{"_id":"629268514087b906cd4153c0","slug":"tehsil-s-responsible-also-laggy-in-the-use-of-cug-ambedkar-nagar-news-lko632696146","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीयूजी के प्रयोग में तहसील के जिम्मेदार भी फिसड्डी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीयूजी के प्रयोग में तहसील के जिम्मेदार भी फिसड्डी
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। सीएम योगी के सख्त निर्देश के बाद भी जिले की तहसीलों में तैनात अफसर भी सीयूजी नंबर के इस्तेमाल में पूरी मनमानी बरतते है। पुलिस व बिजली विभाग की तरह ही जिला प्रशासन से जुड़े तहसील के अफसर भी सीयूजी नंबरों का प्रयोग करने में पूरी तरह मनमानी बरतते हैं। इसका खुलासा पांच तहसीलों में कार्यरत प्रशासनिक अफसरों के रियलटी चेक में हुआ। इस दौरान कुछ अफसरों के सीयूजी फोन बंद मिले तो कई अफसरों के नंबरों पर सिर्फ फोन की घंटी ही घनघनाती मिली।
इनमें से दो एसडीएम व दो तहसीलदार ने घंटी होने के बावजूद फोन रिसीव नहीं किया और न ही बाद में मिस्ड कॉल पर बैक कॉल कर परेशानी पूछी गयी। कमोबेश ऐसा ही हाल नायब तहसीलदार स्तर के अफसरों का भी रहा। ऐसे में परेशान पीड़ितों व फरियादियों की परेशानी को त्वरित स्तर पर सुन कर निस्तारित किए जाने की मंशा पर सवाल उठते हैं। खासतौर पर अमन व चैन के साथ ही भूमि विवाद से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय की आस दम तोड़ती दिखती है।
सरकारी विभागों को आवंटित क्लोज्ड यूजर ग्रुप (सीयूजी) नंबरों के उपयोग में बरती जा रही मनमानी उजागर करने के लिए अमर उजाला द्वारा संचालित मुहिम के तहत शनिवार को तहसीलों में कार्यरत प्रशासनिक अफसरों की जिम्मेदारी को परखा गया। इस दौरान सीयूजी नंबरों के इस्तेमाल को लेकर तहसील प्रशासन के अधिकारी भी उदासीन व ढीले नजर आए। इस दौरान सभी तहसीलों में तैनात एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदार के सीयूजी नंबर पर अलग अलग कॉल की गयी। यह बात सही है कि इन अफसरों के पास आम लोग क म ही फोन करते हैं लेकिन पीड़ितों की परेशानी सुनने के लिए इन अफसरों को भी तत्काल सीयूजी नंबर पर सक्रिय रहने का निर्देश है। संवाद
विज्ञापन
कुछ मिले स्विच ऑफ, कई ने नहीं उठाया फोन
एसडीएम जलालपुर मोहनलाल गुप्त को 3:59 बजे उनके सीयूजी नंबर पर बात का प्रयास किया गया। पूरी घंटी बजती रही, लेकिन फोन नहीं उठा। 4:01 बजे आलापुर एसडीएम अभय कुमार पांडेय के सीयूजी पर घंटी जाने के बाद भी बात नहीं हो पाई। तहसीलदार अकबरपुर जेपी यादव को शाम 4:02 मिनट पर घंटी लगातार बजने के बाद भी बात नहीं हुई। तहसीलदार भीटी सुनील कुमार का फोन 4:03 पर आउट ऑफ नेटवर्क बताता रहा। नायब तहसीलदार अकबरपुर प्रदीप सिंह के सीयूजी पर 4:18 बजे घंटी होती रही, लेकिन रिसीव नहीं हुआ। यही हाल नायब तहसीलदार टांडा राहुल सिंह के सीयूजी पर 4:21 पर रहा। भीटी नायब तहसीलदार उमेशचंद्र यादव का सीयूजी 4:20 बजे स्विच ऑफ मिला। जबकि एसडीएम अकबरपुर पवन जायसवाल, भीटी एसडीएम सुनील कुमार, टांडा एसडीएम दीपक वर्मा, टांडा तहसीलदार वंशराज, जलालपुर तहसीलदार आलोक रंजन सिंह, आलापुर तहसीलदार बृजेश वर्मा तथा जलालपुर नायब तहसीलदार राजकपूर सीयूजी नंबर उठाने में पूरी तरह सजग भी मिले।
जिम्मेदारी से हो रहा काम
सभी तहसीलों में अफसर पूरी मुस्तैदी से जिम्मेदारी के साथ अपना कार्य कर रहे हैं। सभी को सीयूजी फोन नंबर पर पूरी तरह सक्रिय बने रहने का निर्देश है। ऐसे में किन परिस्थितियों में कुछ अफसरों का फोन स्विच ऑफ मिला अथवा फोन नहीं उठा इसकी जानकारी कर कार्रवाई तय होगी।
अशोक कुमार कनौजिया एडीएम
विज्ञापन
इनमें से दो एसडीएम व दो तहसीलदार ने घंटी होने के बावजूद फोन रिसीव नहीं किया और न ही बाद में मिस्ड कॉल पर बैक कॉल कर परेशानी पूछी गयी। कमोबेश ऐसा ही हाल नायब तहसीलदार स्तर के अफसरों का भी रहा। ऐसे में परेशान पीड़ितों व फरियादियों की परेशानी को त्वरित स्तर पर सुन कर निस्तारित किए जाने की मंशा पर सवाल उठते हैं। खासतौर पर अमन व चैन के साथ ही भूमि विवाद से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय की आस दम तोड़ती दिखती है।
विज्ञापन
सरकारी विभागों को आवंटित क्लोज्ड यूजर ग्रुप (सीयूजी) नंबरों के उपयोग में बरती जा रही मनमानी उजागर करने के लिए अमर उजाला द्वारा संचालित मुहिम के तहत शनिवार को तहसीलों में कार्यरत प्रशासनिक अफसरों की जिम्मेदारी को परखा गया। इस दौरान सीयूजी नंबरों के इस्तेमाल को लेकर तहसील प्रशासन के अधिकारी भी उदासीन व ढीले नजर आए। इस दौरान सभी तहसीलों में तैनात एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदार के सीयूजी नंबर पर अलग अलग कॉल की गयी। यह बात सही है कि इन अफसरों के पास आम लोग क म ही फोन करते हैं लेकिन पीड़ितों की परेशानी सुनने के लिए इन अफसरों को भी तत्काल सीयूजी नंबर पर सक्रिय रहने का निर्देश है। संवाद
विज्ञापन
कुछ मिले स्विच ऑफ, कई ने नहीं उठाया फोन
एसडीएम जलालपुर मोहनलाल गुप्त को 3:59 बजे उनके सीयूजी नंबर पर बात का प्रयास किया गया। पूरी घंटी बजती रही, लेकिन फोन नहीं उठा। 4:01 बजे आलापुर एसडीएम अभय कुमार पांडेय के सीयूजी पर घंटी जाने के बाद भी बात नहीं हो पाई। तहसीलदार अकबरपुर जेपी यादव को शाम 4:02 मिनट पर घंटी लगातार बजने के बाद भी बात नहीं हुई। तहसीलदार भीटी सुनील कुमार का फोन 4:03 पर आउट ऑफ नेटवर्क बताता रहा। नायब तहसीलदार अकबरपुर प्रदीप सिंह के सीयूजी पर 4:18 बजे घंटी होती रही, लेकिन रिसीव नहीं हुआ। यही हाल नायब तहसीलदार टांडा राहुल सिंह के सीयूजी पर 4:21 पर रहा। भीटी नायब तहसीलदार उमेशचंद्र यादव का सीयूजी 4:20 बजे स्विच ऑफ मिला। जबकि एसडीएम अकबरपुर पवन जायसवाल, भीटी एसडीएम सुनील कुमार, टांडा एसडीएम दीपक वर्मा, टांडा तहसीलदार वंशराज, जलालपुर तहसीलदार आलोक रंजन सिंह, आलापुर तहसीलदार बृजेश वर्मा तथा जलालपुर नायब तहसीलदार राजकपूर सीयूजी नंबर उठाने में पूरी तरह सजग भी मिले।
जिम्मेदारी से हो रहा काम
सभी तहसीलों में अफसर पूरी मुस्तैदी से जिम्मेदारी के साथ अपना कार्य कर रहे हैं। सभी को सीयूजी फोन नंबर पर पूरी तरह सक्रिय बने रहने का निर्देश है। ऐसे में किन परिस्थितियों में कुछ अफसरों का फोन स्विच ऑफ मिला अथवा फोन नहीं उठा इसकी जानकारी कर कार्रवाई तय होगी।
अशोक कुमार कनौजिया एडीएम