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दो दशक पुराना रपटा पुल ढहने से बढ़ी आवागमन में मुश्किल
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अंबेडकरनगर के आलापुर के आराजी देवारा में टूटा रपटा पुल
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। आलापुर तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र आराजी देवारा गांव में बना लगभग 20 वर्ष पुराना रपटा पुल छह दिन पहले ढह गया। पुल ढह जाने से ग्रामीणों के समक्ष अचानक आवागमन की मुश्किल खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि आम जनता के सहयोग से यह पुल बना था। पुल के टूट जाने से आवागमन दुरूह हो गया है। इससे करीब 2 हजार की आबादी को खासी मुश्किल होगी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब पुल का निर्माण कराए जाने की मांग की है।
करीब दो दशक पूर्व बाढ़ प्रभावित क्षेत्र आराजी देवारा में तत्कालीन ग्राम प्रधान व जन सहयोग से करिया लोनिया मजरे के पास रपटा पुल का निर्माण किया गया था। इस पुल से करीब आधा दर्जन मजरों के ग्रामीण प्रतिदिन आवागमन करते आ रहे हैं। इससे ग्रामीणों को सुचारु आवागमन का लाभ मिल रहा था। इससे करीब दो हजार की आबादी प्रतिदिन आवागमन करती थी। छह दिन पहले रात में अचानक पुल दो पिलर के बीच ढह गया। इससे ग्रामीणों को आवागमन में मुश्किल हो रही है। नौजवान भारत सभा संगठन के मित्रसेन ने बताया कि पुल काफी दिनों से जर्जर हो चुका था। पुल के पुनर्निर्माण के लिए कई बार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से मांग की गई, लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया। गनीमत रही कि पुल टूटने की घटना रात के समय हुई। यदि दिन में होता तो कोई अप्रिय घटना भी हो सकती थी।
गांव निवासी नंदलाल, राजमणि, हरिराम मांधाता, विशुन दयाल, लालमती, अंतदीप व भीम का कहना है कि पुल टूट जाने से आवागमन में मुश्किल हो रही है। कहा कि अभी तो किसी तरह आवागमन हो जा रहा है। परन्तु बाढ़ आने पर ग्रामीणों को इसी पुल से आवागमन करना मात्र एक सहारा होता है। ऐसे में प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उधर एसडीएम भरतलाल सरोज ने कहा कि रपटा पुल गिरने जैसी कोई सूचना अभी नहीं मिली है। यदि ऐसा हुआ होगा तो ग्रामीणों को सुचारु आवागमन की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।
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करीब दो दशक पूर्व बाढ़ प्रभावित क्षेत्र आराजी देवारा में तत्कालीन ग्राम प्रधान व जन सहयोग से करिया लोनिया मजरे के पास रपटा पुल का निर्माण किया गया था। इस पुल से करीब आधा दर्जन मजरों के ग्रामीण प्रतिदिन आवागमन करते आ रहे हैं। इससे ग्रामीणों को सुचारु आवागमन का लाभ मिल रहा था। इससे करीब दो हजार की आबादी प्रतिदिन आवागमन करती थी। छह दिन पहले रात में अचानक पुल दो पिलर के बीच ढह गया। इससे ग्रामीणों को आवागमन में मुश्किल हो रही है। नौजवान भारत सभा संगठन के मित्रसेन ने बताया कि पुल काफी दिनों से जर्जर हो चुका था। पुल के पुनर्निर्माण के लिए कई बार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से मांग की गई, लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया। गनीमत रही कि पुल टूटने की घटना रात के समय हुई। यदि दिन में होता तो कोई अप्रिय घटना भी हो सकती थी।
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गांव निवासी नंदलाल, राजमणि, हरिराम मांधाता, विशुन दयाल, लालमती, अंतदीप व भीम का कहना है कि पुल टूट जाने से आवागमन में मुश्किल हो रही है। कहा कि अभी तो किसी तरह आवागमन हो जा रहा है। परन्तु बाढ़ आने पर ग्रामीणों को इसी पुल से आवागमन करना मात्र एक सहारा होता है। ऐसे में प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उधर एसडीएम भरतलाल सरोज ने कहा कि रपटा पुल गिरने जैसी कोई सूचना अभी नहीं मिली है। यदि ऐसा हुआ होगा तो ग्रामीणों को सुचारु आवागमन की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।
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