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आक्रोशित अधिवक्ताओं ने की तोडफ़ोड़
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अमेठी। अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक के बीच तीन दिन पूर्व हुआ विवाद सोमवार को एक बार फिर गरम हो गया। सोमवार को दस्तावेज लेखक के पक्ष के लोगों को शांतिभंग के अंदेशे में दी गई जमानत को गलत बताते हुए अधिवक्ताओं ने दस्तावेज लेखक का तख्त व कुर्सी आदि तोड़ दिया। आक्रोशित अधिवक्ताओं को किसी तरह शांत कराया जा सका।
तीन दिन पूर्व दस्तावेज लेखक दिनेश मिश्र और अधिवक्ता गायत्री के बीच विवाद हो गया था। विवाद में बीचबचाव करने पहुंचे एक अधिवक्ता को बाद में दस्तावेज लेखक के पुत्र व उसके साथियों ने धुन दिया। इस मामले के दो आरोपियों को कोतवाली पुलिस ने निरुद्ध कर रविवार को एसडीएम कोर्ट में प्रस्तुत किया था।
मामले में पहले जमानत खारिज कर वारंट हवालाती जारी कर दिया गया। कुछ देर बाद पुन: इसी मामले में जमानत दे दी गई। सोमवार को बार एसोसिएशन की आपात बैठक बुलाकर रिहाई की संपूर्ण प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। बैठक में एसडीएम और पुलिस की कार्यशैली को निंदनीय बताते हुए एक कमेटी का गठन किया गया।
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इसके बाद बार एसोसिएशन अध्यक्ष सोम प्रकाश मिश्र की अगुवाई में बार सभागार से बाहर निकले अधिवक्ता अचानक उग्र हो उठे और दस्तावेज लेखक दिनेश मिश्र के तख्ते पर पहुंचकर तोड़फोड़ शुरू कर दी।
आक्रोशित अधिवक्ताओं ने दस्तावेज लेखक की कुर्सी, मेज और तख्त को तोड़कर फेंकते हुए उन्हें तहसील में न बैठने देने की बात कही। इसके बाद अधिवक्ता लामबंद होकर एसडीएम कोर्ट पहुंचे और रिहाई आदेश की फाइल देखते हुए सम्पूर्ण प्रक्रिया को गलत बताते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
हंगामे के समय एसडीएम मुसाफिरखाना मौजूद नहीं थे। तहसीलदार श्रद्धा सिंह ने वहां पहुंचकर अधिवक्ताओं से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। बार एसोसिएशन अध्यक्ष का कहना था कि वारंट हवालाती जारी होने के बाद बिना जेल गए आरोपी को छोड़ना गलत है।
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तीन दिन पूर्व दस्तावेज लेखक दिनेश मिश्र और अधिवक्ता गायत्री के बीच विवाद हो गया था। विवाद में बीचबचाव करने पहुंचे एक अधिवक्ता को बाद में दस्तावेज लेखक के पुत्र व उसके साथियों ने धुन दिया। इस मामले के दो आरोपियों को कोतवाली पुलिस ने निरुद्ध कर रविवार को एसडीएम कोर्ट में प्रस्तुत किया था।
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मामले में पहले जमानत खारिज कर वारंट हवालाती जारी कर दिया गया। कुछ देर बाद पुन: इसी मामले में जमानत दे दी गई। सोमवार को बार एसोसिएशन की आपात बैठक बुलाकर रिहाई की संपूर्ण प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। बैठक में एसडीएम और पुलिस की कार्यशैली को निंदनीय बताते हुए एक कमेटी का गठन किया गया।
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इसके बाद बार एसोसिएशन अध्यक्ष सोम प्रकाश मिश्र की अगुवाई में बार सभागार से बाहर निकले अधिवक्ता अचानक उग्र हो उठे और दस्तावेज लेखक दिनेश मिश्र के तख्ते पर पहुंचकर तोड़फोड़ शुरू कर दी।
आक्रोशित अधिवक्ताओं ने दस्तावेज लेखक की कुर्सी, मेज और तख्त को तोड़कर फेंकते हुए उन्हें तहसील में न बैठने देने की बात कही। इसके बाद अधिवक्ता लामबंद होकर एसडीएम कोर्ट पहुंचे और रिहाई आदेश की फाइल देखते हुए सम्पूर्ण प्रक्रिया को गलत बताते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
हंगामे के समय एसडीएम मुसाफिरखाना मौजूद नहीं थे। तहसीलदार श्रद्धा सिंह ने वहां पहुंचकर अधिवक्ताओं से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। बार एसोसिएशन अध्यक्ष का कहना था कि वारंट हवालाती जारी होने के बाद बिना जेल गए आरोपी को छोड़ना गलत है।