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Ambedkar Nagar News: शिक्षक का वेतन अटकाने पर एसबीआई पर हर्जाना
Mon, 05 Oct 2026 11:03 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Mon, 05 Oct 2026 11:03 PM IST
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अंबेडकरनगर। फरवरी 2017 का वेतन शिक्षक के खाते में नहीं पहुंचाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को सेवा में कमी का दोषी माना है। आयोग के अध्यक्ष दयाराम और सदस्य किरन ने बैंक को 40,009 रुपये की मूल रकम पर आठ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने के साथ 15 हजार रुपये अतिरिक्त हर्जाना देने का आदेश दिया है।
इसके अलावा मानसिक व आर्थिक क्षति के 10 हजार और वाद व्यय के पांच हजार रुपये भी 45 दिन के भीतर अदा करने होंगे। आयोग ने बीएसए के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी की है। महमूदपुर सेमरा निवासी बृजेश कुमार वर्मा कटेहरी के उच्च प्राथमिक विद्यालय आतडीह में सहायक अध्यापक हैं।
उनका वेतन खाता बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक की केदारनगर शाखा में है। फरवरी 2017 में कार्य करने के बावजूद उन्हें वेतन नहीं मिला। उन्होंने अधिकारियों और बैंक से लगातार शिकायत की। बाद में 12 दिसंबर 2017 को कानूनी नोटिस भी भेजा। मामले में वित्त एवं लेखाधिकारी ने बताया कि 31 मार्च 2017 को शिक्षकों के वेतन के लिए 9,84,61,816 रुपये नेफ्ट के माध्यम से भेजे गए थे।
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इसमें बृजेश कुमार के 40,009 रुपये भी शामिल थे, लेकिन रकम उनके खाते में नहीं पहुंची। एसबीआई के 14 दिसंबर 2017 के पत्र से पता चला कि गलत आईएफएससी कोड के कारण रकम बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक के रायबरेली स्थित मुख्यालय पहुंच गई थी। इसके बाद आठ अगस्त 2018 को एसबीआई ने केदारनगर शाखा को रकम का पता लगाकर भुगतान कराने के लिए पत्र भेजा।
आयोग ने माना कि वेतन की रकम संबंधित खाते में पहुंचाने की जिम्मेदारी बैंक की थी। बैंक स्तर पर हुई गलती को सुधारने के बजाय मामले को दूसरे बैंक पर डाल दिया गया। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए मूल रकम पर ब्याज और हर्जाना देने का आदेश दिया।
बीएसए कार्यालय की कार्यशैली पर भी नाराजगी
मामले में आयोग ने बीएसए कार्यालय की कार्यशैली पर भी नाराजगी जताई। आयोग के अनुसार, शिक्षक ने 11 सितंबर 2017 को प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। आयोग ने आदेश की प्रति बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को भेजते हुए बीएसए के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है।
वादी की ओर से दायर परिवाद में वित्त एवं लेखाधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, ग्रामीण बैंक की संबंधित शाखाओं, अग्रणी बैंक अधिकारी और वरिष्ठ कोषाधिकारी को भी पक्षकार बनाया गया था। आयोग ने इनके खिलाफ परिवाद खारिज कर दिया। आयोग ने बैंक पर आर्थिक दायित्व तय करने के साथ बीएसए कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
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इसके अलावा मानसिक व आर्थिक क्षति के 10 हजार और वाद व्यय के पांच हजार रुपये भी 45 दिन के भीतर अदा करने होंगे। आयोग ने बीएसए के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी की है। महमूदपुर सेमरा निवासी बृजेश कुमार वर्मा कटेहरी के उच्च प्राथमिक विद्यालय आतडीह में सहायक अध्यापक हैं।
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उनका वेतन खाता बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक की केदारनगर शाखा में है। फरवरी 2017 में कार्य करने के बावजूद उन्हें वेतन नहीं मिला। उन्होंने अधिकारियों और बैंक से लगातार शिकायत की। बाद में 12 दिसंबर 2017 को कानूनी नोटिस भी भेजा। मामले में वित्त एवं लेखाधिकारी ने बताया कि 31 मार्च 2017 को शिक्षकों के वेतन के लिए 9,84,61,816 रुपये नेफ्ट के माध्यम से भेजे गए थे।
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इसमें बृजेश कुमार के 40,009 रुपये भी शामिल थे, लेकिन रकम उनके खाते में नहीं पहुंची। एसबीआई के 14 दिसंबर 2017 के पत्र से पता चला कि गलत आईएफएससी कोड के कारण रकम बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक के रायबरेली स्थित मुख्यालय पहुंच गई थी। इसके बाद आठ अगस्त 2018 को एसबीआई ने केदारनगर शाखा को रकम का पता लगाकर भुगतान कराने के लिए पत्र भेजा।
आयोग ने माना कि वेतन की रकम संबंधित खाते में पहुंचाने की जिम्मेदारी बैंक की थी। बैंक स्तर पर हुई गलती को सुधारने के बजाय मामले को दूसरे बैंक पर डाल दिया गया। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए मूल रकम पर ब्याज और हर्जाना देने का आदेश दिया।
बीएसए कार्यालय की कार्यशैली पर भी नाराजगी
मामले में आयोग ने बीएसए कार्यालय की कार्यशैली पर भी नाराजगी जताई। आयोग के अनुसार, शिक्षक ने 11 सितंबर 2017 को प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। आयोग ने आदेश की प्रति बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को भेजते हुए बीएसए के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है।
वादी की ओर से दायर परिवाद में वित्त एवं लेखाधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, ग्रामीण बैंक की संबंधित शाखाओं, अग्रणी बैंक अधिकारी और वरिष्ठ कोषाधिकारी को भी पक्षकार बनाया गया था। आयोग ने इनके खिलाफ परिवाद खारिज कर दिया। आयोग ने बैंक पर आर्थिक दायित्व तय करने के साथ बीएसए कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।