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Ambedkar Nagar News: पुलिस डिजिटल अरेस्ट नहीं करती, थाने बुलाती है
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बीएनकेबी पीजी कॉलेज अकबरपुर में पुलिस पाठशाला में मौजूद छात्राएं व पुलिस अधिकारी। संवाद
अंबेडकरनगर। बीएनकेबी पीजी कॉलेज अकबरपुर में बुधवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से पुलिस की पाठशाला का आयोजन किया गया। सीओ सीटी नीतीश तिवारी ने छात्र-छात्राओं से कहा कि वे पुलिस से डरें नहीं, बल्कि पुलिस को अपना मित्र समझें। छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि अपनी परेशानियों को दबाएं नहीं। सड़क, गांव, मोहल्ले और काॅलोनियों में कोई भी परेशान कर रहा है तो परिवार में बताने के साथ ही महिला हेल्पलाइन नंबर 1090 व डायल 112 पर शिकायत करें।
सीओ ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहना कोई बुरी बात नहीं है, मगर अनजान लाइक को अपना समर्थन बिल्कुल न दें। साइबर ठगी के बारे में जागरूक करते हुए बताया कि पुलिस किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है, बल्कि पुलिस थाने पर बुलाती है। उन्होंने बताया कि फेसबुक पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार नहीं करना चाहिए, जब तक फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने वाले व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी हासिल न कर लें।
साइबर थाने के आरक्षी कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि ईमेल अटैचमेंट के जरिये किसी साफ्टवेयर को डाउनलोड न करें। क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड की जानकारी वेब ब्राउजर में जमा न करें। किसी भी प्रकार की ओटीपी भूलकर किसी के साथ शेयर न करें। साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर दें। इससे मदद मिल जाएगी। इंटरनेट पर साइबर बुलिंग की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। साइबर बुलिंग का मतलब कि इंटरनेट के माध्यम से किसी को धमकाना, प्रताड़ित करना, ब्लैकमेलिंग करना, पीछा करना, अश्लील सामग्री जैसे टेक्स्ट मैसेज, फोटो, ऑडियो, वीडियो आदि भेजना होता है। डिजिटल में इस तरह की घटनाएं रोजाना हो रहीं हैं। एआई की मदद से आपकी फोटो, आवाज और अन्य प्रक्रिया के जरिए साइबर अपराधी फंसा सकते हैं। इसलिए अपनी पर्सनल आईडी में प्राइवेसी लगाकर रखें।
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सवाल : कंप्यूटर या फोन साइबर जालसाज हैक न करे सकें इसके लिए क्या किया जाए। प्रिया गौड़,छात्रा
जवाब: साइबर अपराधी अक्सर आपके कंप्यूटर या फोन में मौजूद सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर जानकारी हासिल कर लेते हैं। इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है कि सॉफ्टवेयर, वेब ब्राउजर और ऑपरेटिंग सिस्टम को हमेशा अपडेट रखा जाए। पासवर्ड भी स्ट्रांग रखें।
सवाल : फिशिंग/विशिंग क्या है? इससे कैसे बचें। शीतल पांडेय, छात्रा
जवाब : फिशिंग वह प्रक्रिया है जिसमें साइबर अपराधी धोखे से ईमेल या संदेशों के जरिये आपकी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं, जबकि विशिंग में इसी उद्देश्य से धोखाधड़ी वाले फोन कॉल किए जाते हैं। सबसे अच्छा बचाव सतर्क रहना है।
सवाल : साइबर ठगी का शिकार होने पर क्या करें। अंतिमा साहू, छात्रा
साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 नंबर डायल करें और नेशनल साइबर रिपोर्टिंग पोर्टल शिकायत दर्ज करें। अपने बैंक को सूचित करके कार्ड / खाता ब्लॉक कराएं। इसके बाद स्थानीय पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराएं। फ्रॉड के 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट करने से पैसे वापस मिलने की संभावना सबसे अधिक होती है।
सवाल : स्कूल जाते समय कोई परेशान करें तो क्या करें। रूबी चौहान, छात्रा
जवाब: ऐसा होने पर तेज आवाज में शोर मचाएं। अपने पास हमेशा सेल्फ डिफेंस किट रखें। घबराएं नहीं, साहस के साथ सामना करें।
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अंजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें
गुड और बैड टच के बारे में जानकारी होना जरूरी है।
चुप्पी तोड़ें और बिना संकोच अभिभावकों व शिक्षकों को जानकारी दें।
अंजान व्यक्ति से निजी जानकारी साझा न करें।
सोशल मीडिया के सुरक्षा फीचर्स का उपयोग करें।
अभिभावकों से समस्याएं बताएं, वह भविष्य के लिए बेहतर सोचते हैं।
अकाउंट हैक होने पर तुरंत शिकायत करें।
परीक्षा या किसी भी विषय में तनाव न लें, लक्ष्य पर ध्यान रखें।
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सीओ ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहना कोई बुरी बात नहीं है, मगर अनजान लाइक को अपना समर्थन बिल्कुल न दें। साइबर ठगी के बारे में जागरूक करते हुए बताया कि पुलिस किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है, बल्कि पुलिस थाने पर बुलाती है। उन्होंने बताया कि फेसबुक पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार नहीं करना चाहिए, जब तक फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने वाले व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी हासिल न कर लें।
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साइबर थाने के आरक्षी कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि ईमेल अटैचमेंट के जरिये किसी साफ्टवेयर को डाउनलोड न करें। क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड की जानकारी वेब ब्राउजर में जमा न करें। किसी भी प्रकार की ओटीपी भूलकर किसी के साथ शेयर न करें। साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर दें। इससे मदद मिल जाएगी। इंटरनेट पर साइबर बुलिंग की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। साइबर बुलिंग का मतलब कि इंटरनेट के माध्यम से किसी को धमकाना, प्रताड़ित करना, ब्लैकमेलिंग करना, पीछा करना, अश्लील सामग्री जैसे टेक्स्ट मैसेज, फोटो, ऑडियो, वीडियो आदि भेजना होता है। डिजिटल में इस तरह की घटनाएं रोजाना हो रहीं हैं। एआई की मदद से आपकी फोटो, आवाज और अन्य प्रक्रिया के जरिए साइबर अपराधी फंसा सकते हैं। इसलिए अपनी पर्सनल आईडी में प्राइवेसी लगाकर रखें।
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सवाल : कंप्यूटर या फोन साइबर जालसाज हैक न करे सकें इसके लिए क्या किया जाए। प्रिया गौड़,छात्रा
जवाब: साइबर अपराधी अक्सर आपके कंप्यूटर या फोन में मौजूद सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर जानकारी हासिल कर लेते हैं। इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है कि सॉफ्टवेयर, वेब ब्राउजर और ऑपरेटिंग सिस्टम को हमेशा अपडेट रखा जाए। पासवर्ड भी स्ट्रांग रखें।
सवाल : फिशिंग/विशिंग क्या है? इससे कैसे बचें। शीतल पांडेय, छात्रा
जवाब : फिशिंग वह प्रक्रिया है जिसमें साइबर अपराधी धोखे से ईमेल या संदेशों के जरिये आपकी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं, जबकि विशिंग में इसी उद्देश्य से धोखाधड़ी वाले फोन कॉल किए जाते हैं। सबसे अच्छा बचाव सतर्क रहना है।
सवाल : साइबर ठगी का शिकार होने पर क्या करें। अंतिमा साहू, छात्रा
साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 नंबर डायल करें और नेशनल साइबर रिपोर्टिंग पोर्टल शिकायत दर्ज करें। अपने बैंक को सूचित करके कार्ड / खाता ब्लॉक कराएं। इसके बाद स्थानीय पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराएं। फ्रॉड के 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट करने से पैसे वापस मिलने की संभावना सबसे अधिक होती है।
सवाल : स्कूल जाते समय कोई परेशान करें तो क्या करें। रूबी चौहान, छात्रा
जवाब: ऐसा होने पर तेज आवाज में शोर मचाएं। अपने पास हमेशा सेल्फ डिफेंस किट रखें। घबराएं नहीं, साहस के साथ सामना करें।
अंजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें
गुड और बैड टच के बारे में जानकारी होना जरूरी है।
चुप्पी तोड़ें और बिना संकोच अभिभावकों व शिक्षकों को जानकारी दें।
अंजान व्यक्ति से निजी जानकारी साझा न करें।
सोशल मीडिया के सुरक्षा फीचर्स का उपयोग करें।
अभिभावकों से समस्याएं बताएं, वह भविष्य के लिए बेहतर सोचते हैं।
अकाउंट हैक होने पर तुरंत शिकायत करें।
परीक्षा या किसी भी विषय में तनाव न लें, लक्ष्य पर ध्यान रखें।