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Amethi News: पेड़ के नीचे टाट-पट्टी पर पढ़ाई कर रहे बच्चे

Tue, 30 Jul 2024 02:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Tue, 30 Jul 2024 02:52 AM IST
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Children studying on sackcloth under the tree
अमेठी। सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी प्राथमिक विद्यालयों के व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। जगदीशपुर ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय वारसाबाद में संसाधनों का टोटा है। विद्यालय के चार कक्षों में तीन आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर एक से आठ तक की कक्षाएं चलती हैं। कुछ कक्षाओं के बच्चे पेड़ के नीचे टाट-पट्टी पर पढ़ाई करते हैं।
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जिले के जगदीशपुर ब्लॉक अंतर्गत वारसाबाद गांव में कंपोजिट विद्यालय है। विद्यालय में प्रधानाध्यापक राम अचल के अलावा पांच सहायक शिक्षक, दो शिक्षामित्र, तीन रसोइयों की तैनाती है। संसाधनों के अभाव के बावजूद विद्यालय में पंजीकृत बच्चों की संख्या 212 है। विद्यालय में प्रतिदिन औसतन 150 बच्चों की उपस्थिति रहती है।
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विद्यालय में सबसे बड़ी समस्या कमरों का अभाव है। विद्यालय परिसर में वर्ष 2009 में बने छह कमरे वर्ष 2021 में निष्प्रयोज्य घोषित हो चुके हैं। वर्ष 1986 में बने पुराने भवन के चार कमरों में विद्यालय का संचालन हो रहा है। एक छोटे ऑफिस कक्ष को छोड़कर कुल चार कमरे हैं। इसमें एक कमरे में तीन आंगनबाड़ी केंद्र एक साथ संचालित हो रहे हैं। शेष तीन कमरों में कक्षा एक व दो के बच्चे, कक्षा चार व पांच के बच्चे व एक कमरे में कक्षा छह के बच्चे पढ़ाई करते हैं। कक्षा तीन, सात और आठ के बच्चे बाहर टाट-पट्टी पर पेड़ के नीचे बैठ कर पढ़ाई करते हैं। विद्यालय में खेल मैदान नहीं है। कमरों में कुल 40 डेस्क बेंच, पंखा तथा प्रसाधन, पेयजल की व्यवस्था है। बारिश होने पर बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है।
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नहीं हो रही सुनवाई
प्रधानाध्यापक राम अचल और सहायक अध्यापक अब्दुल रशीद ने बताया कि महानिदेशक बेसिक शिक्षा, सीडीओ, बीएसए समेत अन्य अधिकारियों से लगातार चार साल से शिकायत की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। पंजीकृत बच्चों के सापेक्ष विद्यालय में भवन व परिसर का अभाव है। बारिश के दिनों पढ़ाई ठप हो जाती है। खेल मैदान नहीं होने से बच्चे आउटडोर गेम से वंचित हो रहे हैं।

बजट मिलने के बाद होगा निर्माण
बीएसए संजय तिवारी ने बताया कि विद्यालय 19 पैरामीटर्स से आच्छादित है। जर्जर कमरों के नीलामी की प्रक्रिया चल रही है। ध्वस्तीकरण के बाद शासन को इसका प्रस्ताव भेजा जाएगा। बजट मिलने के बाद भवन निर्माण कार्य हो सकेगा।
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