फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Amethi News ›   Amazing speed, 184 crore compensation distributed in four months

गजब की तेजी, चार माह में बांटा 184 करोड़ मुआवजा

Fri, 04 Nov 2022 11:33 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Nov 2022 11:33 PM IST
विज्ञापन
Amazing speed, 184 crore compensation distributed in four months
गौरीगंज (अमेठी)। करीब 364 करोड़ रुपये के घपले में प्रथम दृष्टया दोषी मिले अफसरों ने इस पर रोक लगाए जाने तक 95 प्रतिशत मुआवजा प्रभावित भू स्वामियों में वितरित कर दिया। कृषि उपयोग की भूमि का मुआवजा हाईवेे किनारे की भूमि के हिसाब से कर देने की यह जल्दबाजी तब थमी जब एनएचएआई ने वर्ष 2020 में डीएम कोर्ट में वाद दायर किया।
विज्ञापन

एनएच-56 के चौड़ीकरण में अफसरों की ओर से बरती गई मनमानी की कहानी जिले में चर्चा का विषय बनी है। चर्चाओं के अनुसार घपले का तानाबाना उस समय जिले में तैनात राजस्व व एनएचएआई के अफसरों की मिलीभगत से बुना गया। यह भी बात सामने आ रही है कि हाईवे के चौड़ीकरण में बड़ा खेल किया जा सके इसके लिए एनएचएआई और तत्कालीन बड़े अफसरों ने चर्चित अफसर आरडी राम को 23 फरवरी 2015 को मुसाफिरखाना तहसील में बतौर एसडीएम तैनाती दी। आरडी राम 18 सितंबर 2015 तक यहां रहे और उन्होंने कई गांवों का अवार्ड किया। माना जा रहा है कि इसी दौरान एनएचएआई की मिलीभगत से घपले की पटकथा को अंतिम रूप दिया गया। आरडीराम ने गलत तरीके से दो बाईपास की भूमि के स्वामियों को एनएच से सटे भूखंडों के बराबर मुआवजे में शामिल कर कई गांवों का अवार्ड किया। हालांकि अवार्ड करने के अलावा आरडी राम ने महज तीन करोड़ रुपये का मुआवजा ही वितरित किया।
विज्ञापन

आरडीराम के बाद 19 सितंबर 2015 को मुसाफिरखाना एसडीएम का दायित्व संभालने वाले अशोक कुमार कनौजिया ने भी कई गांवों का अवार्ड करने के अलावा ताबड़तोड़ मुआवजा वितरित किया। अशोक ने करीब 207 करोड़ रुपये का मुआवजा प्रभावित लोगों को बांटा। अशोक कनौजिया यहां 25 मार्च 2016 तक रहे। 26 मार्च 2016 को एसडीएम बनाए गए सुभाष चंद्र प्रजापति यहां 14 जुलाई 2016 तक रहे। इस दौरान उन्होंने 184 करोड़ रुपये मुआवजा वितरित किया। 22 जुलाई 2016 से 10 दिसंबर 2016 तक यहां एसडीएम रहे वेद प्रकाश मिश्र ने 37 करोड़ तो 10 दिसंबर 2016 से तीन जुलाई 2018 तक यहां एसडीएम रहे अभय कुमार पांडेय ने 116 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया। अभय के समय तक करीब 90 फीसदी मुआवजा बांट दिया गया। मुआवजा वितरण पर रोक तब लगी जब दिसंबर 2020 में एनएचएआई ने डीएम कोर्ट में इस गड़बड़ी को संज्ञान में लाते हुए इस पर वाद दायर किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

जांच में संदिग्ध मिले दो अफसर अब एडीएम
जांच टीम ने जिन सात एसडीएम को इस घपले में संदिग्ध माना है उनमें से दो अफसर प्रमोशन पाकर एडीएम बन चुके हैं। इन दो अफसरों में सुभाष चंद्र प्रजापति व अशोक कुमार कनौजिया जहां प्रमोट होकर एडीएम बन चुके हैं वहीं कुछ अन्य प्रमोशन का लाभ पाने के करीब हैं।

एनएचएआई पर गंभीर सवाल
मुआवजा वितरण के नाम पर 384 करोड़ रुपये के घपले को अंजाम तक पहुंचाने में एनएचएआई के अफसरों की बड़ी भूमिका रही। माना जा रहा है कि यदि एनएचएआई के अफसर पूरे मामले में संलिप्त नहीं होते तो इतने बड़े घपले को धरातल पर नहीं उतारा जा सकता था। जांच टीम ने पाया है कि एनएचएआई के अफसर भी मामले में बराबर के दोषी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed