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हसीनों से कह दो कहीं और बैठें, मेरा दिल चारपाई नहीं है
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अंबेडकरनगर। बीती शुक्रवार रात जहांगीरगंज स्थित नया बाजार में आल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। अध्यक्षता सैयद हसनैन मियां इलाहाबाद ने की, संचालन कुंवर नदीम ने किया। शायर जौहर कानपुरी ने शेर पढ़ा ‘हवेली झोपड़ी सब का मुक़द्दर फूट जाएगा, अगर ये साथ हिंदू-मुस्लिमों का छूट जाएगा। दुआ कीजिए हम में प्यार के रिश्ते रहें क़ायम, ये रिश्ते टूट जाएंगे तो भारत टूट जाएगा..’ सुनाया। सबीना अदीब कानपुरी ने कहा ‘जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नर्म अपना.. सुनाया। शायर हलचल टांडवी ने कहा ‘बच्चे अभी से इश्क़ लड़ाने में लगे हैं, बरबादियों का जश्न मनाने में लगे हैं..’ पर वाहवाही पाई।
फारूक दिलकश मऊ ने कहा ‘क्या तुमने पत्थर को पिघलते देखा है, हमने उनको ऑंखें मलते देखा हैं..’ सुनाया, चांदनी शबनम जलालपुरी ने ‘कितनी चाहत है मुझसे मेरे हमनशीं... रचना सुनाई। हास्य व्यंग के कवि बिहारी लाल अंबर इलाहाबाद ने हसीनों से कह दो कहीं और बैठें, मेरा दिल चारपाई नहीं है रचना पर तालियां पाई। फारूक दिलकश के नाते पाक से शुरू हुए समारोह में मुख्य अतिथि रहे टांडा के चिकित्सक डॉ. जहीर अहमद ने कहा कि मुशायरों से राष्ट्रीय एकता को बल मिलता है। आपसी रिश्तों की डोर मजबूत होती है। हिंदी और उर्दू एक दूसरे की पूरक है। एक के बिना दूसरी अधूरी है। इसे किसी महजब से नहीं जोड़ा जा सकता है।
मोहम्मद शफी नेशनल इंटर कॉलेज हंसवर के शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि उर्दू मोहब्बत एवं मिठास की भाषा है। इसकी मिठास ने हिंदुस्तान की गंगा जमुनी तहजीब में मिठास घोल रखी है। इश्तियाक अहमद ने कहा कि ऊर्दू में कौमी एकता की झलक मिलती है। नूरुलहुदा अंसारी ने मुशायरे के उद्देश्यों पर बात रखी। मुशायरे में अल्ताफ जिया मालेगांव, निकहत मुरादाबादी, शाह खालिद मऊ, काशिफ़ रजा फ़ैजाबादी, दानिश अकबरपुरी, शाद अकबरपुरी, अव्वल परवाना, मुजाहिदुल इस्लाम मऊ , दानिश कानपुरी ने रचनाओं से वाहवाही पाई। इससे पहले मुशायरे का उद्घाटन तारावती ने किया। मुशायरे के संयोजक कुमेल अशरफ सोनू, मास्टर वसी अहमद, मोहम्मद सलमान, मोहम्मद जीशान, मोहम्मद अरशद अंसारी, शकील अहमद, मोहम्मद तारिक मौजूद रहे।
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फारूक दिलकश मऊ ने कहा ‘क्या तुमने पत्थर को पिघलते देखा है, हमने उनको ऑंखें मलते देखा हैं..’ सुनाया, चांदनी शबनम जलालपुरी ने ‘कितनी चाहत है मुझसे मेरे हमनशीं... रचना सुनाई। हास्य व्यंग के कवि बिहारी लाल अंबर इलाहाबाद ने हसीनों से कह दो कहीं और बैठें, मेरा दिल चारपाई नहीं है रचना पर तालियां पाई। फारूक दिलकश के नाते पाक से शुरू हुए समारोह में मुख्य अतिथि रहे टांडा के चिकित्सक डॉ. जहीर अहमद ने कहा कि मुशायरों से राष्ट्रीय एकता को बल मिलता है। आपसी रिश्तों की डोर मजबूत होती है। हिंदी और उर्दू एक दूसरे की पूरक है। एक के बिना दूसरी अधूरी है। इसे किसी महजब से नहीं जोड़ा जा सकता है।
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मोहम्मद शफी नेशनल इंटर कॉलेज हंसवर के शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि उर्दू मोहब्बत एवं मिठास की भाषा है। इसकी मिठास ने हिंदुस्तान की गंगा जमुनी तहजीब में मिठास घोल रखी है। इश्तियाक अहमद ने कहा कि ऊर्दू में कौमी एकता की झलक मिलती है। नूरुलहुदा अंसारी ने मुशायरे के उद्देश्यों पर बात रखी। मुशायरे में अल्ताफ जिया मालेगांव, निकहत मुरादाबादी, शाह खालिद मऊ, काशिफ़ रजा फ़ैजाबादी, दानिश अकबरपुरी, शाद अकबरपुरी, अव्वल परवाना, मुजाहिदुल इस्लाम मऊ , दानिश कानपुरी ने रचनाओं से वाहवाही पाई। इससे पहले मुशायरे का उद्घाटन तारावती ने किया। मुशायरे के संयोजक कुमेल अशरफ सोनू, मास्टर वसी अहमद, मोहम्मद सलमान, मोहम्मद जीशान, मोहम्मद अरशद अंसारी, शकील अहमद, मोहम्मद तारिक मौजूद रहे।
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