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पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने की सुध नहीं
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Mon, 26 Sep 2016 11:17 PM IST
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अंबेडकरनगर में उपेक्षा का दंश झेल रहा पर्यटन स्थल विश्व प्रसिद्ध दरगाह किछौछा शरीफ।
- फोटो : अमर उजाला
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पर्यटन स्थलों की व्यवस्था चाकचौबंद करने को लेकर जिले में पूरी तरह लापरवाही का माहौल है। न तो सुंदरीकरण कराए जाने की सुध है और न ही आवागमन, पेयजल व प्रकाश व्यवस्था को ही चुस्त-दुरस्त करने को लेकर गंभीरता दिखाई जा रही है। नतीजतन इन पर्यटन स्थलों पर आने वाले लोगों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
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पर्यटन स्थलों की व्यवस्था में सुधार लाए जाने के लिए समय-समय पर आम लोगों समेत समाजसेवियों द्वारा आवाज बुलंद की जाती रहती है लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। इस तरफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। नतीजा यह कि इसका खामियाजा यहां आने वाले लोगों को भुगतना पड़ता है। 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जा रहा है।
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इसे लेकर जिले में किसी भी प्रकार की हलचल एक दिन पहले तक नहीं दिखाई दी। न तो घोषित किए गए पर्यटन स्थलों पर किसी प्रकार की साफ-सफाई कराई गई और न ही पर्यटन को और मजबूत करने के लिए ही किसी प्रकार की प्रक्रिया शुरू की जा सकी।
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शासन स्तर से जिले में श्रवणक्षेत्र धाम, पवित्र शिवबाबा, गोविंद साहब, विश्व प्रसिद्ध किछौछा दरगाह को पर्यटन स्थलों तो घोषित कर दिया गया लेकिन इन स्थलों पर आने वाले लोगों को आवश्यक सुविधाएं देने के लिए प्रशासन द्वारा लंबे समय से किसी प्रकार का ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
उपेक्षा के चलते ज्यादातर पर्यटन स्थलों पर गंदगी का अंबार है, तो इन पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए संपर्क मार्ग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। पेयजल व प्रकाश की समस्या लंबे समय से बनी हुई है जिसे दूर करने की सुध प्रशासन को नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमाकांत मिश्र ने कहा कि सिर्फ पर्यटन स्थल घोषित करना ही बड़ी बात नहीं है।
उसकी देखरेख व आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध कराने को लेकर भी शासन-प्रशासन को गंभीरता दिखानी होगी। आस्था के केंद्र जिन धार्मिकस्थलों को पर्यटन स्थल घोषित किया गया है, उनमें ज्यादातर उपेक्षा के शिकार हैं। विद्यालय प्रबंधक मेहंदी रजा ने कहा कि पर्यटन स्थलों की उपेक्षा चिंताजनक है। शासन-प्रशासन को इस तरफ ठोस कदम उठाना होगा।
पूर्वांचल के प्रसिद्ध धार्मिकस्थल गोविंदसाहब मठ को पर्यटन स्थल तो घोषित किया गया है लेकिन उसकी देखरेख व आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध कराए जाने की सुध शासन-प्रशासन को नहीं है। आस्था के केंद्र इस धार्मिकस्थल पर वर्ष में एक बार नवंबर माह में मेला लगता है। पूर्वांचल के प्रसिद्ध इस मेले में न सिर्फ जिला अंबेडकरनगर, बल्कि इर्दगिर्द के जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
एक माह तक चलने वाले मेले में पूरी तरह अव्यवस्थाओं का दौर रहता है। प्रकाश, पेयजल व साफ सफाई का संकट लंबे समय से बना हुआ है, जिसे दूर करने की सुध शासन प्रशासन को नहीं है। विश्व प्रसिद्ध किछौछा दरगाह को लेकर भी शासन-प्रशासन गंभीरता नहीं दिखा सका।
पूरे विश्व में अपनी ख्याति फैला चुके इस धार्मिकस्थल पर वैसे तो प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आस्तान-ए-आलिया पर माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं लेकिन उर्स के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु मेला क्षेत्र में पहुंचते हैं। वैसे तो दरगाह क्षेत्र की देखभाल इंतजामिया कमेटी करती है।
प्रकाश, पेयजल व साफ सफाई के साथ-साथ सुंदरीकरण की जिम्मेदारी भी इंतेजामिया कमेटी ही करती है। दरगाह परिसर के अलावा इर्दगिर्द के क्षेत्र की साफ-सफाई व्यवस्था नगर पंचायत के जिम्मे है। इन क्षेत्रों में साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी रहती है। इसके अलावा पेयजल व प्रकाश की अव्यवस्था से भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं को व्यापक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
एडीएम रामसूरत पांडेय ने बताया कि पर्यटन स्थलों के सुंदरीकरण का कार्य समय-समय पर चलता रहता है। साफ-सफाई, पेयजल व प्रकाश की समुचित व्यवस्था इन पर्यटन स्थलों पर की गई है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।