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Ambedkar Nagar News: कद्दू की खेती ने बदल दी किसान राजेंद्र की किस्मत
Fri, 17 Jan 2025 10:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Fri, 17 Jan 2025 10:46 PM IST
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खेत में कद्दू की फसल दिखाते किसान राजेंद्र।
भीटी (अंबेडकरनगर)। तहसील क्षेत्र के छोटे से गांव मदारभारी के रहने वाले किसान राजेंद्र सिंह का परंपरागत खेती से मोहभंग हो गया। उन्होंने इससे किनारा कर सब्जी की खेती में अपनी किस्मत आजमाई। सबसे पहले उन्होंने कद्दू बोया। राजेंद्र का प्रयास सफल रहा। उन्होंने कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाया। वह कद्दू के साथ बोड़ा और खीरा की भी खेती कर रहे हैं। अब उनसे सीख लेकर दूसरे किसान भी सब्जी उत्पादन में जुट गए हैं।
प्रगतिशील किसान राजेंद्र ने पहले वह गन्ना, धान, गेहूं सहित सभी पारंपरिक खेती कर रहे थे। इसमें उन्हें लागत के अलावा कोई ज्यादा मुनाफा नहीं मिल रहा था। इसी बात को लेकर उनके मन में कुछ अलग करने की इच्छा जागृत हुई। साल 2021 में पहले दो एकड़ में कद्दू की खेती शुरू की। इस खेती में उन्हें उम्मीद से कई गुना बेहतर परिणाम मिले। जिसके बाद राजेंद्र ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2022 में कद्दू के साथ खीरा और बोड़ा की खेती शुरू की। मौजूदा समय में उन्होंने साढ़े सात एकड़ में कद्दू, तीन एकड़ में बोड़ा व एक एकड़ में खीरा की फसल बो रखी है।
अन्य जिलों की मंडियों तक है धमक
किसान राजेंद्र के कद्दू की धमक जिले के अलावा प्रदेश के अन्य जनपदों बनारस, गोरखपुर, प्रयागराज, बनारस की मंडियों तक में है। राजेंद्र बताते हैं कि गेहूं, धान की फसल छोड़कर जब कद्दू की फसल करना शुरू किया तो मन में था कि कहीं उन्हें नुकसान न उठाना पड़े। हालांकि मन में ठान लिया था कि चाहे नुकसान हो जाए, लेकिन अब कद्दू की फसल की बोआई करके ही रहेंगे। उनकी मेहनत का परिणाम रहा कि पहली बार में ही फसल अच्छी रही और उनकी किस्मत चमक गई। राजेंद्र कहते हैं कि उनकी देखादेखी क्षेत्र अन्य किसान भी कद्दू की फसल करके अपनी किस्मत चमका रहे हैं।
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प्रगतिशील किसान राजेंद्र ने पहले वह गन्ना, धान, गेहूं सहित सभी पारंपरिक खेती कर रहे थे। इसमें उन्हें लागत के अलावा कोई ज्यादा मुनाफा नहीं मिल रहा था। इसी बात को लेकर उनके मन में कुछ अलग करने की इच्छा जागृत हुई। साल 2021 में पहले दो एकड़ में कद्दू की खेती शुरू की। इस खेती में उन्हें उम्मीद से कई गुना बेहतर परिणाम मिले। जिसके बाद राजेंद्र ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2022 में कद्दू के साथ खीरा और बोड़ा की खेती शुरू की। मौजूदा समय में उन्होंने साढ़े सात एकड़ में कद्दू, तीन एकड़ में बोड़ा व एक एकड़ में खीरा की फसल बो रखी है।
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अन्य जिलों की मंडियों तक है धमक
किसान राजेंद्र के कद्दू की धमक जिले के अलावा प्रदेश के अन्य जनपदों बनारस, गोरखपुर, प्रयागराज, बनारस की मंडियों तक में है। राजेंद्र बताते हैं कि गेहूं, धान की फसल छोड़कर जब कद्दू की फसल करना शुरू किया तो मन में था कि कहीं उन्हें नुकसान न उठाना पड़े। हालांकि मन में ठान लिया था कि चाहे नुकसान हो जाए, लेकिन अब कद्दू की फसल की बोआई करके ही रहेंगे। उनकी मेहनत का परिणाम रहा कि पहली बार में ही फसल अच्छी रही और उनकी किस्मत चमक गई। राजेंद्र कहते हैं कि उनकी देखादेखी क्षेत्र अन्य किसान भी कद्दू की फसल करके अपनी किस्मत चमका रहे हैं।
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