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Ambedkar Nagar News: जलस्तर घटा, फिर भी कटान तेज, सरयू में समा रहे खेत

Fri, 04 Jul 2025 10:39 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jul 2025 10:39 PM IST
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Water level decreased, but erosion is still fast, fields are getting submerged in Saryu
आलापुर तहसील क्षेत्र में कटान करती सरयू नदी। संवाद 
अंबेडकरनगर। पहाड़ों पर हो रही बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के चलते सरयू नदी का जलस्तर कभी बढ़ रहा है तो कभी घट रहा है। आलापुर तहसील क्षेत्र में शुक्रवार को जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज हुई, लेकिन तेज लहरों के चलते किनारों पर कटान तेज है और खेत नदी में समाहित हो रहे हैं। वहीं, टांडा क्षेत्र में भी जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। आगामी दिनों में बारिश तेज होने के साथ नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ने के आसार हैं। इसे देखते हुए तहसील प्रशासन ने राहत चौकियों को तैयार करवाना शुरू कर दिया है।
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कटान तेज होने से ग्रामीणों में दहशत
राजेसुल्तानपुर। आलापुर तहसील क्षेत्र में बहने वाली सरयू नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार को 83.80 मीटर पहुंच गया था, जो शुक्रवार को 20 सेमी कम होकर 83.60 मीटर हो गया है। कम्हरिया व मांझा कम्हरिया क्षेत्र में कटान जारी है। मांझा कम्हरिया ग्राम पंचायत के मजरे बद्री के पुरा निवासी बंसीलाल निषाद लगभग 20 वर्षों से छप्पर डालकर रह रहे हैं। उनकी मड़ई व पेड़-पौधे कटान की कगार पर पहुंच गए हैं। कटान तेज होने पर मांझा क्षेत्र के बद्री के पूरा व निषाद बस्ती के लोगों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। मांझा कम्हरिया के बद्री का पूरा निवासी लालजी, राम आसरे व राजेश ने कहा कि अभी तो नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, जिस दिन जलस्तर खतरे के निशान के करीब या ऊपर पहुंचा तो स्थिति भयावह हो जाएगी। बाढ़ खंड अयोध्या की ओर से बैंबू स्टड बनवाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसे कम्हरिया व मांझा कम्हरिया के बीच कटान वाले स्थान पर लगाया जाएगा।
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बनने लगे 13 राहत शिविर
जिला प्रशासन ने बाढ़ की संभावना को देखते हुए 13 बाढ़ राहत शिविर बनाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके लिए चिह्नित स्थानों पर लोगों के ठहरने व अन्य सुरक्षात्मक इंतजाम किए जा रहे हैं।
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जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण
विद्युतनगर। टांडा तहसील क्षेत्र में बृहस्पतिवार को जहां नदी का जलस्तर 91.90 मीटर दर्ज किया गया था, वहीं शुक्रवार को यह घटकर 91.52 मीटर पर पहुंच गया। हालांकि खतरे का निशान 92.73 मीटर है, लिहाजा नदी अब खतरे के निशान से एक मीटर 21 सेंटीमीटर ही नीचे बह रही है। ग्रामीणों का कहना है कि रात में नदी का बहाव तेज हो जाता है। कटान रोकने के लिए महादेवा घाट पर ठोकर का निर्माण जिला पंचायत से किया जा रहा है। वहीं मुबारकपुर, डुहिया समेत अन्य गांवों में कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड ने जीओ बैग के सहारे करीब आठ बांध बनाए हैं। यह कितने कारगर साबित होते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा। ग्रामीण अखिलेश व अमन राज ने बताया कि पिछले कुछ नदी में नदी तेजी से बढ़ी है। अगर जलस्तर और बढ़ता है तो कटान तेज होगी। उधर, नदी के दूसरी ओर महुआपार, गंगापुर समेत कई अन्य गांवों के लोगों को रोजगार के सिलसिले में हर दिन जान जोखिम में डालकर नदी पारकर आना पड़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के जेई अमन कुमार ने बताया कि जलस्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है।
तहसील क्षेत्र टांडा में चिह्नित गांव
माझा उल्टहवा, करमपुर बरसावां, औसानपुर, महरीपुर, नैपुरा, माझा छज्जापुर, माझा चिंतौरा, माझा रसूलपुर मुबारकपुर, माझा कला ,माझा केवटला गांव बाढ़ की चपेट में आते हैं।

तहसील आलापुर में बाढ़ के लिए चिह्नित गांव
ग्राम माझा कम्हरिया, माझा आराजी देवारा, मकरही सर्ददीनपुर, मिर्जापुर इंदईपुर , धनुकारा, मंसूरगंज, मुबारपुर पीकार, चहोड़ा शाहपुर, बरईपुर, इसौरी नसीरपुर, कम्हरिया, बंगालपुर।
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