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विवाह पंजीकरण को लेकर लोगों में नहीं दिखती रुचि
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Tue, 13 Jun 2017 11:30 PM IST
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शादी
- फोटो : अमर उजाला
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विवाह पंजीकरण को लेकर जिले में किसी प्रकार की रुचि नहीं है। प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ हजार विवाह जिले में होते हैं, लेकिन इसमें से बमुश्किल 30 लोग ही विवाह पंजीकरण कराते हैं। वर्ष 2016 से अब तक अनुमानत: 1200 विवाह हुए। इनमें से मात्र 37 का ही पंजीकरण हुआ है।
इसका मुख्य कारण पंजीकरण को लेकर संबंधित विभाग द्वारा किसी प्रकार का जागरूकता अभियान न चलाया जाना है। अब जबकि शासन के निर्देश पर महिला कल्याण विभाग द्वारा पंजीकरण को लेकर नियमावली तैयार की जा रही है। ऐसा होने पर इसमें कुछ तेजी आ सकी है।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने जा रही है। इसके लिए महिला कल्याण विभाग द्वारा नियमावली तैयार कराई जा रही है। दरअसल विवाह पंजीकरण पर पूर्व में शासन द्वारा जोर तो दिया जा रहा था, लेकिन इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही थी।
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अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विवाह पंजीकरण को लेकर जिले में किसी प्रकार का अभियान नहीं चल सका है। न ही लोगों को विवाह पंजीकरण से होने वाले लाभ के बारे में ही बताया जाता है। जानकारी के अभाव में भी ज्यादातर लोग रजिस्ट्री ऑफिस तक नहीं पहुंचते। इसके चलते भी पंजीकरण में तेजी नहीं आ रही है।
पंजीकरण में लोगों को कार्यालय तक का चक्कर न लगाना पड़े, इसके लिए गत लगभग पांच माह से आनलाइन पंजीकरण कराए जाने की भी सुविधा दी गई। इसके बावजूद पंजीकरण कराने का कार्य गति नहीं पकड़ पा रहा।
पंजीकरण को लेकर जिले में किस प्रकार की जागरूकता है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रतिवर्ष लगभग 2 हजार विवाह होते हैं। इसमें बमुश्किल 100 विवाह का ही पंजीकरण होता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 से अब तक जिले में लगभग तीन हजार विवाह हुए हैं। इसमें से 37 का ही पंजीकरण हुआ है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विवाह पंजीकरण को लेकर जिले में किस प्रकार का उदासीनता का माहौल है।
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इसका मुख्य कारण पंजीकरण को लेकर संबंधित विभाग द्वारा किसी प्रकार का जागरूकता अभियान न चलाया जाना है। अब जबकि शासन के निर्देश पर महिला कल्याण विभाग द्वारा पंजीकरण को लेकर नियमावली तैयार की जा रही है। ऐसा होने पर इसमें कुछ तेजी आ सकी है।
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गौरतलब है कि प्रदेश सरकार विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने जा रही है। इसके लिए महिला कल्याण विभाग द्वारा नियमावली तैयार कराई जा रही है। दरअसल विवाह पंजीकरण पर पूर्व में शासन द्वारा जोर तो दिया जा रहा था, लेकिन इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही थी।
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अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विवाह पंजीकरण को लेकर जिले में किसी प्रकार का अभियान नहीं चल सका है। न ही लोगों को विवाह पंजीकरण से होने वाले लाभ के बारे में ही बताया जाता है। जानकारी के अभाव में भी ज्यादातर लोग रजिस्ट्री ऑफिस तक नहीं पहुंचते। इसके चलते भी पंजीकरण में तेजी नहीं आ रही है।
पंजीकरण में लोगों को कार्यालय तक का चक्कर न लगाना पड़े, इसके लिए गत लगभग पांच माह से आनलाइन पंजीकरण कराए जाने की भी सुविधा दी गई। इसके बावजूद पंजीकरण कराने का कार्य गति नहीं पकड़ पा रहा।
पंजीकरण को लेकर जिले में किस प्रकार की जागरूकता है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रतिवर्ष लगभग 2 हजार विवाह होते हैं। इसमें बमुश्किल 100 विवाह का ही पंजीकरण होता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 से अब तक जिले में लगभग तीन हजार विवाह हुए हैं। इसमें से 37 का ही पंजीकरण हुआ है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विवाह पंजीकरण को लेकर जिले में किस प्रकार का उदासीनता का माहौल है।