऑन करने पर वह नहीं चल रही है। इस पर कर्मियों ने तत्काल कंपनी को सूचना दी। इसके बाद पहुंचे इंजीनियर ने मशीन में आई खराबी को खोजने में लगे हुए हैं। मशीन के कनेक्शन के साथ ही पानी की टेस्टिंग व अन्य प्रक्रिया की जा रही है लेकिन, अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। शुक्रवार और शनिवार को 30 मरीजों की डायलिसिस नहीं हो सकी।
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उन्नाव भेजे गए गंभीर मरीज
- डायलिसिस यूनिट से हर दिन करीब 15 से बीस मरीजों की डायलिसिस की जाती है। दो दिनों से डायलिसिस ठप है। शनिवार को अति आवश्यकता वाले पांच डायलिसिस मरीजों को उन्नाव भेजा गया।
कंपनी इन मरीजों को अपने खर्चे पर ले जाने की बात कह रही है। लेकिन, इसमें भी दिक्कत आ रही है। तीमारदारों का कहना है कि अगर रात को 11 बजे उन्नाव से मरीज वापस जिला अस्पताल पहुंचता है, और उसे 30 किलोमीटर दूर घर जाना पड़ेगा तो वह कैसे जाएगा।
मरीजों ने कहा, सुबह से कर रहे इंतजार
- अमेठी के अगहर निवासी रवींद्र पांडेय का कहना है कि सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस होती है। शनिवार को बुलाया गया था, सुबह से इंतजार कर रहे हैं। अमेठी के बड़गांव निवासी रविंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि सुबह से बैठा हूं। उन्नाव ले जाएंगे लेकिन, अभी तक कुछ पता नहीं है। संजय वर्मा का कहना है कि कम से कम वैकल्पिक प्रबंध करना चाहिए।
किन मरीजों की होती है डायलिसिस
डायलिसिस के दौरान मरीज के ब्लड को साफ करने की कोशिश की जाती है। किडनी खराब होने के बाद इंसान का ब्लड साफ नहीं हो पाता तो ऐसे में डायलिसिस के जरिए उसे साफ करने की कोशिश की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान खून में जमी गंदगी को बाहर निकाला जाता है।
किसी व्यक्ति को डायलिसिस की जरूरत तब पड़ती है जब उसकी दोनों किडनी सही से काम नहीं करती है। किडनी फेल होने का जोखिम खासकर उन लोगों पर ज्यादा बढ़ जाता है जो डायबिटीज के मरीज या बीपी के मरीज है। उन्हें किडनी फेल होने की समस्या हो सकती है।
जल्द ही मशीन ठीक करा दी जाएगी
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीपी अग्रवाल का कहना है कि डायलिसिस मशीन में खराबी आई है। इंजीनियरों की टीम उसे सही कर रही है। जल्द ही मशीन सही करा दी जाएगी। वहीं, अति गंभीर मरीजों को उन्नाव भेजने को कहा गया है।