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Ambedkar Nagar News: आपराधिक घटना होने पर करें पुलिस हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग
Tue, 17 Mar 2026 12:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 17 Mar 2026 12:06 AM IST
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राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में सोमवार को आयोजित पुलिस पाठशाला के दौरान उपस्थित क्षेत्राधिकारी
जलालपुर। क्षेत्र के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से पुलिस पाठशाला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि क्षेत्राधिकारी शुभम कुमार ने छात्राओं को बताया कि किसी भी प्रकार की आपराधिक घटना, साइबर फ्रॉड या महिला उत्पीड़न की स्थिति में पुलिस हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करना चाहिए। समय पर दी गई सूचना से पुलिस को त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलती है।
उन्होंने छात्राओं को महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों के बारे में जानकारी दी। बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर फ्रॉड हो जाता है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके साथ ही नजदीकी थाने में लिखित शिकायत देना भी जरूरी है। कई मामलों में त्वरित सूचना मिलने पर खाते से कटे पैसे को भी रोका जा सकता है।
उन्होंने बताया कि कई बार साइबर अपराधी मोबाइल पर पीडीएफ या अन्य फाइल के रूप में लिंक भेजते हैं। ये लिंक अक्सर शादी के निमंत्रण कार्ड, डॉक्यूमेंट या किसी अन्य फाइल के नाम से भेजे जाते हैं। ऐसे लिंक को बिना जांचे-परखे खोलना खतरनाक हो सकता है। इस अवसर पर उप निरीक्षक वंदना सरोज, एसएसआई जैद अहमद और कांस्टेबल कुसुम चौहान ने छात्राओं को साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए मोबाइल फोन और इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के बारे में विशेष रूप से जागरूक किया। इस दौरान अंशिका उपाध्याय, फातिमा, लाडली सहित कई अन्य छात्राओं ने मौजूद पुलिस अफसरों से सवाल कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
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छात्राओं ने पूछे सवाल, मिले जवाब
प्रश्न: साइबर फ्रॉड होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
उत्तर: तुरंत 1930 नंबर पर कॉल कर शिकायत दर्ज करनी चाहिए और नजदीकी थाने में भी सूचना देनी चाहिए।
प्रश्न: क्या महिला से जुड़े मामलों में शिकायत करने वाली का नाम सार्वजनिक होता है।
उत्तर: नहीं। ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
प्रश्न: मोबाइल पर आने वाले अनजान लिंक को खोलना चाहिए या नहीं।
उत्तर: नहीं। अगर लिंक किसी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध स्रोत से आया है तो उसे बिल्कुल नहीं खोलना चाहिए।
प्रश्न: अगर गलती से कोई संदिग्ध लिंक खुल जाए तो क्या करें।
उत्तर: तुरंत मोबाइल का इंटरनेट बंद करें, बैंक को जानकारी दें और पुलिस हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करें।
प्रश्न: क्या ओटीपी किसी के साथ साझा करना सुरक्षित है।
उत्तर: नहीं। ओटीपी, एटीएम पिन और बैंक से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
प्रश्न: क्या सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से बात करना ठीक है।
उत्तर: अनजान लोगों से व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए और संदिग्ध प्रोफाइल से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
प्रश्न: अगर कोई व्यक्ति फोन करके बैंक अधिकारी बनकर जानकारी मांगे तो क्या करें।
उत्तर: ऐसे कॉल पर भरोसा नहीं करना चाहिए और कोई भी बैंक से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
प्रश्न: मोबाइल और इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग कैसे करें।
उत्तर: केवल भरोसेमंद वेबसाइट और ऐप का उपयोग करें, अनजान लिंक न खोलें और अपनी निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
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उन्होंने छात्राओं को महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों के बारे में जानकारी दी। बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर फ्रॉड हो जाता है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके साथ ही नजदीकी थाने में लिखित शिकायत देना भी जरूरी है। कई मामलों में त्वरित सूचना मिलने पर खाते से कटे पैसे को भी रोका जा सकता है।
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उन्होंने बताया कि कई बार साइबर अपराधी मोबाइल पर पीडीएफ या अन्य फाइल के रूप में लिंक भेजते हैं। ये लिंक अक्सर शादी के निमंत्रण कार्ड, डॉक्यूमेंट या किसी अन्य फाइल के नाम से भेजे जाते हैं। ऐसे लिंक को बिना जांचे-परखे खोलना खतरनाक हो सकता है। इस अवसर पर उप निरीक्षक वंदना सरोज, एसएसआई जैद अहमद और कांस्टेबल कुसुम चौहान ने छात्राओं को साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए मोबाइल फोन और इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के बारे में विशेष रूप से जागरूक किया। इस दौरान अंशिका उपाध्याय, फातिमा, लाडली सहित कई अन्य छात्राओं ने मौजूद पुलिस अफसरों से सवाल कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
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छात्राओं ने पूछे सवाल, मिले जवाब
प्रश्न: साइबर फ्रॉड होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
उत्तर: तुरंत 1930 नंबर पर कॉल कर शिकायत दर्ज करनी चाहिए और नजदीकी थाने में भी सूचना देनी चाहिए।
प्रश्न: क्या महिला से जुड़े मामलों में शिकायत करने वाली का नाम सार्वजनिक होता है।
उत्तर: नहीं। ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
प्रश्न: मोबाइल पर आने वाले अनजान लिंक को खोलना चाहिए या नहीं।
उत्तर: नहीं। अगर लिंक किसी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध स्रोत से आया है तो उसे बिल्कुल नहीं खोलना चाहिए।
प्रश्न: अगर गलती से कोई संदिग्ध लिंक खुल जाए तो क्या करें।
उत्तर: तुरंत मोबाइल का इंटरनेट बंद करें, बैंक को जानकारी दें और पुलिस हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करें।
प्रश्न: क्या ओटीपी किसी के साथ साझा करना सुरक्षित है।
उत्तर: नहीं। ओटीपी, एटीएम पिन और बैंक से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
प्रश्न: क्या सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से बात करना ठीक है।
उत्तर: अनजान लोगों से व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए और संदिग्ध प्रोफाइल से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
प्रश्न: अगर कोई व्यक्ति फोन करके बैंक अधिकारी बनकर जानकारी मांगे तो क्या करें।
उत्तर: ऐसे कॉल पर भरोसा नहीं करना चाहिए और कोई भी बैंक से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
प्रश्न: मोबाइल और इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग कैसे करें।
उत्तर: केवल भरोसेमंद वेबसाइट और ऐप का उपयोग करें, अनजान लिंक न खोलें और अपनी निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।