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सड़कों पर भीड़ से मतलब नहीं, बंद शटर खुलवाने पर जोर

Thu, 27 May 2021 11:16 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 27 May 2021 11:16 PM IST
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No congestion on the roads, emphasis on opening closed shutters
अंबेडकरनगर। कोरोना आंशिक कर्फ्यू में सड़कों की भीड़ पर अंकुश लगाने या अधिकृत दुकानों पर भीड़ रोकने की बजाए जनपद पुलिस का जोर अंदर से बंद शटर खुलवाने पर ज्यादा दिख रहा। पुलिस पर व्यापारियों का आरोप कि अवैध वसूली के लिए पुलिसकर्मियों ने बंद शटर खुलवाने वाला नया तरीका ईजाद कर लिया है। कानून का पालन कराने की आड़ में ज्यादती को लेकर छोटे बड़े सभी दुकानदारों में व्यापक आक्रोश है।
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व्यापार मंडल जिला इकाई ने 28 मई को एसपी और एडीएम से मिलकर ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। उद्योग व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष शिव कुमार गुप्त ने कहा कि पुलिस कर्मियों की ये मनमानी बर्दाश्त योग्य नहीं है। व्यापार मंडल ने चेतावनी दी है कि यदि उत्पीड़न और अवैध वसूली नहीं रुकी तो वे सब चुप नहीं बैठेंगे।
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आपदा को अवसर बना लेने वाली जनपद पुलिस आंशिक कर्फ्यू में सड़कों पर हो रही भीड़ रोकने की बजाए दुकानों के शटर खुलवा कर झांक रही है। बाजारों के नाराज व्यापारियों का आरोप है कि यह काम नियम कानून का पालन कराने की बजाए अवैध वसूली के लिए किया जा रहा। सड़कों पर हो रही भीड़ को रोकने की उतनी चिंता पुलिसकर्मियों में नहीं दिखती, जितना जोर बंद दुकानों को खुलवाने पर होता है। जिन दुकानों के शटर अंदर से बंद होते उन्हें पीटकर पहले तो पुलिस वाले खुलवाते हैं, फिर दुकान खुलते ही दुकानदारों को दुकान बिक्री के आरोप में पकड़ लेते हैं।
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मौके पर ही चालान करने की बजाय किसी दुर्दांत अपराधी की तरह उन्हें थाने ले जाया जाता, फिर वहां घंटों बैठाया जाता है। आरोप के मुताबिक वहां लंबी रकम ऐंठने के दांव चलते रहते हैं। इसके बाद भी कानूनी कार्रवाई की जाती है। जिस समय पुलिस अलग अलग थानों में बंद शटर खुलवाकर वसूली में जुटी होती है, उस समय उन्हें ठीक सामने सड़क पर कोरोना कर्फ्यू का उल्लंघन कर दौड़ रहे वाहनों और घूम रहे लोगों के चालान की सुध नहीं रहती। पीड़ित व्यापारियों का कहना है कि वाहन चालकों या आम नागरिकों से अवैध कमाई की गुंजाइश बेहद कम रहती है। इसलिए सारा फ़ोकस सिर्फ दुकानदारों पर है।
बंद शटर खुलवा कर कार्रवाई गलत, अधिकारी ध्यान दें
जिले के व्यापारियों ने पुलिस की मनमानी पर कड़ी नाराजगी जताई है। जलालपुर के रमेश ने कहा कि पुलिस को जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई हो। कर्फ्यू नियम का पालन वह बंद शटर को जबरिया खुलवा कर कर रही है। ऐसे पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। अकबरपुर के नरेंद्र जायसवाल ने कहा कि किसी अनधिकृत दुकान का शटर खुला हो या बंद शटर के बाहर बाइक और साइकिल आदि ज्यादा संख्या में खड़ी हो तो भी करवाई बनती है, लेकिन यह सब न होने के बावजूद बंद शटर को खुलवाना निंदनीय है। टांडा के अकील कहते हैं कि शादी विवाह के लिए यदि कोई जरूरतमंद अकेले आकर चुपचाप शटर गिराकर सामान ले रहा है तो मानवीयता के आधार पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। यदि यह नहीं मंजूर तो सड़कों पर भीड़ को क्यों चलने दे रही। आलापुर के श्यामलाल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस ने आपदा को जिस तरह वसूली के अवसर में बदला है यह उचित नहीं है। कई अन्य व्यापारियों ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जरूरत है। एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शटर खुलवाकर पकड़ लिया और सीधे थाने ले गए। 5 हजार नकद लिया, फिर दुकान खोलने का केस दर्ज कर छोड़ दिया।
व्यापार मंडल ने जताया पुलिस के रवैये पर आक्रोश
उद्योग व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष शिव कुमार गुप्त ने कहा कि पुलिस कर्मियों की मनमानी बर्दाश्त योग्य नहीं है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में व्यापारियों को परेशान करने और उनसे वसूली की शिकायत मिल रही है। शासन ने कतई किसी को उत्पीड़न करने की छूट नहीं दे रखी है। इसके बाद भी जिस तरह व्यापारियों को पकड़कर थाने ले जाया जा रहा या फिर उनसे दुकान पर ही वसूली की जा रही है उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिलाध्यक्ष ने बताया कि इन्हीं मुद्दों को लेकर शुक्रवार 28 मई को एसपी आलोक प्रियदर्शी व एडीएम डॉक्टर पंकज वर्मा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा जाएगा। हालात में सुधार न आया तो आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। संगठन व्यापारियों का उत्पीड़न होता देख चुप नहीं रह सकता।

नहीं होने दिया जाएगा उत्पीड़न
किसी भी व्यापारी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। अनायास दुकान न खोलें और जिन दुकानों को अनुमति है वहां भी भीड़ न लगे। इसके बाद यदि कोई पुलिसकर्मी कुछ करे तो उसकी जानकारी दें उसका संज्ञान लिया जाएगा। थानाध्यक्षों को इस बारे में सख्त हिदायत दे दी गई है।
- संजय राय एएसपी
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