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वार्ड तो बना दिया, भर्ती नहीं किए जा रहे मरीज
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अंबेडकरनगर। डेंगू से पीड़ित मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती नहीं किया जा रहा है। 10 बेड का विशेष वार्ड आरक्षित होने के बावजूद ऐसे मरीजों को राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर भेज दिया जाता है। उधर मेडिकल कॉलेज में सात मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।
संक्रामक रोगों के तेजी से पांव पसारने के बावजूद जिला अस्पताल में पर्याप्त प्रबंध नहीं हो पा रहे हैं। हालात ये हैं कि जिले में जब डेंगू लगभग प्रतिदिन कई लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है, तब भी यहां मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। खानापूर्ति करने के लिए बीते दिनों विशेष वार्ड में 10 बेड आरक्षित कर दिए गए।
दावा किया गया कि डेंगू से बचाने के लिए यहां संबंधित मरीजों को भर्ती किया जाएगा। इससे प्रभावित मरीजों के साथ ही अन्य नागरिकों में यह भरोसा बना कि डेंगू का बेहतर उपचार जिला अस्पताल में ही हो सकेगा। हालांकि यह उम्मीद पूरी नहीं हो रही है।
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ऐसा इसलिए क्योंकि डेंगू प्रभावित एक भी मरीज को यहां भर्ती नहीं किया जा रहा है। इसके पीछे यहां प्लेटलेट्स गणना करने की मशीन के खराब होने को कारण बताया जा रहा है लेकिन मरीज व तीमारदार इसे जिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही व मनमानी करार दे रहे हैं।
सोमवार को जिला अस्पताल में मिले तेज बुखार से पीड़ित अरिया के श्रीनाथ ने कहा कि प्लेटलेट्स की गणना तो निजी पैथोलॉजी से भी करा सकते हैं। इसके लिए मरीजों को मेडिकल कॉलेज तक भेजना अनुचित है।
जहांगीरगंज के सुरेंद्र यादव ने कहा कि जिला अस्पताल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है। मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार सुनिश्चित करना चाहिए। प्लेटलेट्स की गणना करने की मशीन के बिगड़े रहने का हवाला देकर मरीजों को भर्ती न करना एकदम ठीक नहीं है। कई अन्य मरीजों ने भी इसी तरह की नाराजगी जताई।
उधर इन सबके बीच राजकीय मेडिकल सद्दरपुर में सोमवार तक डेंगू के कुल सात मरीज भर्ती हैं। इनका उपचार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. मनोज गुप्त ने बताया कि 30 बेड का विशेष वार्ड आरक्षित किया गया है। इसी में जिला अस्पताल से आने वाले मरीज भी भर्ती किए जाते हैं।
जिला अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने को लेकर लापरवाही बरतने के चलते ज्यादातर मरीज निजी अस्पतालों का रुख कर ले रहे हैं। लगभग 20 मरीज निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। इनमें से कुछ मरीज तो लखनऊ व वाराणसी के अस्पतालों में जाकर भर्ती हुए हैं। अकबरपुर नगर के निजी अस्पतालों में भी मरीजों ने भर्ती होने को प्राथमिकता दी है। लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल में यदि भर्ती कर बेहतर उपचार होता तो निजी अस्पतालों की दौड़ न लगानी पड़ती।
डेंगू के बढ़ते प्रकोप के बीच सोमवार को सात नए मरीज सामने आए। इससे जिले में डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़कर 132 हो गई है। इसके साथ ही सोमवार को मलेरिया के भी दो नए मरीज चिह्नित हुए। इससे मलेरिया के रोगियों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
सीएमओ कार्यालय के अनुसार अब डेंगू के मरीजों की संख्या 132 हो गई है। इसके साथ ही मलेरिया से पीड़ितों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
डेंगू की जांच कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे कटेहरी के सूरज व मीरानपुर के करन ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्लेटलेट्स काउंट मशीन के खराब होने से प्लेटलेट्स की स्थिति की समुचित जानकारी नहीं हो सकी। ऐसे में अब इसके लिए निजी पैथॉलोजी का सहारा लेना पड़ रहा है। वहां लगभग डेढ़ हजार रुपये की आर्थिक चपत लगेगी।
बरियावन के मनोज व छज्जापुर के अकील ने कहा कि प्लेटलेट्स की जानकारी के लिए सोमवार को जिला अस्पताल गए थे लेकिन मायूस होकर लौटना पड़ा। निजी पैथॉलोजी सेंटर पर जांच कराई। 1900 रुपये जांच के नाम पर ले लिया गया।
डेंगू के मरीजों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। ज्यादा गंभीर मरीजों को ही भर्ती किया जाता है। मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त बेड हैं। जिला अस्पताल में भी मरीजों को भर्ती किया जाना तय किया जाएगा।
-डॉ. श्रीकांत शर्मा, सीएमओ
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संक्रामक रोगों के तेजी से पांव पसारने के बावजूद जिला अस्पताल में पर्याप्त प्रबंध नहीं हो पा रहे हैं। हालात ये हैं कि जिले में जब डेंगू लगभग प्रतिदिन कई लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है, तब भी यहां मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। खानापूर्ति करने के लिए बीते दिनों विशेष वार्ड में 10 बेड आरक्षित कर दिए गए।
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दावा किया गया कि डेंगू से बचाने के लिए यहां संबंधित मरीजों को भर्ती किया जाएगा। इससे प्रभावित मरीजों के साथ ही अन्य नागरिकों में यह भरोसा बना कि डेंगू का बेहतर उपचार जिला अस्पताल में ही हो सकेगा। हालांकि यह उम्मीद पूरी नहीं हो रही है।
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ऐसा इसलिए क्योंकि डेंगू प्रभावित एक भी मरीज को यहां भर्ती नहीं किया जा रहा है। इसके पीछे यहां प्लेटलेट्स गणना करने की मशीन के खराब होने को कारण बताया जा रहा है लेकिन मरीज व तीमारदार इसे जिला अस्पताल प्रशासन की लापरवाही व मनमानी करार दे रहे हैं।
सोमवार को जिला अस्पताल में मिले तेज बुखार से पीड़ित अरिया के श्रीनाथ ने कहा कि प्लेटलेट्स की गणना तो निजी पैथोलॉजी से भी करा सकते हैं। इसके लिए मरीजों को मेडिकल कॉलेज तक भेजना अनुचित है।
जहांगीरगंज के सुरेंद्र यादव ने कहा कि जिला अस्पताल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है। मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार सुनिश्चित करना चाहिए। प्लेटलेट्स की गणना करने की मशीन के बिगड़े रहने का हवाला देकर मरीजों को भर्ती न करना एकदम ठीक नहीं है। कई अन्य मरीजों ने भी इसी तरह की नाराजगी जताई।
उधर इन सबके बीच राजकीय मेडिकल सद्दरपुर में सोमवार तक डेंगू के कुल सात मरीज भर्ती हैं। इनका उपचार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. मनोज गुप्त ने बताया कि 30 बेड का विशेष वार्ड आरक्षित किया गया है। इसी में जिला अस्पताल से आने वाले मरीज भी भर्ती किए जाते हैं।
जिला अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने को लेकर लापरवाही बरतने के चलते ज्यादातर मरीज निजी अस्पतालों का रुख कर ले रहे हैं। लगभग 20 मरीज निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। इनमें से कुछ मरीज तो लखनऊ व वाराणसी के अस्पतालों में जाकर भर्ती हुए हैं। अकबरपुर नगर के निजी अस्पतालों में भी मरीजों ने भर्ती होने को प्राथमिकता दी है। लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल में यदि भर्ती कर बेहतर उपचार होता तो निजी अस्पतालों की दौड़ न लगानी पड़ती।
डेंगू के बढ़ते प्रकोप के बीच सोमवार को सात नए मरीज सामने आए। इससे जिले में डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़कर 132 हो गई है। इसके साथ ही सोमवार को मलेरिया के भी दो नए मरीज चिह्नित हुए। इससे मलेरिया के रोगियों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
सीएमओ कार्यालय के अनुसार अब डेंगू के मरीजों की संख्या 132 हो गई है। इसके साथ ही मलेरिया से पीड़ितों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
डेंगू की जांच कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे कटेहरी के सूरज व मीरानपुर के करन ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्लेटलेट्स काउंट मशीन के खराब होने से प्लेटलेट्स की स्थिति की समुचित जानकारी नहीं हो सकी। ऐसे में अब इसके लिए निजी पैथॉलोजी का सहारा लेना पड़ रहा है। वहां लगभग डेढ़ हजार रुपये की आर्थिक चपत लगेगी।
बरियावन के मनोज व छज्जापुर के अकील ने कहा कि प्लेटलेट्स की जानकारी के लिए सोमवार को जिला अस्पताल गए थे लेकिन मायूस होकर लौटना पड़ा। निजी पैथॉलोजी सेंटर पर जांच कराई। 1900 रुपये जांच के नाम पर ले लिया गया।
डेंगू के मरीजों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। ज्यादा गंभीर मरीजों को ही भर्ती किया जाता है। मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त बेड हैं। जिला अस्पताल में भी मरीजों को भर्ती किया जाना तय किया जाएगा।
-डॉ. श्रीकांत शर्मा, सीएमओ