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Ambedkar Nagar News: कर्बला के शहीदों को याद कर गूंज उठे नौहे, अजादारों की भर आई आंखें
Tue, 19 Aug 2025 11:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 19 Aug 2025 11:47 PM IST
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जलालपुर (अंबेडकरनगर)। कस्बा मालीपुर स्थित रसूलपुर बाकरगंज में मंगलवार सुबह पांच बजे अंजुमन इमामिया के तत्वावधान में जुलूस-ए-अमारी का 28वां वार्षिक आयोजन बड़े अदब और एहतराम के साथ संपन्न हुआ। इस जुलूस की अगुवाई जुमन ने की जिसमें नगर व आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में अजादार शामिल हुए।
जुलूस की शुरुआत मौलाना सैयद अली मंसब रिजवी की मजलिस से हुई। उन्होंने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत और कर्बला की वीरगाथा को याद करते हुए कहा कि हुसैनियत का पैगाम है जुल्म के खिलाफ आवाज और अहद को निभाना। उन्होंने हजरत सकीना की शाम (सीरिया) के कैदखाने में हुई दर्दनाक शहादत और अहले हरम की पहली बार कर्बला वापसी का जिक्र किया, तो माहौल गमगीन हो गया और अजादार सिसक उठे।
जुलूस में ऊंटों पर सजीं अमारियां, बनी हाशिम के शबीह व ताबूत, जुलजनाह और अलम की जियारत कराई गई। जुलूस की निकाबत मौलाना सैयद शारिब अब्बास ने की, जबकि तकरीरों के माध्यम से कर्बला की रूदाद बयान करने वालों में मौलाना सैयद हैदर मेंहदी (बस्ती), मौलाना सैयद नूरुल हसन, मौलाना सैयद गालिब अब्बास रिजवी और मौलाना शौजब रजा प्रमुख रहे। इस दौरान जायर हुसैन मख्खू, नजर अब्बास, इंजीनियर रजी अब्बास, मोहम्मद कासिम, कायम अब्बास, रईस, अहमद, मोहम्मद अब्बास, एहतेशाम हुसैन, जहीर हैदर सहित कई अन्य लोगों का सराहनीय सहयोग रहा।
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जुलूस की शुरुआत मौलाना सैयद अली मंसब रिजवी की मजलिस से हुई। उन्होंने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत और कर्बला की वीरगाथा को याद करते हुए कहा कि हुसैनियत का पैगाम है जुल्म के खिलाफ आवाज और अहद को निभाना। उन्होंने हजरत सकीना की शाम (सीरिया) के कैदखाने में हुई दर्दनाक शहादत और अहले हरम की पहली बार कर्बला वापसी का जिक्र किया, तो माहौल गमगीन हो गया और अजादार सिसक उठे।
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जुलूस में ऊंटों पर सजीं अमारियां, बनी हाशिम के शबीह व ताबूत, जुलजनाह और अलम की जियारत कराई गई। जुलूस की निकाबत मौलाना सैयद शारिब अब्बास ने की, जबकि तकरीरों के माध्यम से कर्बला की रूदाद बयान करने वालों में मौलाना सैयद हैदर मेंहदी (बस्ती), मौलाना सैयद नूरुल हसन, मौलाना सैयद गालिब अब्बास रिजवी और मौलाना शौजब रजा प्रमुख रहे। इस दौरान जायर हुसैन मख्खू, नजर अब्बास, इंजीनियर रजी अब्बास, मोहम्मद कासिम, कायम अब्बास, रईस, अहमद, मोहम्मद अब्बास, एहतेशाम हुसैन, जहीर हैदर सहित कई अन्य लोगों का सराहनीय सहयोग रहा।
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