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Ambedkar Nagar News: धूप और लू की मार कर रही परेशान, बढ़ी मरीजों की भीड़
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जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती बच्चे। संवाद
अंबेडकरनगर। जिले में चिलचिलाती धूप और लू का प्रकोप लगातार जारी है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बृहस्पतिवार को जिले का अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भीषण गर्मी और गर्म हवा के थपेड़ों के कारण दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। हालात यह हैं कि सुबह नौ बजे से ही सूरज की तपिश झुलसाने लगती है और दोपहर होते-होते आसमान से आग बरसने का एहसास होने लगता है। पिछले कई दिनों से पारा 41 से 42 डिग्री के बीच स्थिर बना हुआ है, जिससे लोग बहुत जरूरी होने पर ही पूरे बदन को ढककर या छाते का सहारा लेकर घरों से बाहर निकल रहे हैं।
गर्मी के इस सितम का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल में लू, डिहाइड्रेशन और उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बृहस्पतिवार को अस्पताल के बच्चा वार्ड में नौ नए बच्चे भर्ती किए गए, जिनमें से अधिकांश उल्टी-दस्त से पीड़ित थे और दो बच्चों में खून की कमी भी पाई गई। बाल रोग विशेषज्ञ व नोडल अधिकारी डॉ. अविनाश रस्तोगी ने बताया कि मौसम के मिजाज को देखते हुए बच्चों में पेट संबंधी समस्याएं बढ़ गई हैं। उन्होंने भीषण गर्मी में लोगों को विशेष सावधानी और सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
उल्टी-दस्त और बुखार ने बढ़ाई मुसीबत
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बृहस्पतिवार को सुबह से ही मरीजों की भीड़ रही। दोपहर एक बजे तक ही कुल 35 मरीजों का उपचार किया गया, जिनमें से नौ लोग पेट दर्द और उल्टी-दस्त की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। मरीजों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि अस्पताल कर्मियों को स्ट्रेचर पर ही इलाज शुरू करना पड़ा, हालांकि बाद में जगह खाली होने पर उन्हें वार्ड के बेड पर शिफ्ट किया गया। भर्ती होने वालों में मुख्य रूप से रानीपुर गिरंट की रामदुलारी, भगौती के शैलेंद्र, सेहरा जलालपुर के अशोक, शाहपुर परासी के राजेंद्र प्रसाद और आसोपुर के छौकीलाल शामिल हैं। इनके अलावा कनकतौरा के वीनस वर्मा, बसेरा के हरिओम, नैपुरा की कुसुमलता और नंदूपूर की मनोरमा को भी गंभीर स्थिति के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. पीएन यादव ने बताया कि सभी चिकित्सकों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अस्पताल पहुंचने वाले हर मरीज को तत्काल और बेहतर इलाज मिले। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि इस तपती धूप में खाली पेट बाहर न निकलें और शरीर में पानी की कमी न होने देने के लिए अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करें।
बच्चों को पिलाएं पर्याप्त पानी
गर्मी में बच्चों का शरीर जल्दी डिहाइड्रेट हो सकता है।
उन्हें हर 1-2 घंटे में पानी पिलाना बेहद जरूरी है।
छोटे-छोटे घूंट में पानी देना ज्यादा असरदार होता है।
इसके अलावा फल और जूस जैसे हाइड्रेटिंग भोजन भी मदद कर सकते हैं।
इस उपाय से बच्चों का शरीर ठंडा रहता है और हीट स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है।
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गर्मी के इस सितम का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल में लू, डिहाइड्रेशन और उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बृहस्पतिवार को अस्पताल के बच्चा वार्ड में नौ नए बच्चे भर्ती किए गए, जिनमें से अधिकांश उल्टी-दस्त से पीड़ित थे और दो बच्चों में खून की कमी भी पाई गई। बाल रोग विशेषज्ञ व नोडल अधिकारी डॉ. अविनाश रस्तोगी ने बताया कि मौसम के मिजाज को देखते हुए बच्चों में पेट संबंधी समस्याएं बढ़ गई हैं। उन्होंने भीषण गर्मी में लोगों को विशेष सावधानी और सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
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उल्टी-दस्त और बुखार ने बढ़ाई मुसीबत
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बृहस्पतिवार को सुबह से ही मरीजों की भीड़ रही। दोपहर एक बजे तक ही कुल 35 मरीजों का उपचार किया गया, जिनमें से नौ लोग पेट दर्द और उल्टी-दस्त की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। मरीजों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि अस्पताल कर्मियों को स्ट्रेचर पर ही इलाज शुरू करना पड़ा, हालांकि बाद में जगह खाली होने पर उन्हें वार्ड के बेड पर शिफ्ट किया गया। भर्ती होने वालों में मुख्य रूप से रानीपुर गिरंट की रामदुलारी, भगौती के शैलेंद्र, सेहरा जलालपुर के अशोक, शाहपुर परासी के राजेंद्र प्रसाद और आसोपुर के छौकीलाल शामिल हैं। इनके अलावा कनकतौरा के वीनस वर्मा, बसेरा के हरिओम, नैपुरा की कुसुमलता और नंदूपूर की मनोरमा को भी गंभीर स्थिति के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. पीएन यादव ने बताया कि सभी चिकित्सकों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अस्पताल पहुंचने वाले हर मरीज को तत्काल और बेहतर इलाज मिले। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि इस तपती धूप में खाली पेट बाहर न निकलें और शरीर में पानी की कमी न होने देने के लिए अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करें।
बच्चों को पिलाएं पर्याप्त पानी
गर्मी में बच्चों का शरीर जल्दी डिहाइड्रेट हो सकता है।
उन्हें हर 1-2 घंटे में पानी पिलाना बेहद जरूरी है।
छोटे-छोटे घूंट में पानी देना ज्यादा असरदार होता है।
इसके अलावा फल और जूस जैसे हाइड्रेटिंग भोजन भी मदद कर सकते हैं।
इस उपाय से बच्चों का शरीर ठंडा रहता है और हीट स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है।