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Ambedkar Nagar News: हाईकोर्ट के स्टे के बाद भी नहीं हुई सचिव की बहाली
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आलापुर/अंबेडकरनगर। विकासखंड रामनगर में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी रामबली राम का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बावजूद अब तक उनकी बहाली नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि न्यायालय का आदेश जिलाधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी तक पहुंच चुका है, इसके बाद भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई लंबित है।
विकासखंड रामनगर की ग्राम पंचायत हिसामुद्दीनपुर पिपरा में पंचायत भवन निर्माण सहित विभिन्न कार्यों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए रामबली राम को डीपीआरओ ने 27 मार्च 2026 को निलंबित कर दिया गया था। साथ ही पूरे मामले की जांच भी शुरू कराई गई थी। निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए रामबली राम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ में हुई। याची पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि लगाए गए आरोप इतने गंभीर नहीं हैं कि तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल 2026 को निलंबन आदेश के प्रभाव पर अंतरिम रोक लगा दी और राज्य सरकार से जवाब तलब किया। अदालत ने विपक्षी पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह तथा याची पक्ष को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। उधर, हाईकोर्ट से स्टे मिलने के बाद भी बहाली न होने को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
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डीपीआरओ उपेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि डीएम के निर्देश पर निलंबन किया गया था। हाईकोर्ट के आदेश का आदेश पालन किया जाएगा।
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विकासखंड रामनगर की ग्राम पंचायत हिसामुद्दीनपुर पिपरा में पंचायत भवन निर्माण सहित विभिन्न कार्यों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए रामबली राम को डीपीआरओ ने 27 मार्च 2026 को निलंबित कर दिया गया था। साथ ही पूरे मामले की जांच भी शुरू कराई गई थी। निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए रामबली राम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ में हुई। याची पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि लगाए गए आरोप इतने गंभीर नहीं हैं कि तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
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दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल 2026 को निलंबन आदेश के प्रभाव पर अंतरिम रोक लगा दी और राज्य सरकार से जवाब तलब किया। अदालत ने विपक्षी पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह तथा याची पक्ष को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। उधर, हाईकोर्ट से स्टे मिलने के बाद भी बहाली न होने को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
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डीपीआरओ उपेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि डीएम के निर्देश पर निलंबन किया गया था। हाईकोर्ट के आदेश का आदेश पालन किया जाएगा।