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Ambedkar Nagar News: गंभीर नवजातों के इलाज में वेंटीलेटर का संकट
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जिला अस्पताल में स्थापित एसएनसीयू। संवाद
अंबेडकरनगर। जिला चिकित्सालय में गंभीर नवजातों के उपचार की व्यवस्था है, लेकिन वेंटीलेटर और जरूरी सपोर्टिंग उपकरणों की कमी उपचार व्यवस्था पर भारी पड़ रही है। 12 बेड की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में क्षमता से अधिक 10 से 15 नवजात भर्ती रहते हैं। गंभीर बच्चों के लिए पर्याप्त वेंटीलेटर उपलब्ध न होने से कई बार उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज में भी महज चार वेंटीलेटर होने से परिजन निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर होते हैं।
जिला अस्पताल के दूसरे तल पर संचालित एसएनसीयू में जन्म से 28 दिन तक के समय से पहले जन्मे, कम वजन, सांस लेने में परेशानी, जन्मजात पीलिया समेत गंभीर बीमारियों से पीड़ित नवजातों को 24 घंटे उपचार दिया जाता है। वार्ड में दो वेंटीलेटर बेड की व्यवस्था है, लेकिन इन्हें संचालित करने के लिए जरूरी सपोर्टिंग उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। पीकू वार्ड में ऑक्सीजन युक्त बेड की सुविधा भी है।
महामाया राजकीय मेडिकल कॉलेज में चार बेड का एनआईसीयू है। नवजातों की संख्या अधिक होने के कारण यहां भी अधिकांश समय बेड भरे रहते हैं। ऐसे में गंभीर नवजातों को उच्चस्तरीय उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। चिकित्सकों के अनुसार गंभीर नवजातों के उपचार के लिए पर्याप्त वेंटीलेटर और सपोर्टिंग संसाधनों की जरूरत है।
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सी-पैप मशीन लगने से मिली राहत
हाल में एसएनसीयू में दो सी-पैप मशीनें लगाई गई हैं। इससे सांस लेने में दिक्कत वाले नवजातों को राहत मिली है और ऐसे कई बच्चों को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। वार्ड में पीलिया से पीड़ित बच्चों के लिए फोटोथेरेपी मशीन, कम वजन के नवजातों के लिए दो बेड की केएमसी यूनिट और मां का दूध सुरक्षित रखने के लिए एलएमयू यूनिट भी उपलब्ध है।
जन्म के बाद न रोने वाले बच्चे अधिक
चिकित्सकों के अनुसार एसएनसीयू में जन्म के बाद न रोने वाले नवजात अधिक आते हैं। ऐसी स्थिति में परिजन चिंतित होकर बच्चों को अस्पताल लेकर पहुंचते हैं। इसके अलावा जन्म के समय कम वजन और खून में संक्रमण से पीड़ित नवजात भी भर्ती किए जाते हैं।
भेजी गई है डिमांड
गंभीर रूप से बीमार नवजातों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में सभी जरूरी संसाधन और दवाएं उपलब्ध हैं। दो वेंटीलेटर शुरू करने के लिए आवश्यक उपकरणों की डिमांड भेजी गई है। फिलहाल बच्चों की संख्या बढ़ने या स्थिति गंभीर होने पर राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है।
डॉ. पीएन यादव, सीएमएस
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जिला अस्पताल के दूसरे तल पर संचालित एसएनसीयू में जन्म से 28 दिन तक के समय से पहले जन्मे, कम वजन, सांस लेने में परेशानी, जन्मजात पीलिया समेत गंभीर बीमारियों से पीड़ित नवजातों को 24 घंटे उपचार दिया जाता है। वार्ड में दो वेंटीलेटर बेड की व्यवस्था है, लेकिन इन्हें संचालित करने के लिए जरूरी सपोर्टिंग उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। पीकू वार्ड में ऑक्सीजन युक्त बेड की सुविधा भी है।
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महामाया राजकीय मेडिकल कॉलेज में चार बेड का एनआईसीयू है। नवजातों की संख्या अधिक होने के कारण यहां भी अधिकांश समय बेड भरे रहते हैं। ऐसे में गंभीर नवजातों को उच्चस्तरीय उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। चिकित्सकों के अनुसार गंभीर नवजातों के उपचार के लिए पर्याप्त वेंटीलेटर और सपोर्टिंग संसाधनों की जरूरत है।
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सी-पैप मशीन लगने से मिली राहत
हाल में एसएनसीयू में दो सी-पैप मशीनें लगाई गई हैं। इससे सांस लेने में दिक्कत वाले नवजातों को राहत मिली है और ऐसे कई बच्चों को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। वार्ड में पीलिया से पीड़ित बच्चों के लिए फोटोथेरेपी मशीन, कम वजन के नवजातों के लिए दो बेड की केएमसी यूनिट और मां का दूध सुरक्षित रखने के लिए एलएमयू यूनिट भी उपलब्ध है।
जन्म के बाद न रोने वाले बच्चे अधिक
चिकित्सकों के अनुसार एसएनसीयू में जन्म के बाद न रोने वाले नवजात अधिक आते हैं। ऐसी स्थिति में परिजन चिंतित होकर बच्चों को अस्पताल लेकर पहुंचते हैं। इसके अलावा जन्म के समय कम वजन और खून में संक्रमण से पीड़ित नवजात भी भर्ती किए जाते हैं।
भेजी गई है डिमांड
गंभीर रूप से बीमार नवजातों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में सभी जरूरी संसाधन और दवाएं उपलब्ध हैं। दो वेंटीलेटर शुरू करने के लिए आवश्यक उपकरणों की डिमांड भेजी गई है। फिलहाल बच्चों की संख्या बढ़ने या स्थिति गंभीर होने पर राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है।
डॉ. पीएन यादव, सीएमएस