{"_id":"63ee7289e9c8fff38009fa14","slug":"shiv-baraat-will-take-place-on-mahashivaratri-ambedkar-nagar-news-c-13-1-90556-2023-02-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"अम्बेडकरनगर: महाशिवरात्रि पर निकलेगी शिव बरात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अम्बेडकरनगर: महाशिवरात्रि पर निकलेगी शिव बरात
Thu, 16 Feb 2023 11:44 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Thu, 16 Feb 2023 11:44 PM IST
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। टांडा में श्री झारखंड नाथ महादेव मंदिर झारखंडी छज्जापुर में महाशिवरात्रि पर शनिवार को भव्य शिव बरात निकलेगी। साथ ही मंदिर परिसर में मेला लगेगा। इसे देखते हुए मंदिर का रंगरोगन कर रंगबिरंगी झालरों से सजाया गया है। महाशिवरात्रि पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ेंगे।
सरयू नदी के किनारे स्थित श्री झारखंड नाथ महादेव मंदिर झारखंडी छज्जापुर नगर की प्राचीन धरोहरों में से एक है। इस पुराने एवं ऐतिहासिक मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 1905 में नगरवासियों के सहयोग से हुआ था। मंदिर में लगे शिलालेख से पता चलता है कि इसका निर्माण लाला नारायण दास अग्रवाल के वंशाजों ने कराया था। मंदिर भवन की नक्काशी भी उसकी प्राचीनता को बयां करती है।
किवदंती है कि पहले यहां घना जंगल था। इसी जगह पर काम करते समय मजदूरों का फावड़ा मिट्टी के नीचे दबे शिवलिंग से टकरा गया। इससे शिवलिंग से खून निकलने लगा। पूजन के बाद रक्तस्राव बंद हुआ। मान्यता है कि आज भी शिवलिंग पर फावड़े का निशान है।
विज्ञापन
मंदिर के व्यवस्थापक पूर्व सभासद आनंद अग्रवाल बताते हैं कि यहां महाशिवरात्रि पर सैकड़ों वर्ष से मेले का आयोजन होता आ रहा है। शिव बरात में भी नगरवासी पूरे उल्लास के साथ शामिल होते हैं। इसके लिए तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। हरितालिका जीत, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, कांवरियाें के स्वागत, हनुमान जयंती, देव दीपावली व अन्य मौके पर यहां भव्य आयोजन होते हैं।
विज्ञापन
सरयू नदी के किनारे स्थित श्री झारखंड नाथ महादेव मंदिर झारखंडी छज्जापुर नगर की प्राचीन धरोहरों में से एक है। इस पुराने एवं ऐतिहासिक मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 1905 में नगरवासियों के सहयोग से हुआ था। मंदिर में लगे शिलालेख से पता चलता है कि इसका निर्माण लाला नारायण दास अग्रवाल के वंशाजों ने कराया था। मंदिर भवन की नक्काशी भी उसकी प्राचीनता को बयां करती है।
विज्ञापन
किवदंती है कि पहले यहां घना जंगल था। इसी जगह पर काम करते समय मजदूरों का फावड़ा मिट्टी के नीचे दबे शिवलिंग से टकरा गया। इससे शिवलिंग से खून निकलने लगा। पूजन के बाद रक्तस्राव बंद हुआ। मान्यता है कि आज भी शिवलिंग पर फावड़े का निशान है।
विज्ञापन
मंदिर के व्यवस्थापक पूर्व सभासद आनंद अग्रवाल बताते हैं कि यहां महाशिवरात्रि पर सैकड़ों वर्ष से मेले का आयोजन होता आ रहा है। शिव बरात में भी नगरवासी पूरे उल्लास के साथ शामिल होते हैं। इसके लिए तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। हरितालिका जीत, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, कांवरियाें के स्वागत, हनुमान जयंती, देव दीपावली व अन्य मौके पर यहां भव्य आयोजन होते हैं।