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Ambedkar Nagar News: आर्थिक तंगी और दर्द से परिवार भी कराहता रहा
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अंबेडकरनगर। जिस उम्र में बच्ची की दुनिया खेल-कूद, खिलौनों और परिवार की गोद तक सिमटी होती है, उस उम्र में छह साल की मासूम को ऐसा दर्द मिला, जिसने पूरे परिवार को भीतर तक तोड़ दिया। परिजनों के मुताबिक, दुष्कर्म की घटना के बाद से वह चार माह तक पीड़ा से जूझती रही। हालत यह थी कि दर्द के कारण चलना तो दूर, वह ठीक से बैठ भी नहीं पाती थी। उसके गुप्तांगों में घाव हो गए थे। लगातार इलाज और दवाएं चल रही थीं, लेकिन उसे राहत नहीं मिल पा रही थी। परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी, ऐसे में निजी अस्पताल में इलाज कराना उनके लिए संभव नहीं था।
मृतका के पिता पुणे में कबाड़ का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। 27 जून 2026 को जिस समय घटना हुई थी, उस समय मासूम के पिता रिश्तेदारी में गए हुए थे। घटना के बाद काफी दिनों तक वह यहां रहे लेकिन परिवार की बिगड़ती आर्थिक स्थिति देखते हुए उन्हें फिर लौटना पड़ा। मां बच्चों की देखभाल करती हैं। छह बहनों और तीन भाइयों में सबसे छोटी और लाडली बच्ची की तकलीफ केवल उसके शरीर तक सीमित नहीं थी। उसे असहाय होकर देखते परिवार का हर सदस्य भी इस दर्द को झेल रहा था।
सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच लगातार इलाज और दवाओं का खर्च उठाना परिवार के लिए चुनौती बना हुआ था। करीब छह दिन तक चले इलाज के बाद हालत में सुधार होने पर उसे छुट्टी दे दी गई, लेकिन उसकी पीड़ा खत्म नहीं हुई। परिजनों के मुताबिक, इलाज और दवाएं लगातार चलती रहीं, फिर भी वह दर्द से परेशान रहती थी। मां गांव में बच्चों के साथ रहती हैं। जिस बेटी को दर्द से उबारने के लिए परिजन लगातार कोशिश कर रहे थे, उसकी मौत के बाद घर में मातम पसरा है। घटना की सूचना मिलने के बाद पिता भी वापस आने के लिए रवाना हो चुके हैं। बड़ी बहन का कहना है कि उनके परिवार को अब तक शासन प्रशासन की ओर से इलाज के सिवा अन्य कोई मदद मुहैया नहीं कराई गई है।
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मृतका के पिता पुणे में कबाड़ का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। 27 जून 2026 को जिस समय घटना हुई थी, उस समय मासूम के पिता रिश्तेदारी में गए हुए थे। घटना के बाद काफी दिनों तक वह यहां रहे लेकिन परिवार की बिगड़ती आर्थिक स्थिति देखते हुए उन्हें फिर लौटना पड़ा। मां बच्चों की देखभाल करती हैं। छह बहनों और तीन भाइयों में सबसे छोटी और लाडली बच्ची की तकलीफ केवल उसके शरीर तक सीमित नहीं थी। उसे असहाय होकर देखते परिवार का हर सदस्य भी इस दर्द को झेल रहा था।
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सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच लगातार इलाज और दवाओं का खर्च उठाना परिवार के लिए चुनौती बना हुआ था। करीब छह दिन तक चले इलाज के बाद हालत में सुधार होने पर उसे छुट्टी दे दी गई, लेकिन उसकी पीड़ा खत्म नहीं हुई। परिजनों के मुताबिक, इलाज और दवाएं लगातार चलती रहीं, फिर भी वह दर्द से परेशान रहती थी। मां गांव में बच्चों के साथ रहती हैं। जिस बेटी को दर्द से उबारने के लिए परिजन लगातार कोशिश कर रहे थे, उसकी मौत के बाद घर में मातम पसरा है। घटना की सूचना मिलने के बाद पिता भी वापस आने के लिए रवाना हो चुके हैं। बड़ी बहन का कहना है कि उनके परिवार को अब तक शासन प्रशासन की ओर से इलाज के सिवा अन्य कोई मदद मुहैया नहीं कराई गई है।
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