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स्टे ऑर्डर के बावजूद नहीं हो रहा वेतन भुगतान
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अंबेडकरनगर। कोर्ट के स्थगन आदेश का पालन कराने के नाम पर बेसिक शिक्षा विभाग में रिश्वतखोरी की लिखित शिकायत करने के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग मौन साधे है। शिक्षिका ने बीएसए को एक पखवारे पहले उनके कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी पर 25 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था, लेकिन पत्र रिसीव होने के बावजूद जांच प्रक्रिया शुरू करने की रस्म अदायगी तक नहीं की जा सकी। यह प्रकरण मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पीड़ित शिक्षिका का कहना है कि गत अगस्त माह से उसका वेतन रोका गया है। जिन अन्य शिक्षक शिक्षिकाओं को कोर्ट से स्थगन आदेश मिला था, उनमें सिर्फ उसे छोड़कर अन्य का भुगतान किया जा चुका है।
बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात शिक्षिका कंचन शर्मा ने विभागीय कर्मचारी पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाते हुए बीते दिनों लिखित शिकायत की। विभाग ने एक पखवारा बीतने के बाद भी इसका कोई संज्ञान नहीं लिया। कटेहरी शिक्षाक्षेत्र क्षेत्र के तिवारीपुर प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापिका कंचन शर्मा के अनुसार बीते दिनों उनका समायोजन बहोरिकपुर विद्यालय में अनियमित ढंग से कर दिया गया था। इसके विरुद्ध उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली, जहां से स्थगन आदेश मिल गया।
तिवारीपुर प्राथमिक विद्यालय से वे रिलीव भी नहीं हुई थीं, इसके बावजूद गत अगस्त माह से उनका वेतन रोक दिया गया है। हाईकोर्ट के आदेश को शिक्षिका ने बीएसए कार्यालय में बीते 16 अक्तूबर को रिसीव करा दिया। इसके बावजूद वेतन भुगतान नहीं हुआ। शिक्षिका ने बीएसए से 21 दिसंबर को की लिखित शिकायत में कहा कि उनके कार्यालय में तैनात संबद्ध शिक्षक सुधीर श्रीवास्तव ने भुगतान के एवज में 25 हजार रुपये की मांग की। यह भी कहा कि भुगतान करते ही दो दिन में काम हो जाएगा। लिखित शिकायत में शिक्षिका ने कार्रवाई की मांग करने के साथ ही वेतन भुगतान पर जोर दिया।
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भ्रष्टाचार से जुड़ी इस शिकायत पर कार्रवाई की बजाए विभाग चुप्पी साधकर बैठ गया। शिक्षिका ने बीएसए से व्यक्तिगत तौर पर मिलकर शिकायत की, तो भी एक पखवारा बीतने के बावजूद न तो भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जांच कमेटी गठित करने की रस्म अदायगी निभाने की जरूरत समझी गई और न ही शिक्षिका का भुगतान करने की जरूरत। इस बीच भ्रष्टाचार से जुड़ा यह मामला मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। शिक्षिका ने अमर उजाला को बताया कि उनके साथ कई अन्य शिक्षक शिक्षिकाओं ने भी हाईकोर्ट से स्टे आर्डर लिया था। उन सबका भुगतान विभाग ने कर दिया, जबकि आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न करने के लिए मेरा भुगतान नहीं किया जा रहा है। उधर, पूरे प्रकरण पर बीएसए अतुल कुमार सिंह ने बताया कि वह बाहर हैं। प्रकरण याद नहीं आ रहा है। वापस आने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।
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बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात शिक्षिका कंचन शर्मा ने विभागीय कर्मचारी पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाते हुए बीते दिनों लिखित शिकायत की। विभाग ने एक पखवारा बीतने के बाद भी इसका कोई संज्ञान नहीं लिया। कटेहरी शिक्षाक्षेत्र क्षेत्र के तिवारीपुर प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापिका कंचन शर्मा के अनुसार बीते दिनों उनका समायोजन बहोरिकपुर विद्यालय में अनियमित ढंग से कर दिया गया था। इसके विरुद्ध उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली, जहां से स्थगन आदेश मिल गया।
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तिवारीपुर प्राथमिक विद्यालय से वे रिलीव भी नहीं हुई थीं, इसके बावजूद गत अगस्त माह से उनका वेतन रोक दिया गया है। हाईकोर्ट के आदेश को शिक्षिका ने बीएसए कार्यालय में बीते 16 अक्तूबर को रिसीव करा दिया। इसके बावजूद वेतन भुगतान नहीं हुआ। शिक्षिका ने बीएसए से 21 दिसंबर को की लिखित शिकायत में कहा कि उनके कार्यालय में तैनात संबद्ध शिक्षक सुधीर श्रीवास्तव ने भुगतान के एवज में 25 हजार रुपये की मांग की। यह भी कहा कि भुगतान करते ही दो दिन में काम हो जाएगा। लिखित शिकायत में शिक्षिका ने कार्रवाई की मांग करने के साथ ही वेतन भुगतान पर जोर दिया।
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भ्रष्टाचार से जुड़ी इस शिकायत पर कार्रवाई की बजाए विभाग चुप्पी साधकर बैठ गया। शिक्षिका ने बीएसए से व्यक्तिगत तौर पर मिलकर शिकायत की, तो भी एक पखवारा बीतने के बावजूद न तो भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जांच कमेटी गठित करने की रस्म अदायगी निभाने की जरूरत समझी गई और न ही शिक्षिका का भुगतान करने की जरूरत। इस बीच भ्रष्टाचार से जुड़ा यह मामला मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। शिक्षिका ने अमर उजाला को बताया कि उनके साथ कई अन्य शिक्षक शिक्षिकाओं ने भी हाईकोर्ट से स्टे आर्डर लिया था। उन सबका भुगतान विभाग ने कर दिया, जबकि आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न करने के लिए मेरा भुगतान नहीं किया जा रहा है। उधर, पूरे प्रकरण पर बीएसए अतुल कुमार सिंह ने बताया कि वह बाहर हैं। प्रकरण याद नहीं आ रहा है। वापस आने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।