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समितियां बंद, खाद की किल्लत से किसान परेशान
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संग्रामपुर (अमेठी)। संग्रामपुर क्षेत्र में डीएपी खाद न मिलने से किसान भटक रहे हैं। क्षेत्र में स्थापित किसान सेवा समितियां बंद पड़ी हैं। किसानों को खाद के लिए दूसरी बाजारों की दौड़ लगानी पड़ रही है, जहां उनसे मनमानी कीमत भी वसूली जा रही है।
मंगलवार सुबह संग्रामपुर की किसान सेवा समिति पर खाद लेने पहुंचे किसानों को खाद नहीं मिली। खाद न मिलने से आलू व सरसों की फसल में विलंब हो रहा है। वहीं मिसरौली किसान सेवा केंद्र में डीएपी खाद की एक बोरी भी नहीं आई जिसके चलते समिति पर ताला लटका रहा। खाद न मिलने से किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
किसानों ने बताया कि इन दिनों समितियों पर डीएपी न होने से दुकानदार नकली डीएपी ब्रांडेड पैकिंग में करके अधिक मूल्य पर बेच रहे हैं। किसानों को 300 से 400 रुपये अधिक मूल्य देना पड़ रहा है। किसानों ने नकली खाद अधिक कीमत में बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की है। सहकारी समिति संग्रामपुर के संचालक चमनलाल ने बताया कि 200 बोरी डीएपी मिली थी जो किसानों में बांटी जा चुकी है।
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क्या कहते हैं ग्रामीण
मधुपुर खदरी के विजय उपाध्याय ने बताया कि तीन एकड़ जमीन में गेहूं की खेती करने के लिए चार बोरी खाद की जरूरत है लेकिन एक बोरी भी खाद नहीं मिली। बेलखरी के राजबहादुर ने बताया समिति में खाद नहीं है। इस वजह से दो एकड़ भूमि में आलू व सरसों की बोआई में देरी हो रही है। भावलपुर के रामअनूप तिवारी ने बताया आलू की फसल तैयार करनी है, लेकिन समिति में खाद नहीं है। इस वजह से कई किसान वापस घर चले गए।
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मंगलवार सुबह संग्रामपुर की किसान सेवा समिति पर खाद लेने पहुंचे किसानों को खाद नहीं मिली। खाद न मिलने से आलू व सरसों की फसल में विलंब हो रहा है। वहीं मिसरौली किसान सेवा केंद्र में डीएपी खाद की एक बोरी भी नहीं आई जिसके चलते समिति पर ताला लटका रहा। खाद न मिलने से किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
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किसानों ने बताया कि इन दिनों समितियों पर डीएपी न होने से दुकानदार नकली डीएपी ब्रांडेड पैकिंग में करके अधिक मूल्य पर बेच रहे हैं। किसानों को 300 से 400 रुपये अधिक मूल्य देना पड़ रहा है। किसानों ने नकली खाद अधिक कीमत में बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की है। सहकारी समिति संग्रामपुर के संचालक चमनलाल ने बताया कि 200 बोरी डीएपी मिली थी जो किसानों में बांटी जा चुकी है।
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क्या कहते हैं ग्रामीण
मधुपुर खदरी के विजय उपाध्याय ने बताया कि तीन एकड़ जमीन में गेहूं की खेती करने के लिए चार बोरी खाद की जरूरत है लेकिन एक बोरी भी खाद नहीं मिली। बेलखरी के राजबहादुर ने बताया समिति में खाद नहीं है। इस वजह से दो एकड़ भूमि में आलू व सरसों की बोआई में देरी हो रही है। भावलपुर के रामअनूप तिवारी ने बताया आलू की फसल तैयार करनी है, लेकिन समिति में खाद नहीं है। इस वजह से कई किसान वापस घर चले गए।