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Ambedkar Nagar News: हाथों के हुनर से पुष्पा बनी आत्मनिर्भर, दूसरों को भी दे रही रोजगार
Wed, 26 Nov 2025 12:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Wed, 26 Nov 2025 12:48 AM IST
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पुष्पा।
अंबेडकरनगर। टांडा कोलुवा मुकुंदपुर गांव की रहने वाली पुष्पा ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से तरक्की की नई कहानी गढ़ी है। वर्ष 2022 में पुष्पा ने सीता स्वयं सहायता समूह के जरिये दस हजार रुपये का ऋण लेकर कपड़े खरीदे और अपने हाथों से हुनर कढ़ाई का हुनर उकेरना शुरू किया। धीरे-धीरे उनका समूह बेहतर काम करने लगा। इसके बाद इन्हें एक लाख दस हजार रुपये की मदद मिशन की ओर से मिली।
पुष्पा ने घर के एक कमरे में गांव की अन्य महिलाओं के साथ कुर्ती, लेगिंग, सूट व साड़ी पर कढ़ाई का काम कर रही हैं। इनके कपड़ों को पहले तो स्थानीय स्तर पर खूब पहचान मिली। अब इनकी पहुंच शहर के अन्य बाजारों में हो गई है। प्रतिदिन टांडा, अकबरपुर की शहजादपुर बाजारों में कढ़ाई वाले कपड़े आपूर्ति किए जाते हैं। इससे पुष्पा को 10 से 15 हजार रुपये की आय हो जाती है, वहीं गांव की 10 से 12 महिलाओं को भी रोजगार मुहैया कराया है, जिससे उनके दैनिक खर्चों की पूर्ति हो जाती है।
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विभाग से ब्रांडिंग में मिलती है मदद
पुष्पा कक्षा आठ पास है, लेकिन अपने हुनर से परिवार का सहारा बनी हैं, इनके पति गंगाराम भी इनके सामानों की बिक्री बाजार की दुकानों पर करते हैं। पुष्पा ने बताया कि उन्होंने जब इस काम को शुरू किया था तो कोई सहयोग नहीं मिल रहा था। अब विभाग की ओर सेे भी स्टाल मुहैया कराए जाते हैं। इससे उनके तैयार कपड़ों की ब्रांडिंग भी हो जाती है।
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पुष्पा ने घर के एक कमरे में गांव की अन्य महिलाओं के साथ कुर्ती, लेगिंग, सूट व साड़ी पर कढ़ाई का काम कर रही हैं। इनके कपड़ों को पहले तो स्थानीय स्तर पर खूब पहचान मिली। अब इनकी पहुंच शहर के अन्य बाजारों में हो गई है। प्रतिदिन टांडा, अकबरपुर की शहजादपुर बाजारों में कढ़ाई वाले कपड़े आपूर्ति किए जाते हैं। इससे पुष्पा को 10 से 15 हजार रुपये की आय हो जाती है, वहीं गांव की 10 से 12 महिलाओं को भी रोजगार मुहैया कराया है, जिससे उनके दैनिक खर्चों की पूर्ति हो जाती है।
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विभाग से ब्रांडिंग में मिलती है मदद
पुष्पा कक्षा आठ पास है, लेकिन अपने हुनर से परिवार का सहारा बनी हैं, इनके पति गंगाराम भी इनके सामानों की बिक्री बाजार की दुकानों पर करते हैं। पुष्पा ने बताया कि उन्होंने जब इस काम को शुरू किया था तो कोई सहयोग नहीं मिल रहा था। अब विभाग की ओर सेे भी स्टाल मुहैया कराए जाते हैं। इससे उनके तैयार कपड़ों की ब्रांडिंग भी हो जाती है।
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