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Amethi News: मौसम में बदलाव से सांस के मरीजों की बढ़ी परेशानी
Sat, 07 Nov 2026 12:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 07 Nov 2026 12:09 AM IST
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गौरीगंज रेलवे स्टेशन पर टिकट खरीदते यात्री।
अमेठी सिटी। मौसम में उतार-चढ़ाव का असर लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। तापमान में बदलाव और वातावरण में नमी के बीच सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में खांसी, सांस फूलने, सीने में जकड़न और एलर्जी की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे। दोपहर 12:10 बजे तक फिजिशियन कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ लगी रही। इनमें बुजुर्गों की संख्या भी अधिक रही।
गौरीगंज के मछवारा गांव निवासी कांति देवी ने बताया कि दो-तीन दिन से खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी हो रही है। थोड़ा चलने पर ही सांस फूलने लगती है। पूरबगांव निवासी रामकृपाल मौर्य ने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से सीने में भारीपन महसूस हो रहा है। सांस लेने में दिक्कत के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। सरायहृदय शाह निवासी कमलेश कुमारी ने बताया कि रात में खांसी बढ़ जाती है, जिससे नींद भी पूरी नहीं हो पाती। वहीं, सुजानपुर निवासी वंदना ने भी सांस लेने में परेशानी और कमजोरी की शिकायत की।
फिजिशियन डॉ. अमित यादव ने बताया कि मौसम में बदलाव के दौरान धूल और धुएं के संपर्क में आने से सांस के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से दवाएं लेनी चाहिए और चिकित्सक की सलाह का पालन करना चाहिए। डॉ. शुभम पांडेय ने बताया कि ठंडी हवा, धूल और प्रदूषण से बचाव जरूरी है। लगातार खांसी, सीने में जकड़न या सांस फूलने की समस्या होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।
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अस्पताल में उपलब्ध हैं जरूरी दवाएं
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश ने बताया कि जिला अस्पताल में सांस संबंधी बीमारियों के उपचार के लिए सालबुटामोल, लेवोसालबुटामोल, बुडेसोनाइड और इप्राट्रोपियम जैसी दवाएं उपलब्ध हैं। मरीजों की जांच के बाद जरूरत के अनुसार दवाएं दी जा रही हैं। आवश्यकता पड़ने पर इनहेलर और नेबुलाइजेशन के माध्यम से भी उपचार किया जाता है।
सांस संबंधी परेशानी से बचाव के उपाय
धूल और धुएं के संपर्क में आने से बचें।
सुबह और शाम उचित गर्म कपड़े पहनें।
अस्थमा के मरीज निर्धारित दवाओं और इनहेलर का नियमित इस्तेमाल करें।
घर और आसपास साफ-सफाई रखें।
सांस लेने में अधिक परेशानी होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचें।
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गौरीगंज के मछवारा गांव निवासी कांति देवी ने बताया कि दो-तीन दिन से खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी हो रही है। थोड़ा चलने पर ही सांस फूलने लगती है। पूरबगांव निवासी रामकृपाल मौर्य ने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से सीने में भारीपन महसूस हो रहा है। सांस लेने में दिक्कत के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। सरायहृदय शाह निवासी कमलेश कुमारी ने बताया कि रात में खांसी बढ़ जाती है, जिससे नींद भी पूरी नहीं हो पाती। वहीं, सुजानपुर निवासी वंदना ने भी सांस लेने में परेशानी और कमजोरी की शिकायत की।
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फिजिशियन डॉ. अमित यादव ने बताया कि मौसम में बदलाव के दौरान धूल और धुएं के संपर्क में आने से सांस के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से दवाएं लेनी चाहिए और चिकित्सक की सलाह का पालन करना चाहिए। डॉ. शुभम पांडेय ने बताया कि ठंडी हवा, धूल और प्रदूषण से बचाव जरूरी है। लगातार खांसी, सीने में जकड़न या सांस फूलने की समस्या होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।
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अस्पताल में उपलब्ध हैं जरूरी दवाएं
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश ने बताया कि जिला अस्पताल में सांस संबंधी बीमारियों के उपचार के लिए सालबुटामोल, लेवोसालबुटामोल, बुडेसोनाइड और इप्राट्रोपियम जैसी दवाएं उपलब्ध हैं। मरीजों की जांच के बाद जरूरत के अनुसार दवाएं दी जा रही हैं। आवश्यकता पड़ने पर इनहेलर और नेबुलाइजेशन के माध्यम से भी उपचार किया जाता है।
सांस संबंधी परेशानी से बचाव के उपाय
धूल और धुएं के संपर्क में आने से बचें।
सुबह और शाम उचित गर्म कपड़े पहनें।
अस्थमा के मरीज निर्धारित दवाओं और इनहेलर का नियमित इस्तेमाल करें।
घर और आसपास साफ-सफाई रखें।
सांस लेने में अधिक परेशानी होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचें।