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उद्घाटन के बाद से बंद पड़े 79 स्वास्थ्य उपकेंद्र

Thu, 16 Dec 2021 01:40 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 16 Dec 2021 01:40 AM IST
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79 health centers still shutdown after opening  by CM
गौरीगंज/संग्रामपुर (अमेठी)। लोगों को गांव में ही स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें इसके लिए मुख्यमंत्री ने बीती पांच दिसंबर को जिले को 79 स्वास्थ्य उपकेंद्रों का तोहफा दिया था। किराए के भवन में चलने वाले इन उपकेंद्रों का उद्घाटन वर्चुअल विधि से करने के बाद कहा था कि अब ग्रामीणों को मामूली रूप से बीमार होने पर पीएचसी/ सीएचसी या जिला अस्पताल नहीं जाना होगा। उद्घाटन के 10 दिन बाद भी इन केंद्रों पर ताला बंद होने से ग्रामीणों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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बीती पांच दिसंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से पांच हजार नए उपस्वास्थ्य केंद्रों का ऑनलाइन लोकार्पण किया था। इस लोकार्पण में जिले को 79 उपकेंद्र मिले थे। किराए के भवन में चलने वाले इन उपकेंद्रों के उद्घाटन अवसर पर भवन के बाहर उपकेंद्र संकेतांक बोर्ड भी लगाया गया था। अधिकांश केंद्रों पर यह बोर्ड अब नदारद है। जिन गांवों में इन केंद्रों को खोला गया है, वहां के ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें स्वास्थ्य उपकेंद्र खोले जाने की ही जानकारी नहीं है।
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उन्हें तो यह भी नहीं पता कि इन उपकेंद्रों पर किस तरह के रोगों का इलाज होगा। कौन इसका संचालन करेगा, दवा भी मिलेगी या नहीं। अस्पताल का उद्घाटन होने के 10 दिन बाद भी इन केंद्रों पर किसी की तैनाती नहीं की गई है। न ही सीएचसी का कोई स्टाफ समय से आकर इन स्वास्थ्य केंद्रों को खोलता और बंद करता है। उपकेंद्रों के संकेतांक बोर्ड भी बाहर नहीं लगाए गए। कहा गया था कि इन स्वास्थ उपकेंद्र पर टीकाकरण के साथ प्रसव की सुविधा भी उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।
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इन स्वास्थ्य उपकेंद्रों के बंद रहने की स्थिति तब है जब सभी को उद्घाटन से पूर्व दो लाख रुपये कीमत के उपकरण और फर्नीचर मिल चुके हैं। मिले संसाधन में कुर्सी, मेज, फ्रिज, प्रसव के लिए बेड, बीपी मशीन, थर्मामीटर, माइक्रोस्कोप, स्ट्रेचर सहित 64 वस्तुएं शामिल हैं। उपकेंद्रों पर गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण, बच्चों का टीकाकरण, खून व प्रेगनेंसी की जांच, ब्लड प्रेशर, वजन, किशोर व किशोरियों में आयरन की गोली का वितरण, कुपोषित बच्चों का वजन और उपचार के साथ गांव में सामान्य रोगों का इलाज करना है।
बोझी निवासी राधेश्याम ने बताया कि स्वास्थ्य उपकेंद्र तो गांव में खुला लेकिन अधिकांश ग्रामीणों को इसकी जानकारी नहीं है। उद्घाटन के बाद से कोई नहीं आया। बाहर बोर्ड भी नहीं लगाया है। नेवादाकनू निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि पांच दिसंबर को कुछ लोग गांव में आए थे। फोटो खिंचा कर लौट गए। बाद में पता लगा कि गांव में उपकेंद्र खुल गया। लेकिन उसके बाद से ताला बंद रहता है।

बोझी निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि निजी भवन में उपकेंद्र खोला गया है। हालांकि केंद्र का बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। ग्रामीण बाबूलाल ने कहा कि गांव में डॉक्टर नहीं पहुंचते हैं। ऐसी व्यवस्था से पहले स्टॉफ की तैनाती करना चाहिए था। स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती के बगैर अस्पताल खोल दिए। उद्घाटन के बाद से ताला ही लगा है।
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