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Ambedkar Nagar News: जियाउद्दीन की मौत का सदमा नहीं सह पाए तीन परिजन
Sun, 03 Nov 2024 10:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sun, 03 Nov 2024 10:53 PM IST
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अश्विनी मिश्र
अंबेडकरनगर। पुलिस हिरासत में जियाउद्दीन की मौत का गहरा सदमा उनके परिवार को लगा। परिजनों के अनुसार सदमे के ही चलते डेढ़ वर्ष के भीतर पिता, बड़े पिता और दादी की मौत हो गई। एक के बाद एक चार मौत से पूरा परिवार टूट चुका है।
25 मार्च 2021 को आजमगढ़ के पवई निवासी युवक जियाउद्दीन की पुलिस हिरासत में हुई मौत ने पूरे परिवार में कोहराम मचा दिया। जियाउद्दीन घर पर ही रहकर लकड़ी से जुड़ा काम करते थे। पांच भाइयों में दूसरे नंबर के जियाउद्दीन पर ही संयुक्त परिवार की जिम्मेदारी थी, क्योंकि बड़ा भाई विदेश में रहकर गाड़ी चलाता है। जियाउद्दीन की मौत होते ही परिवार के सामने अचानक अंधेरा छा गया।
जियाउद्दीन से ठीक छोटे भाई शहाबुद्दीन बताते हैं कि भाई की मौत का गहरा सदमा उनके परिवार पर लगा। 90 वर्षीय दादी कुबरा खातून ने दुखी होकर खाना पीना ही छोड़ दिया। वे बस भइया को बुलाओ, हमरे लल्ला को बुलाओ करती रहीं। उन्हें बहुत समझाया गया पर वे रोती ही रहतीं अक्सर। इन्हीं सबके चलते उनका निधन हो गया। बड़े पिता 63 वर्षीय फिरोज भी सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सके। कुछ दिन बाद उन्होंने भी हम सबका साथ छोड़ दिया।
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पुत्र की मौत से दुखी पिता 59 वर्षीय अलाउद्दीन की भी डेढ़ वर्ष के अंदर मौत हो गई। शहाबुद्दीन कहते हैं कि यह कल्पना कर ही कोई भी इंसान सिहर उठेगा कि डेढ़ वर्ष के भीतर एक परिवार के चार लोगों का निधन हो गया। कहते हैं कि हमारा पूरा परिवार टूट गया है। बस भाई की हत्या कर देने वाले पुलिसकर्मियों को सजा मिलने का इंतजार है। मेरे भाई की हत्या पुलिसवालों ने की है। इसकी सजा उनको मिलनी ही चाहिए।
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अंबेडकरनगर। पुलिस हिरासत में जियाउद्दीन की मौत का गहरा सदमा उनके परिवार को लगा। परिजनों के अनुसार सदमे के ही चलते डेढ़ वर्ष के भीतर पिता, बड़े पिता और दादी की मौत हो गई। एक के बाद एक चार मौत से पूरा परिवार टूट चुका है।
25 मार्च 2021 को आजमगढ़ के पवई निवासी युवक जियाउद्दीन की पुलिस हिरासत में हुई मौत ने पूरे परिवार में कोहराम मचा दिया। जियाउद्दीन घर पर ही रहकर लकड़ी से जुड़ा काम करते थे। पांच भाइयों में दूसरे नंबर के जियाउद्दीन पर ही संयुक्त परिवार की जिम्मेदारी थी, क्योंकि बड़ा भाई विदेश में रहकर गाड़ी चलाता है। जियाउद्दीन की मौत होते ही परिवार के सामने अचानक अंधेरा छा गया।
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जियाउद्दीन से ठीक छोटे भाई शहाबुद्दीन बताते हैं कि भाई की मौत का गहरा सदमा उनके परिवार पर लगा। 90 वर्षीय दादी कुबरा खातून ने दुखी होकर खाना पीना ही छोड़ दिया। वे बस भइया को बुलाओ, हमरे लल्ला को बुलाओ करती रहीं। उन्हें बहुत समझाया गया पर वे रोती ही रहतीं अक्सर। इन्हीं सबके चलते उनका निधन हो गया। बड़े पिता 63 वर्षीय फिरोज भी सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सके। कुछ दिन बाद उन्होंने भी हम सबका साथ छोड़ दिया।
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पुत्र की मौत से दुखी पिता 59 वर्षीय अलाउद्दीन की भी डेढ़ वर्ष के अंदर मौत हो गई। शहाबुद्दीन कहते हैं कि यह कल्पना कर ही कोई भी इंसान सिहर उठेगा कि डेढ़ वर्ष के भीतर एक परिवार के चार लोगों का निधन हो गया। कहते हैं कि हमारा पूरा परिवार टूट गया है। बस भाई की हत्या कर देने वाले पुलिसकर्मियों को सजा मिलने का इंतजार है। मेरे भाई की हत्या पुलिसवालों ने की है। इसकी सजा उनको मिलनी ही चाहिए।