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विजयदशमी पर लें बुराइयों को मिटाने का संकल्प

Thu, 14 Oct 2021 11:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 14 Oct 2021 11:48 PM IST
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On Vijayadashami, take a pledge to eradicate evils
अंबेडकरनगर। असत्य पर सत्य की जीत के तौर पर मनाए जाने वाले विजयदशमी पर्व को लेकर समाज के तमाम गणमान्य नागरिकों ने कई प्रमुख संकल्प लिए हैं। समाज को आदर्श स्थिति की तरफ ले जाने के लिए किसी ने खुद में व्याप्त बुराइयों को दूर करने का संकल्प लेने का आह्वान किया, तो किसी का कहना था कि हमें ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे दूसरों को ठेस पहुंचे। सत्य के मार्ग पर चलने, सेवाभाव बनाए रखने, आपसी सौहार्द को मजबूत करने व लोभ तथा अहंकार का मार्ग छोड़ने आदि का संकल्प लेने का आह्वान किया गया। गणमान्य नागरिकों ने कहा कि प्रत्येक पर्व खुशियों का होता है। हमें इससे कोई न कोई सीख अवश्य ग्रहण करना चाए।ि ऐसा करने पर ही पर्वों की सार्थकता साबित होती है।
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खुद के अंदर की बुराई करेंगे दूर
विजयदशमी पर्व असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर हम सभी को चाहिए कि यह संकल्प लें कि अपने अंदर से सभी बुराइयों को दूर करेंगे। सत्य के मार्ग पर चलकर समाज व देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे। न सिर्फ खुद सत्य के मार्ग पर चलें, बल्कि दूसरों को भी इसके प्रति प्रेरित करें।
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रितेश पांडेय, सांसद
छोड़ें अहंकार व लोभ का मार्ग
भगवान राम ने सत्य का मार्ग अपनाते हुए मां दुर्गा के सभी नौ स्वरूपों की उपासना के बाद असत्य के मार्ग पर चलने वाले रावण का वध किया था। भगवान राम ने सिर्फ रावण का वध किया, बल्कि अहंकार पर भी विजय प्राप्त की थी। हम सभी को चाहिए कि अहंकार व लोभ छोड़कर सत्य के मार्ग पर चलें। साथ ही जरूरतमंदों की मदद करें।
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साधू वर्मा, जिपं अध्यक्ष
अच्छाई के मार्ग को अपनाएं
विजयदशमी हम सभी का प्रमुख पर्व है। इस पर्व को हम सभी भारतीय हर्षोल्लास व गर्व के साथ मनाते हैं। अश्वनी मास में नवरात्र का समापन होने के दूसरे दिन दशमी को भगवान राम ने रावण का वध कर लंका को पवित्र कर दिया था। हम सभी की जिम्मेदारी है कि भगवान राम के आदर्शों पर चलकर समाज को अच्छाई के रास्ते पर ले चलें और एक स्वच्छ व स्वस्थ समाज की स्थापना करें।
सुभाष राय, विधायक जलालपुर
तय करें महिलाओं का सम्मान
रावण ने माता सीता का अपहरण कर जो जघन्य अपराध किया था, उसका परिणाम दशमी को सामने आया। महिलाओं का किस प्रकार से सम्मान करना चाहिए, इसे भगवान राम ने बहुत अच्छे ढंग से परिभाषित किया था। भगवान राम ने रावण का अहंकार चूर कर दुनिया के लिए एक मूल्यवान शिक्षा प्रदान की थी। श्रीराम द्वारा दी गई शिक्षा के आधार पर महिलाओं को सम्मान दिया जाना चाहिए।
सरिता गुप्त, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद अकबरपुर
महिलाओं को दें उनका हक
विजयदशमी के दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण पर विजय प्राप्त की थी, तो माता दुर्गा ने महिषासुर का वध कर धरती को असुरों से मुक्त कराया था। तभी से दशहरा को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। मां दुर्गा के विभिन्न नौ स्वरूपों की विशेष पूजा अर्चना कर यह बताया गया है कि महिलाओं को सनातन समाज में कितना महत्व दिया गया है। ऐसे में सभी की जिम्मेदारी है कि वे महिलाओं को उनका पूरा हक प्रदान करें।
पुष्पा पाल, सचिव जनशिक्षण केंद्र कुटियवा
करें शुभ कार्यों की शुरुआत
विजयदशमी का दिन हम सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यह पूरा दिन शुभ मुहूर्त से भरा होता है। बड़े कार्य के लिए इसी दिन का चयन किया जाता है। इस दिन नया कार्य प्रारंभ करने पर सफलता भी मिलती है। ऐसे में हमारी सभी व्यापारी भाइयों से अनुरोध है कि इस दिन विधिविधान पूर्वक कार्य प्रारंभ करें।
शिवकुमार गुप्ता, जिलाध्यक्ष उद्योग व्यापार मंडल
किसी को ठेस न पहुंचाने का लें संकल्प
रावण दहन इस बात की पुष्टि करता है कि बुराई की उम्र बहुत अधिक लंबी नहीं होती है। पाप का घड़ा भर जाने पर उसका अंजाम रावण जैसा ही होता है। ऐसे में हम सभी को चाहिए कि भगवान राम के आदर्शों पर चलते हुए सत्य का मार्ग अपनाएं। कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे किसी को ठेस पहुंचे। जरूरतमंदों की बढ़ चढ़कर मदद करें।
अभिनव वर्मा, संरक्षक एके ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट
राम के आदर्शों पर होगा चलना
विजयदशमी का दिन हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का दिन है। इस दिन भगवान राम ने लंकापति रावण का वध कर यह संदेश दिया कि असत्य की राह पर चलने वाले का अंजाम यही होता है। हम सभी को चाहिए कि अपने अंदर की बुराइयों को इस दिन बाहर निकालें और भगवान राम के आदर्शों पर चलने का संकल्प लें।
दिग्विजय प्रताप, व्यवसायी
सेवाभाव से कतई न हटें पीछे
विजयदशमी के दिन भगवान राम ने सत्य की जीत सुनिश्चित की थी, तो संकटमोचक हनुमान ने जिस प्रकार से भगवान राम व माता सीता की सेवा की, वह हम सभी के लिए यह संदेश है कि हम सभी को दूसरों की सेवा करने में कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। सेवा करते समय यह नहीं देखना चाहिए कि वह किस वर्ग का है। ऐसे में हम सभी को इस पावन मौके पर यह संकल्प लेना होगा कि सभी की बगैर किसी लाभ के सेवा करें।

डॉ. विजय तिवारी, वरिष्ठ सर्जन
भारतीय संस्कृति को करें और मजबूत
भारतीय संस्कृति समूचे विश्व में सबसे बेहतर है। दूसरे देश के नागरिक भारतीय संस्कृति को अपनाना चाहते हैं। विजयदशमी के रूप में जिस प्रकार से रामलीला के मंचन के दौरान रावण के पुतले का दहन किया जाता है, वह भारतीय संस्कृति को और भी मजबूत करता है। हमारी सभी से अपील है कि इस पवित्र व गौरवशाली मौके पर भारतीय संस्कृति को और मजबूत करें।
मुकेश प्रजापति मधुर, प्रसिद्ध बांसुरी वादक
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