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समस्याओं का पुलिंदा लेकर सिर्फ एडिय़ां रगडने को विवश हो रहे फरियादी
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अंबेडकरनगर। समस्याओं के समाधान को लेकर प्रशासनिक बेफिक्री के चलते कार्यालयों की चौखट नापने व एड़ियां रगड़ने वाले फरियादियों की सुनवाई नहीं हो रही है। संपूर्ण समाधान दिवसों से लेकर जनता दर्शन व आम दिनों में में साहब से मुखातिब होकर दरखास्त पर दरखास्त देने के बावजूद ऐसे तमाम फरियादी हैं, जिनके हाथ सिर्फ निराशा ही लग रही है।
ऐसा इसलिए क्योंकि साहब की रुचि रस्म अदायगी में ज्यादा दिखती है। राज्य सरकार भले ही प्रशासन को संवदेनशील बनाने व अधिकारियों की जवाबदेही तय करने में जुटी है पर अधिकारियों पर इसका खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। न तो समय से अफसरों को कार्यालयों में बैठने की सुध है और न ही जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ निपटाने की चिंता।
अमर उजाला टीम ने जिले में फैली प्रशासनिक मनमानी व बेफिक्री के बीच आम जनमानस को होने वाली मुश्किलों का जायजा लेने के लिए मंगलवार को आलापुर, जलालपुर व भीटी तहसील के संपूर्ण समाधान दिवसों का जायजा लिया। इन तहसीलों में ऐसे कई फरियादी मिले जो लंबे समय से अपनी समस्याओं के निपटारे के लिए दर दर की ठोकर खा रहे हैं।
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यह ऐसे फरियादी थे, जिन्होंने न्याय व हक के लिए न सिर्फ अपनी तहसील मुख्यालय में लगने वाले संपूर्ण समाधान दिवसों का कई बार चक्कर लगाया वरन जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगाकर डीएम व एडीएम से भी मुलाकात कर अपनी फरियाद की। हाकिमों से मिलने के बाद भी समस्याओं का निपटारा न होने से फरियादी काफी दुखी दिखे। उनका कहना था कि तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक के अधिकारियों का रवैया एक जैसा ही है। ऐसे में उनकी समस्याएं आखिर निपटे भी तो कैसे। जब तक अधिकारियों द्वारा समस्याओं के निपटारे को लेकर औपचारिकता बरतना बंद नहीं होगा तब तक हम सभी को न्याय मिल पाना ऐसे ही कठिन बना रहेगा। पेश है फरियादियों से बातचीत के अंश।
भीटी तहसील में मिले सिंगरा निवासी इंद्रप्रताप पाण्डेय ने बताया कि वे चकमार्ग की पैमाइश के लिए तीन बार जिलाधिकारी से व पांच बार एसडीएम से संपूर्ण समाधान दिवस में, एक बार डीएम से कलेक्ट्रेट जनता दर्शन में तथा सात बार खंड विकास अधिकारी से मुलाकात कर प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन अब तक समस्या जस की तस बनी हुई है। चक मार्ग पर खड़ंजा लगने की जरूरत है, लेकिन वह नहीं हो पा रहा है।
समरसिंहपुर बेलहवा निवासी राजनारायण गोस्वामी भीटी तहसील में मंगलवार को मिल गए। वे प्रार्थना पत्र लेकर भटक रहे थे। बताया कि डेढ़ वर्ष पहले आई आंधी में खंभा टूटने से आपूर्ति बाधित है। विद्युत विभाग के अधिशाषी अभियंता व विद्युत सबस्टेशन महरुआ के अधिकारियों को चार बार प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है। तीन बार संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र दिया गया। कागजों में तो मेरी समस्या का निस्तारण दिखा दिया गया है, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है।
जलालपुर तहसील में मिले गौरा कमाल निवासी विजय बहादुर चकरोड की पैमाइश के लिए परेशान दिखे। बताया कि वे अब तक आधा दर्जन बार संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। एक बार तो स्वयं डीएम भी आए हुए थे। लगातार प्रार्थना पत्र देेने के बाद पैमाइश नहीं हो पा रही। अधिकारियों द्वारा सिर्फ आश्वासन दिया जाता है, लेकिन निस्तारण नहीं हो पाता।
सोनगांव निवासी निर्मला भी मंगलवार को संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंची हुई थीं। बताया कि घर को आने वाला मार्ग कुछ लोगों ने अवरुद्ध कर रखा है। पंद्रह से अधिक बार डीएम, एडीएम, एसडीएम व तहसीलदार को प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है। अधिकार हर बार कोई न कोई भरोसा दिलाकर वापस कर देते हैं। समस्या का प्रभावी ढंग से निस्तारण करने की सुध अब तक नहीं ली गई।
आलापुर तहसील में हक की मांग को लेकर पहुंचे हुए थे गोहनार निवासी 70 वर्षीय वृद्ध अगर्दी। बताया कि उन्होंने मनरेगा योजना के तहत कुछ दिन पहले काम किया था। 73 दिन की मजदूरी नहीं मिल सकी है। अलग अलग अधिकारियों को संपूर्ण समाधान दिवसों में प्रार्थना पत्र दिया। अधिकारियों ने कहा कि दादा भुगतान हो जाएगा। इससे एक उम्मीद जगी थी, लेकिन भुगतान हो नहीं पाया। अधिकारियों ने लगता है मेरी उम्र व मेरी मुश्किल का ख्याल नहीं रखा।
आलापुर तहसील में ही मिले विश्वनाथ ने बताया कि चक मार्ग की पैमाइश कराने के लिए तमाम कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। अधिकारियों को सात बार संपूर्ण समाधान दिवस से लेकर उनके कार्यालयों में प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है, लेकिन अब तक निस्तारण करने की सुध नहीं है। ऐसे में शासन द्वारा संपूर्ण समाधान दिवसों को लेकर किए जा रहे सभी दावे तार तार हो रहे हैं।
संपूर्ण समाधान दिवसों से लेकर जनता दर्शन में आने वाले प्रार्थना पत्र के प्रभावी निस्तारण के प्रबंध हैं। इनकी नियमित तौर पर समीक्षा होती है। क्रास चेकिंग भी कराई जाती है। जो कुछ मामले लंबित रह जाते हैं, उनमें से ज्यादातर में कोई न कोई वैधानिक अड़चन होती है। इसके बाद भी यदि किसी स्तर पर लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई भी होती है।
अमरनाथ राय, एडीएम
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ऐसा इसलिए क्योंकि साहब की रुचि रस्म अदायगी में ज्यादा दिखती है। राज्य सरकार भले ही प्रशासन को संवदेनशील बनाने व अधिकारियों की जवाबदेही तय करने में जुटी है पर अधिकारियों पर इसका खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। न तो समय से अफसरों को कार्यालयों में बैठने की सुध है और न ही जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ निपटाने की चिंता।
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अमर उजाला टीम ने जिले में फैली प्रशासनिक मनमानी व बेफिक्री के बीच आम जनमानस को होने वाली मुश्किलों का जायजा लेने के लिए मंगलवार को आलापुर, जलालपुर व भीटी तहसील के संपूर्ण समाधान दिवसों का जायजा लिया। इन तहसीलों में ऐसे कई फरियादी मिले जो लंबे समय से अपनी समस्याओं के निपटारे के लिए दर दर की ठोकर खा रहे हैं।
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यह ऐसे फरियादी थे, जिन्होंने न्याय व हक के लिए न सिर्फ अपनी तहसील मुख्यालय में लगने वाले संपूर्ण समाधान दिवसों का कई बार चक्कर लगाया वरन जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगाकर डीएम व एडीएम से भी मुलाकात कर अपनी फरियाद की। हाकिमों से मिलने के बाद भी समस्याओं का निपटारा न होने से फरियादी काफी दुखी दिखे। उनका कहना था कि तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक के अधिकारियों का रवैया एक जैसा ही है। ऐसे में उनकी समस्याएं आखिर निपटे भी तो कैसे। जब तक अधिकारियों द्वारा समस्याओं के निपटारे को लेकर औपचारिकता बरतना बंद नहीं होगा तब तक हम सभी को न्याय मिल पाना ऐसे ही कठिन बना रहेगा। पेश है फरियादियों से बातचीत के अंश।
भीटी तहसील में मिले सिंगरा निवासी इंद्रप्रताप पाण्डेय ने बताया कि वे चकमार्ग की पैमाइश के लिए तीन बार जिलाधिकारी से व पांच बार एसडीएम से संपूर्ण समाधान दिवस में, एक बार डीएम से कलेक्ट्रेट जनता दर्शन में तथा सात बार खंड विकास अधिकारी से मुलाकात कर प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन अब तक समस्या जस की तस बनी हुई है। चक मार्ग पर खड़ंजा लगने की जरूरत है, लेकिन वह नहीं हो पा रहा है।
समरसिंहपुर बेलहवा निवासी राजनारायण गोस्वामी भीटी तहसील में मंगलवार को मिल गए। वे प्रार्थना पत्र लेकर भटक रहे थे। बताया कि डेढ़ वर्ष पहले आई आंधी में खंभा टूटने से आपूर्ति बाधित है। विद्युत विभाग के अधिशाषी अभियंता व विद्युत सबस्टेशन महरुआ के अधिकारियों को चार बार प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है। तीन बार संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र दिया गया। कागजों में तो मेरी समस्या का निस्तारण दिखा दिया गया है, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है।
जलालपुर तहसील में मिले गौरा कमाल निवासी विजय बहादुर चकरोड की पैमाइश के लिए परेशान दिखे। बताया कि वे अब तक आधा दर्जन बार संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। एक बार तो स्वयं डीएम भी आए हुए थे। लगातार प्रार्थना पत्र देेने के बाद पैमाइश नहीं हो पा रही। अधिकारियों द्वारा सिर्फ आश्वासन दिया जाता है, लेकिन निस्तारण नहीं हो पाता।
सोनगांव निवासी निर्मला भी मंगलवार को संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंची हुई थीं। बताया कि घर को आने वाला मार्ग कुछ लोगों ने अवरुद्ध कर रखा है। पंद्रह से अधिक बार डीएम, एडीएम, एसडीएम व तहसीलदार को प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है। अधिकार हर बार कोई न कोई भरोसा दिलाकर वापस कर देते हैं। समस्या का प्रभावी ढंग से निस्तारण करने की सुध अब तक नहीं ली गई।
आलापुर तहसील में हक की मांग को लेकर पहुंचे हुए थे गोहनार निवासी 70 वर्षीय वृद्ध अगर्दी। बताया कि उन्होंने मनरेगा योजना के तहत कुछ दिन पहले काम किया था। 73 दिन की मजदूरी नहीं मिल सकी है। अलग अलग अधिकारियों को संपूर्ण समाधान दिवसों में प्रार्थना पत्र दिया। अधिकारियों ने कहा कि दादा भुगतान हो जाएगा। इससे एक उम्मीद जगी थी, लेकिन भुगतान हो नहीं पाया। अधिकारियों ने लगता है मेरी उम्र व मेरी मुश्किल का ख्याल नहीं रखा।
आलापुर तहसील में ही मिले विश्वनाथ ने बताया कि चक मार्ग की पैमाइश कराने के लिए तमाम कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। अधिकारियों को सात बार संपूर्ण समाधान दिवस से लेकर उनके कार्यालयों में प्रार्थना पत्र दिया जा चुका है, लेकिन अब तक निस्तारण करने की सुध नहीं है। ऐसे में शासन द्वारा संपूर्ण समाधान दिवसों को लेकर किए जा रहे सभी दावे तार तार हो रहे हैं।
संपूर्ण समाधान दिवसों से लेकर जनता दर्शन में आने वाले प्रार्थना पत्र के प्रभावी निस्तारण के प्रबंध हैं। इनकी नियमित तौर पर समीक्षा होती है। क्रास चेकिंग भी कराई जाती है। जो कुछ मामले लंबित रह जाते हैं, उनमें से ज्यादातर में कोई न कोई वैधानिक अड़चन होती है। इसके बाद भी यदि किसी स्तर पर लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई भी होती है।
अमरनाथ राय, एडीएम